Home रतलाम आचार्यश्री रामेश के व्याख्यान का असर, देखते-देखते हो गई दो दीक्षाएं

आचार्यश्री रामेश के व्याख्यान का असर, देखते-देखते हो गई दो दीक्षाएं

रतलाम, 11 अगस्त(खबरबाबा.काम)। श्री साधुमार्गी जैनश्री संघ द्वारा आयोजित  संयम साधना महोत्सव ने रतलाम में नया इतिहास रच डाला। व्यसन मुक्ति प्रणेता, दीक्षा दानेश्वरी, आचार्य प्रवर 1008 श्री रामलालजी म.सा.की अमृत देशना के दौरान दो श्रावकों में देखते ही देखते वैराग्य जागा। उन्होंने जैन भागवती दीक्षा ग्रहण करने की इच्छा जताई और परिजनों तथा श्री संघ की सहमति मिलने पर डेढ़ घंटे के अंतराल पर दोनो ने आचार्यश्री रामेश के मुखारविंद से दीक्षा ग्रहण कर ली।

दीक्षा का यह प्रसंग अनायास ही बना। आचार्यश्री ने अमृत देशना में जब कहा कि श्रावक के आध्यात्म जीवन का लक्ष्य आरोहण होता है। आरोहण से तात्पर्य उच्चता की और अग्रसर होना है। इसी बीच आचार्यश्री की प्रेरणा पाकर समता शीतल बाग में गत 9 अगस्त से आयोजित आरोहणा शिविर में शामिल रतलाम के प्रतापनगर निवासी इंदरमल पिता रतनलाल कांठेड़ खड़े हो गए। उन्होंने जैन भागवती दीक्षा ग्रहण की इच्छा जताई। आचार्यश्री ने धर्मसभा में उपस्थित उनके परिजनों से आज्ञापत्र मिलने पर उन्हें उन्हें सुबह 11.42 बजे दीक्षा प्रदान की। इसके बाद इंदौर के बाबूलाल संघवी ने दीक्षा ग्रहण करने की इच्छा व्यक्त की। उनके परिजनों से तत्काल सहमति नहीं दी, जिसपर कुछ समय  पारिवारिक चर्चा में बीता। श्री संघवी की दृढता पर आखिरकार परिजन मान गए और आज्ञापत्र सौंपा।

इसके बाद आचार्यश्री ने उन्हें दोपहर 1.18 बजे दीक्षा प्रदान की। दीक्षा पश्चात दोनो के नए नामों की घोषणा की गई। चातुर्मास संयोजक महेंद्र गादिया ने बताया कि इंदरमल जी को नवदीक्षित श्री इभ्यमुनिजीम.सा. तथा बाबूलालजी को नवदीक्षित श्री ब्रम्हऋषि मुनिजी म.सा. का नाम मिला। उनके दीक्षा ग्रहण करते ही पूरा समता कुंज केशरिया-केशरिया, आज हमारो मन केशरिया के स्वरों से गूंज उठा। उपस्थित जनों ने  मंगलगीतों से दीक्षा की अनुमोदना की। आचार्यश्री ने दीक्षा को शूरवीरता बताया। उन्होंने कहा कि व्याख्यान सुनने कई लोग आते है, लेकिन असर जिनपर होता है, वे भव्य आत्माएं होती है। दोनो दीक्षार्थियों ने हरियाली अमावस्या के पावन पर्व पर अपने जीवन की हरियाली बना ली है। श्री गौतममुनिजी म.सा.एवं श्री आदित्य मुनिजी म.सा.सहित उपस्थित साधु व साध्वी मंडल ने गीतिकाएं प्रस्तुत की। चंदन पिरोदिया के आव्हान पर सबने जयकारा लगाया। कार्यक्रम का संचालन सुशील गौरेचा, महेश नाहटा ने किया।

मंदसौर में पौत्री ने रतलाम में दादा ने ली दीक्षा

दीक्षा दानेश्वरी, आचार्य प्रवर 1008 श्री रामलालजी म.सा.का रतलाम चातुर्मास ऐतिहासिक बनता जा रहा है। चातुर्मास से पहले मंदसौर प्रवास में उनके इंदौर की सुरभि संघवी जैन भागवती दीक्षा अंगीकार कर नवदीक्षित साध्वी श्री स्वागतश्री जी म.सा.बन गई थी। चातुर्मास में हरियाली अमावस्या पर उनके सांसारिक दादा बाबूलाल संघवी समता कुंज में दीक्षा ग्रहण कर ली। श्री संघवी के परिजन पहले दीक्षा के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन लंबी पारिवारिक चर्चा के बाद अनुमति दे दी। पुत्र निर्मल, अनिल, पुत्रवधू संगीता व साधना संघवी और पुत्री किरण चंडालिया ने आचार्यश्री को आज्ञापत्र सौंपा।

इससे पूर्व रतलाम निवासी इंदरमल कांठेड की जैन भागवती दीक्षा हुई। उनके दीक्षा प्रसंग पर परिजनों के भाव अनुकरणीय और अभिनंदनीय थे। श्री कांठेड़ की धर्मपत्नी चंदनबाला, पुत्र मनोज, तरूण, संजय व प्रदीप कांठेड़ तथा पुत्री वंदना-रोहित रूनवाल ने आज्ञापत्र सौंपा। पुत्र तरूण ने पिता द्वारा दीक्षा लेने पर भविष्य में अन्य परिजनों के भी दीक्षा लेने के भाव व्यक्त किए।

10 वर्ष पूर्व जब राम मुनि का चातुर्मास रायपुर में था उस समय हिम्मतजी कोठारी के बड़े भाई श्री चंदजी कोठारी ने प्रवचन के दौरान ही दिक्षा ग्रहण कर ली थी आज रायपुर का इतिहास रतलाम में दोहराया और दो लोगो ने प्रवचन के दौरान ही दीक्षा ग्रहण कर ली ।