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उत्साह के साथ मनाया गया भगवान महावीर स्वामी का जन्म वाचन समारोह, जिनालयों में हुई आकर्षक अगंरचना, प्रभु दर्शनों के लिए उमड़ेगी भीड़

रतलाम 10 सितम्बर(खबरबाबा.काम)। पर्युषण महापर्व के पांचवे दिन भगवान महावीर स्वामी का जन्म वाचन महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर 14 सपनाजी की बोलियों का लाभ लिया गया   । जिनालयों में भगवानजी की प्रतिमा की आकर्षक अगंरचना की गई ।जैन धर्मावलंबी जिनालयों में दर्शन के लिए पहुंचे।

पर्वाधिराज पर्युषण पर्व में जिनशासनरत्न पू.आ. श्री जिनचन्द्रसागरसूरी जी मसा एवम पू.आ. श्री हेमचंद्रसागरजी म.सा.बंधु बेलड़ी की निश्रा में भगवान महावीर स्वामी का जन्मवाचन आस्था और उल्लास से मनाया गया। भक्तों ने ‘संघ में आनंद भयो..जय बोलो महावीर की…’.के जयघोष कर नाचते गाते जन्म की बधाईयाँ देते हुए खुशियाँ मनाई।केसरिया छापे लगाकर प्रभु के प्राकटय का उत्सव मनाया।

श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई श्रीसंघ ने आचार्य श्री बन्धुबेलड़ी की निश्रा में कल्पसूत्र वाचन के पांचवे दिन भगवान श्री महावीर स्वामी का जन्मवाचन परम्परागत तरीके से मनाया। आचार्य श्री के सानिध्य में जन्मवाचन का लाभ लेने के लिए बड़ी संख्या में समाजजन आगमोउद्धारक वाटिका में पहुंचे थे।जन्म कल्याणक की परम्परा के मुताबिक 14 सपनाजी और अष्टमंगल की बोलियों का समाजजनों ने लाभ लेकर सपरिवार कल्पसूत्र का पूजन किया।प्रभु का जन्म होते ही चंहुओर खुशियाँ और जयजयकार से वाटिका का वातावरण आल्हादित हो गया। प्रदीप डांगी और यतीन्द्र जैन ने सस्वर वन्दना से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

जन्म, कर्म और विचार  –

धर्म जागरण चातुर्मास के 51 वे दिन पर्वाधिराज अंतर्गत आचार्य श्री ने कल्पसूत्र श्रवण करवाते हुए कहा की परमात्मा का चरित्र सुनने से उनके दिव्य संस्कार हमें भी प्राप्त होते है. परमात्मा की करुणा कृपा से जीवन धर्म और आराधनामय बन जाता है। उन्होंने कहा की तीर्थंकर परमात्मा ने सभी जीवों के कल्याण और संघ की स्थापना के उद्देश्य को लेकर अवतरण लिया। आज हजारों साल बाद भी उनके उपदेशों के माध्यम से विश्वशांति और कल्याण की भावना फलीभूत हो रही है।कल्पसूत्र का श्रवण हमारा धर्म है। जब प्रभु के जन्मवाचन का मंगल अवसर आता है तो चंहुओर उल्लास छा जाता है। यही उल्लास हमें धर्म आराधना के पथ पर आगे बढने के लिए प्रेरित करता हैः उन्होंने कहा की दिव्यात्मा के जन्म, कर्म और विचार सभी दिव्य होते है। उनका लक्ष्य ही सृष्टि के प्रत्येक जीव का कल्याण होता है।ऐसा ही मंगल प्रसंग आज आया है।

सकल जीव कल्याण का भाव –

गणिवर्य श्री विरागचन्द्रसागरजी मसा ने तीर्थंकर परमात्मा के जन्म के पूर्व 14 स्वप्नों के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि इनके श्रवण से भाग्य का दरवाजा खुल जाता है।अष्टमंगल से मंगल भाग्योदय होता है।पुण्यो का संचय होता है. लक्ष्मी का निवास उसके यंहा होता है, जो उसे परमार्थ और धर्म के कार्य में लगाता है।आपने कहा कि प्रभु के जीवन चरित्र का श्रवण करते हुए अपने चरित्र को उज्ज्वल बनाये। सकल विश्व में शांति की कामना करते हुए जिन शासन में परमात्मा का जन्म कल्याणक मनाया जाता है।

अाराधना भवन श्री संघ ने भी धूमधाम से मनाया जन्म वाचन महोत्सव

आराधना भवन श्री संघ में भी भगवान महावीर स्वामी का जन्म वाचन महोत्सव धूमधाम से मनाया गया ।सेठिया मैरिज गार्डन पर पूज्य मुनि राज श्री मोक्ष दर्शन विजय जी म. सा. और आगम रत्न विजय जी म. सा. की निश्रा में जन्म वाचन महोत्सव मनाया गया। इसी तरह कस्तूरबा नगर स्थित श्री नमिनाथ जिनालय,टीआईटी रोड जैन श्री संघ एवं नगर के अन्य जैन धर्म स्थलों पर भी भगवान महावीर स्वामी का जन्म वाचम समारोह धूमधाम के साथ मनाया गया।