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जावरा बालिका गृह मामला:जांच के बाद बाल संरक्षण आयोग के सदस्यों ने कही यह बात

रतलाम,5फरवरी(खबरबाबा.काम)। जावरा बालिका गृह कुंदन कुटीर के बहुचर्चित मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है।बालिका शोषण के बारे में बाल सरंक्षण आयोग के सदस्यों ने कहा है की बच्चियों के साथ कोई बलात्कार नहीं हुआ है ।

मंगलवार को जाँच के बाद सर्किट हाऊस पर मीडिया से चर्चा में राज्य बाल कल्याण एवं संरक्षण आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान, दवींद्र मोरे और आशीष कपूर ने कहा की जावरा के बालिका गृह कुंदन कुटीर में बच्चियों के साथ जो हुआ वो बहुत गंभीर है, लेकिन बालिकाओं के साथ दुष्कर्म जैसी घटना की अभी पुष्टि नहीं हो रही है। बालिकाओ के साथ बुरा व्यवहार हो रहा था इसमें कोई शक नहीं है और इसमें सबसे बड़ी गलती महिला एवं बाल विकास विभाग की है। विभाग के अधिकारियों ने लगातार और गंभीर स्तर की लापरवाही की है। राज्य बाल संरक्षण एवं कल्याण आयोग का तीन सदस्यीय दल मंगलवार को रतलाम पहुंचा। यहां उन्होंने सुबह जावरा जाकर बालिका गृह देखा और संबंधित लोगों और पुलिस तथा प्रशासन के अधिकारियों से बैठक भी की। मीडिया से चर्चा में श्री चौहान ने कहा कि आयोग ने अपनी जांच में पाया है कि बालिकाओ के साथ शोषण तो हुआ है, लेकिन अभी तक पांच साल की जिस बच्ची का जिक्र किया गया है, उसके साथ दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि इस बात के संकेत स्पष्ट रूप से मिले हैं कि लैंगिग अपराध और प्रयास जैसी घटनाएं जरूर हुई है जो पास्को की श्रेणी में आते हैं। जुवैनायल जस्टिस एक्ट के तहत भी बालिकाओं के साथ अत्याचार हुए जो चिंतनीय है।

विभाग के और अधिकारी आ सकते हैं जद में

आयोग सदस्यों ने कहा कि महिला बाल विकास विभाग का कर्तव्य था कि हर महीने बच्चियों से बात करें, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। विभाग के दो अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, लेकिन जांच रिपोर्ट के बाद और भी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। आयोग अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा जिसमें दोषी अधिकारियों के नाम सहित कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा होगी।

बुधवार को करेंगे बच्चियों से मुलाकात

श्री चौहान ने बताया कि बुधवार सुबह मंदसौर जाकर उन बच्चियों से मुलाकात करेंगे जो पहले कुंदनकुटीर में रहती थी। इसके बाद इंदौर और उज्जैन भेजी गई बच्चियों से भी मुलाकात करेंगे। बच्चियों से बात करने के बाद ही बहुत सी वस्तुस्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और प्रशासन अपने स्तर पर स्वतंत्र इंवेस्टिगेशन कर रहा है और आयोग अपनी जांच कर रहा है।