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चातुर्मास घोषणा होते ही श्री सौभाग्य सूर्य अणु वाटिका में छाया उल्लास,प्रवर्तक श्री ने पेटलावद श्री संघ को प्रदान किया चातुर्मास

रतलाम,24 मार्च(खबरबाबा.काम)। श्री गोपाल गोशाला कालोनी स्थित श्री सौभाग्य सूर्य अणु वाटिका में  प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी के श्रीमुख से जैसे ही वर्षावास की घोषणाएं हुई, सर्वत्र उल्लास छा गया। प्रवर्तक श्री ने उनका चातुर्मास पेटलावद श्री संघ को प्रदान किया। इससे पूर्व उन्होंने अपने आज्ञानुवर्ती साधु-साध्वीजी के सन 2019 के वर्षावास  स्थलों की घोषणा की। इस दौरान देशभर के अनुयायी मौजूद रहे, जिससे वाटिका का पांडाल छोटा पड़ गया।
होली चातुर्मास के दौरान प्रवर्तक श्री के मुखारविंद से वर्षावास  स्थलों की घोषणा का यह वृहद आयोजन श्री धर्मदास जैन श्री संघ रतलाम के तत्वावधान में हुआ। इसमे देश के विभिन्न राज्यों से आए श्री संघ प्रतिनिधियों ने आगामी वर्षावास प्रदान करने की विनंती की। 33 से अधिक श्री संघो ने विनती के दौरान पुरजोर आग्रह के साथ “गूंजे धरती,गूंजे अंबर” का उदघोष करते हुए उनका पहला नंबर रखने का नारा गुंजायमान किया। पेटलावद श्री संघ की और से समाजजनों के साथ क्षेत्र के सांसद कांतिलाल भूरिया एवं विधायक वालसिंह मईड़ा ने भी प्रवर्तक श्री से चातुर्मास की विनती की। इंदौर एवं उज्जैन के नमक मंडी संघ ने वर्ष 2020 का वर्षावास प्रदान करने की विनती की। श्रद्धा,भक्ति और उत्साह पूर्ण वातावरण में वर्षावास स्थलों की घोषणा हुई।
प्रवर्तक श्री ने इस मौके पर कहा कि वर्षावास साधु-साध्वी जी का अपना कल्प है। सभी भावना रहती है कि उन्हें वर्षावास का लाभ मिले, इसलिए जिन्हें वर्षावास नही मिले, वे संघ नाराज ना हो। सभी संघ धर्म आराधना करें। साध्वी समुदाय के वर्षावास ज्यादा होते है, धर्म की प्रभावना में भी उनका विशेष योगदान रहता है। उनका बराबर लाभ लेवे और सुरक्षा आदि का विशेष ध्यान रखे। इससे पूर्व अणु वत्स श्री संयतमुनिजी ने कहा कि वर्षावास के लिए गरजते है,तो बरसना भी सही। प्रवर्तक श्री सबको वर्षावास देना चाहते है। जिन्हें वर्षावास मिला है, वे प्रसन्न होना, प्रमादी मत बनना। वर्षावास शुरू होने पर अच्छी तरह आराधना करना, इस दौरान घूमना-फिरना मत करना। इससे पूर्व श्री धर्मदास जैन गण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष शांतिलाल भंडारी ने विचार रखे।
श्री धर्मदास जैन श्री संघ रतलाम  के अध्यक्ष अरविंद मेहता ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि गुरु आज्ञा सर्वोपरि है। हमे आज्ञा पालन कर अहिंसा का अनुसरण करना है। इस मौके पर युवा तपस्वी संभव मूणत ने 25 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। अन्य तपस्याओं के भी प्रत्याख्यान हुए। पुज्यश्री नंदाचार्य साहित्य समिति मेघनगर ने आचार्य प्रवर श्री उमेशमुनिजी के साहित्य का स्टाल लगाया। इस दौरान अखिल भारतीय श्री धर्मदास स्थानकवासी जैन युवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण विनायक्या, राष्ट्रीय महामंत्री मिलिंद कोठारी, अतुल मूणत, अखिल भारतीय श्री चंदना श्राविका संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष दिव्या डोसी,  रतलाम संघ के महामंत्री सुशील गादिया, सचिव दिलीप चाणोदिया, कोषाध्यक्ष माणकलाल कटकानी,प्रचार सचिव ललित कोठारी, अणु मित्र मंडल के अध्यक्ष विनय लोढ़ा सहित श्री धर्मदास जैन श्री संघ,अणु मित्र मंडल, अणुश्री श्राविका मंडल, अणु बालक- बालिका मंडल के पदाधिकारी एवं सदस्यगण  उपस्थित थे। संचालन अणु मित्र मंडल के महामंत्री राजेश कोठारी एवं सचिव मिलिन गांधी ने किया। कार्यक्रम पश्चात धर्मदासगण की साधर्मिक वात्सल्य का आयोजन भी किया गया,जिसमे सभी धर्मावलंबियों ने गौतम प्रसादी ग्रहण की।
साध्वी श्री मुक्तिप्रभाजी रतलाम में करेंगी वर्षावास
प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनि जी ने  श्री सौभाग्य सूर्य अणु वाटिका में
जैसे ही पेटलावद श्री संघ को अपना चातुर्मास प्रदान किया, पूरा पांडाल जय-जयकार से गूंज उठा। प्रवर्तक श्री ने द्रव्य,क्षेत्र,काल,भाव सभी आगारों  सहित सबके वर्षावास घोषित किए। श्री कानमुनिजी का वर्षावास जलगांव, पंकजमुनिजी का भुसावल एवं अणुवत्स श्री संयतमुनिजी का वर्षावास संजेली (गुजरात) को प्रदान किया। इसी प्रकार धर्मेंद्रमुनिजी का हाटपिपलिया, प्रेममुनिजी का लासूर (महाराष्ट्र), संदीपमुनिजी का बड़वानी, दिलीपमुनिजी का खिरकिया एवं हेमंतमुनिजी का वर्षावास नागदा (धार) श्री संघ को प्रदान किया।
साध्वी श्री प्रवीणाजी आदि ठाणा का सिंदूरणी (महाराष्ट्र),सुवर्णा जी का चोपड़ा (महाराष्ट्र), धर्मलता जी का बारसी (महाराष्ट्र), पुष्पलताजी का खाचरोद, मधुबालाजी का यवतमाल,  समर्पिताजी का फतेहपुर (महाराष्ट्र), रश्मिजी का नांदगांव (महाराष्ट्र) एवं मुक्तिप्रभाजी का वर्षावास रतलाम संघ को प्रदान किया। साध्वी श्री पुण्यशीला जी आदि ठाणा का कुशलगढ़ एवं उनकी शिष्याओं का इंदौर तथा करही संघ,आदर्शज्योतिजी का निफाड़ (महाराष्ट्र), संयमप्रभाजी का औरंगाबाद (वर्धमान रेसीडेंसी),साध्वी चंपाजी का  जामनगर (गुजरात) संघ एवं निखिलशीलाजी का चातुर्मास थांदला श्री संघ को प्रदान किया गया।