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गांवों में बाल विवाह होने पर संरपच और सचिव होगें जिम्मेदार, जिला प्रशासन ने बाल विवाह रोकने के लिए उठाए कदम

रतलाम,12 अप्रैल(खबरबाबा.काम)। जिले में बालविवाह को रोकने के लिए प्रशासन ने प्रयास शुरु कर दिए है। एक और प्रशासन ने विवाह आयोजनों में सेवा देने वाले लोगों से बाल विवाह आयोजन में सेवाएं ने देने की अपील की है, वहीं ग्राम पंंचायत स्तर पर बाल विवाह होने पर संरपच, सचिव और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की जिम्मेदारी तय कर दी है।

आगामी 18 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर सामूहिक विवाह एवं विवाह सम्पन्न होंगे, कलेक्टर श्रीमती रूचिका चैहान ने आम नागरिकों से अपील की है कि जो भी सेवा प्रदाता जैसे प्रिंटिंग प्रेस, हलवाई, केटरर, धर्मगुरू, पंडित, काजी, पादरी, समाज के मुखिया, बैण्ड वाले, घोड़े वाले, डीजे वाले, ब्युटी पार्लर, मैरेज गार्डन, टेन्ट हाउस, डेकोरेशन वाले, ट्रांसपोर्टर इत्यादि सेवा प्रदाता बिना उम्र के प्रमाणीकरण प्राप्त किए बगैर विवाह समारोह में सेवायें न देवें, इस कुप्रथा को रोकने में प्रशासन एवं पुलिस को सहयोग प्रदान करें। बालक की उम्र 21 वर्ष एवं बालिका की उम्र 18 वर्ष से कम न हो का प्रमाणीकरण का दस्तावेज यदि सेवा प्रदाता या सामूहिक विवाह सम्पन्न कराने वाली समितियां ऐसे विवाह में सम्मिलित होती है या विवाह सम्पन्न कराती है तो बाल विवाह अवरोध अधिनियम 2006 के तहत यह एक संज्ञेय अपराध है जिसमें दो वर्ष का सश्रम कारावास या 1 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने हेतु इसकी सूचना तुरन्त प्रशासन, पुलिस अथवा संबंधित परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग को देवे।  सूचनादाता का पूर्णत: गोपनीय रखा जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर पर कोई बाल विवाह सम्पन्न होता है तो स्थानीय सरपंच, सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जिम्मेदार होंगे।

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