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पारस सकलेचा ने कहा, उनका कांग्रेस में आना दलबदल नहीं, पत्रकारवार्ता में शहर विधायक पर साधा जमकर निशाना,पूर्व में स्वीकृत कार्यो का यश लेने और चार वर्षो में नई योजना नहीं लाने का लगाया आरोप।

 

रतलाम,13 मार्च(खबरबाबा.काम)। विधानसभा चुनाव के पूर्व एक बार फिर से कांग्रेस का दामन थामने वाले पारस सकलेचा ने मंगलवार को पत्रकारवार्ता का आयोजन कर अपने कांग्रेस में आने से लेकर शहर विकास सहित अन्य मुद्दो पर अपनी बात रखी। सकलेचा ने शहर विधायक पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होने विधायक पर पूर्व में स्वीकृत कार्यो का यश लेने और चार वर्ष में कोई नई योजना या कार्य स्वीकृत नहीं कराने का आरोप लगाया। सकलेचा यही नहीं रुके उन्होने इशारों-इशारों में शहर विधायक द्वारा निगम में हस्तक्षेप की बात कहते हुए यह भी कहा कि  वे महापौर होते तो विधायक को निगम के काम में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करने देते।

पत्रकार वार्ता में अपने उपर लग रहे दलबदल के आरोप का भी सकलेचा ने स्वंय आगे बढकर जबाव दिया। उन्होने कहा कि जब से वे कांग्रेस में आए है, उन पर दलबदल के आरोप लग रहे है, लेकिन मैं दलबदलु नहीं हूं। यदि मैं किसी स्वार्थ, लोभ, आर्थिक हित के लिए सत्ताधारी पार्टी के साथ जाता तो दलबदलू होता, जबकि मैं तो विपक्ष में गया,यह दलबदल नहीं बल्कि क्रांति है। दलबदलु तो वे लोग है जो बीस सालों तक कांग्रेस में रहे और कांग्रेस का गुणगाण करते रहे और बाद में सत्ता बदलते ही अपने उद्योग-धंधो को बचाने और बढ़ाने के लिए सत्ताधारी पार्टी में चले गए।

 शहर विधायक पर साधा जमकर निशाना

पत्रकार वार्ता में पारस सकलेचा ने शहर विधायक पर जमकर निशाना साधा। उन्होने कहा कि राज्य योजना आयोग का उपाध्यक्ष रहने के बाद भी बजट में रतलाम को कुछ नहीं मिला। रतलाम के लिए कोई नई योजना या उद्योग नहीं आए। सकलेचा ने आरोप लगाया कि शहर विधायक पूर्व में स्वीकृत कार्यो का यश ले रहे है। उन्होने नई योजना या कार्य के लिए आज तक अपनी और से शासन को कोई पत्र नहीं लिखा। मेडिकल कालेज भी पूर्व में स्वीकृत हो चुका था। सिंहस्थ के समय  दुसरे शहरों से विकास कार्यो के प्रस्ताव गए और वहां करोड़ों के काम हुए भी, लेकिन रतलाम से कोई प्रस्ताव नहीं गया।  राजनैतिक स्वार्थ के चलते 136 करोड़ की सीवरेज योजना को भी उन्होने रोकने का आरोप लगाया। सकलेचा ने कहा कि पिछले चार वर्षो में शहर के ओद्योगीक विकास के क्षैत्र में एक प्रतिशत भी काम नहीं हुआ। अल्कोहल प्लांट की जमीन लघु उद्योगो को मिलना था वह भी नहीं मिली। शहर स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं हो पाया। रोजगार भी कम हुआ। उन्होने बाजना बस स्टैण्ड फोरलेन के मुद्दे पर कहा कि भाजपा के लोग ही आपस में लड़ रहे है। 80 फीट और 104 फीट के फोरलेन को लेकर लड़ाई  हो रही है। जबकि शहर में कोई भी निर्माण कार्य कराना निगम का कार्य है, पहले वहां या जिला योजना समिति की बैठक में प्रस्ताव पास होना चाहिए , लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। एक व्यक्ति सभी निर्णय ले रहा है। गीता मंदिर रोड जहां यातायात का अत्यधिक दबाव है वहां 60 फीट में फोरलेन बन गया, क्यों कि वहां उनके हित है और बाजना बस स्टैण्ड पर 104 फिट की बात कही जा रही है। उन्होने इशारों-इशारों में शहर विधायक पर निगम में हस्तक्षेप का भी आरोप लगाया और यह भी बताने से नहीं चुके कि वे महापौर होते तो विधायक को नगर निगम में हस्तक्षेप नहीं करने देते।

 यह थे मौजुद

पत्रकारों से चर्चा के अवसर पर जिला प्रभारी धीरुभाई पटेल, शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनोद मिश्रा, जेम्स चाको, शांतिलाल वर्मा, महेन्द्र कटारिया, सुजीत उपाध्याय, निमीष व्यास, जोएब आरिफ, राजीव रावत, अदिती दवेसर, यास्मिन शैरानी, बबीता नागर, रजनीकांत व्यास आदि मौजुद थे।