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प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी के मुखारविंद से कल होगी वर्षावास की घोषणाएं,श्री धर्मदास जैनश्री संघ में उत्साह  का वातावरण,रतलाम में जुटेंगे देशभर के धर्म अनुयायी

रतलाम,22 मार्च(खबरबाबा.काम)। होली चातुर्मास के दौरान 24 मार्च को श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ के तत्वावधान में गोपाल गोशाला कालोनी स्थित समता भवन के समीप सौभाग्य सूर्य अणु वाटिका में वृहद कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी अपना एवं अपने आज्ञानुवर्ती साधु-साध्वीजी के सन 2019 के वर्षावास स्थलों की घोषणा करेंगे। कार्यक्रम को लेकर समाजजनों में भारी उत्साह है। इस अवसर पर देश के कई राज्यो के धर्मालुजन एकत्र होंगे।
आचार्य श्री उमेशमुनिजी के शिष्य प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनि जी म.सा.अणु वत्स श्री संयतमुनि जी,दिलीपमुनिजी,हेमंतमुनिजी,
जयंतमुनिजी,गिरीशमुनिजी, रविमुनिजी,आदित्यमुनिजी आदि ठाणा-8 रतलाम में होली चातुर्मास हेतु विराजित है। प्रवर्तकश्री महाराष्ट्र के विदर्भ स्थित हिंगनघाट नगर में वर्षावास कर रतलाम आए हैं। उनके साथ साध्वी श्रीमुक्तिप्रभाजी, प्रेमलताजी, पुण्यशीलाजी, कुसुमलताजी, अनुपमशीलाजी, अंगूरबालाजी, सुव्रताजी आदि ठाणा-16 भी रतलाम में होली चातुर्मास कर रही है। श्री धर्मदास जैन श्री संघ के अध्यक्ष अरविंद मेहता, महामंत्री सुशील गादिया चिव दिलीप चाणोदिया, कोषाध्यक्ष माणकलाल कटकानी,प्रचार सचिव ललित कोठारी, अणु मित्र मंडल के अध्यक्ष विनय लोढ़ा एवं सचिव मिलन गांधी ने बताया कि 24 मार्च को प्रवर्तक श्री के मुखारविंद से वर्षावास की घोषणा सुनने के लिए धर्मालुओं का आना शुरू हो गया है। गोपाल गोशाला कालोनी स्थित समता भवन के पास सुबह 9 बजे धर्मसभा में पहले विभिन्न संघ अपनी विनंती करेंगे। उसके बाद प्रवर्तकश्री सबके आगामी चातुर्मास की घोषणा करेंगे। इस अवसर पर समाजजनों का स्वामी वात्सल्य भी होगा। कार्यक्रम में श्री धर्मदास जैन गण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष शांतिलाल भंडारी सहित अन्य पदाधिकारी शामिल होंगे। श्री धर्मदास जैन श्री संघ,अणु मित्र मंडल, अणुश्री श्राविका मंडल, अणु बालक मंडल ने धर्मालुओं से अधिक से अधिक उपस्थित रहने का आव्हान किया है।
आठ दिवसीय आराधना का समापन होगा
होली चातुर्मास के प्रसंग पर प्रवर्तकश्री की निश्रा में हो रही  आठ दिवसीय आराधना का रविवार को समापन होगा। आराधना के तहत श्रावक- श्राविकाओं ने अलग-अलग दिवस संवर, पोरसी  तीन-तीन सामायिक, पौषध, बड़े स्नान का त्याग, द्रव्य की मर्यादा का पालन किया । 23 मार्च को व्याख्यान में 36 वंदना होगी। इसके बाद अंतिम दिन 24 मार्च को 1 घंटे का मौन के साथ आठ दिवसीय आराधना पूर्ण होगी।