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प्रसव के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर एक बार फिर रतलाम ऑबस्ट्रेटिक एवं गायनेकोलोगिकल सोसाइटी को मिला सम्मान,रतलाम अध्यक्ष डॉ. डॉली मेहरा एवं सचिव डॉ. शैफाली शाह ने भोपाल में ग्रहण किया पुरस्कार

रतलाम, 21अगस्त । भोपाल में आयोजित स्त्री रोग विशेषज्ञों के सीएमई (कन्टीन्यूअस मेडिकल एजुकेशन) वर्कशाप में रतलाम ऑबस्ट्रेटिक एवं गायनेकोलोगिकल सोसाइटी को सेवा कार्यो के लिए एक बार फिर पुरुस्कृत किया गया| इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने रतलाम ऑबस्ट्रेटिक एवं गायनेकोलोगिकल सोसाइटी की रतलाम अध्यक्ष डॉ.डॉली मेहरा एवं सचिव डॉ. शैफाली शाह को पुरस्कृत किया गया|

बता दे की रतलाम ऑबस्ट्रेटिक एवं गायनेकोलोगिकल सोसाइटी को विगत जुलाई 2018 में भी पूर्व स्वास्थ्यमंत्री रुस्तम सिंह द्वारा सम्मानित किया जा चूका है| ये विगत कई वर्षो से रतलाम ग्रामीण में प्रतिमाह 9 तारीख को लगाये गए इस शिविर में डॉ. लीला जोशी, डॉ. पूर्णिमा सूबेदार, डॉ. आशा सराफ, डॉ. मनीषा माहेश्वरी, डॉ. नेहा सराफ, डॉ. अंजुम सैय्यद, डॉ. शैफाली शाह, डॉ. अदिति राठौर, डॉ. व्ही. पुरोहित आदि चिकित्सको ने अपनी अपनी सहभागिता दी है|

स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने आज यहाँ स्त्री रोग विशेषज्ञों के सीएमई (कन्टीन्यूअस मेडिकल एजुकेशन) वर्कशाप में कहा कि संस्थागत प्रसव की संख्या में दिनों-दिन बढ़ोत्तरी जन-जागरूकता की पहचान है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में विशेष अभियान चलाकर जन-मानस को संस्थागत प्रसव के फायदों और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी के उपायों से परिचित कराया है। डॉ. चौधरी ने वर्कशाप में उत्कृष्ट सेवाओं के लिये शासकीय एवं निजी स्त्री रोग विशेषज्ञों, स्टाफ एवं वॉलिंटियर्स को पुरस्कृत किया।

मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में आम आदमी की अपेक्षाएँ और चुनौतियाँ ज्यादा हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण अंचल तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। डॉ. चौधरी ने पुरस्कृत डॉक्टर्स, वॉलिंटियर्स और स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि पुरस्कार की यह परम्परा चिकित्सा के क्षेत्र में अन्य लोगों के लिये प्रेरणा होगी।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की प्रबंध संचालक छवि भारद्वाज ने मिशन की गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने डॉक्टर्स से कहा कि सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिये सभी आवश्यक सुविधाओं का उपयोग करें और प्रक्रियाओं को अपनायें, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में अपेक्षित कमी लाई जा सके। भारद्वाज ने बताया कि मिशन के कार्यक्रमों में अन्य प्रदेशों एवं प्राईवेट सेक्टर का सहयोग भी लिया जा रहा है।