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कुशल राजनीतिज्ञ के साथ सफल बिजनेसमेन भी है कमलनाथ। जानिए प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के बारे में-

भोपाल, 14दिसम्बर(खबरबाबा.काम)। मध्‍य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष और अब मध्‍य प्रदेश का मुख्‍यमंत्री बनने जा रहे कमलनाथ एक उत्‍कृष्‍ट और कुशल राजनीतिज्ञ के साथ ही साथ एक सफल बिजनेसमैन भी हैं। वह नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं। उत्‍तर प्रदेश के कानपुर में जन्‍म लेने वाले कमलनाथ मूलत: पश्चिम बंगाल से हैं और उनका कार्यक्षेत्र मध्‍य प्रदेश का छिंदवाड़ा है।

18 नवंबर 1946 को उत्‍तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में कमलनाथ का जन्‍म हुआ था। कमलनाथ की स्‍कूली शिक्षा देहरादून के प्रसिद्ध दून स्‍कूल से हुई। वहां उनकी दोस्‍ती साथ में पढ़ने वाले संजय गांधी के साथ हुई। कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज से उन्‍होंने अपनी उच्‍च शिक्षा पूरी की।

34 साल की उम्र में पहली बार वह मध्‍य प्रदेश के छिंदवाड़ा से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। कमलनाथ की असली ताकत गांधी परिवार से उनकी पुरानी दोस्‍ती है। संजय गांधी और कमलनाथ की दोस्‍ती के किस्‍से आज भी राजनीतिक गलियारों में बहुत मशहूर हैं।

छिंदवाड़ा एक आदिवासी इलाका है, कमलनाथ ने यहां आदिवासियों के उत्‍थान के लिए काम किया और अपना कारोबारी साम्राज्‍य भी फैलाया। यहां के लोगों को रोजगार देकर वो यहां के माईबाप जैसे बन गए। यही वजह है कि छिंदवाड़ा से वह लगातार सांसद चुने जाते रहे हैं। कमलनाथ की 23 कंपनियां हैं, जिनका कामकाज उनके दोनों बेटे मिलकर देखते हैं।  कांग्रेस शासनकाल में वह उद्योग मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, वन और पर्यावरण मंत्रालय, सड़क व परिवहन मंत्रालय की जिम्‍मेदारी संभाल चुके हैं।

राजनीतिक करियर

मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से लगातार नौ बार सांसद होने का रिकॉर्ड है. कमलनाथ पहली बार सातवीं लोकसभा यानी 1980 में जीते. वह फिर 1985, 1989 और 1991 में भी जीते. जून 1991 में पहली बार वह केंद्रीय मंत्री बने. उन्हें पर्यावरण और वन मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार का पद मिला.

1995 से 1996 में वह केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री रहे.1998 और 1999 में भी कमलनाथ विजयी रहे. 2001 से लेकर 2004 तक वह कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रहे. 2004 में फिर चुनाव जीते तो मनमोहन सरकार में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री हुए. 2009 तक इस पद रहे. 2009 में फिर से छिंदवाड़ा सीट से जीते तो यूपीए दो सरकार  में सड़क परिवहन मंत्री बने. 2011 में कैबिनेट री-शफल हुआ तो कमलनाथ को शहरी विकास मंत्री बनाया गया.अक्टूर 2012 में कमनाथ को संसदीय कार्यमंत्री की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली. 2012 में कांग्रेस ने कमलनाथ को प्रणव मुखर्जी की जगह यूपीए की ओर से एफडीआई की डिबेट में हिस्सा लेने का मौका दिया था. वजह कि खुद व्यापार से जुड़ा होने के कारण कमलनाथ व्यापारिक मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं.