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बाल संरक्षण गृह के बच्चों को दिया जा रहा है मोबाइल मरम्मत प्रशिक्षण, बच्चों को योगा सिखाएं, डांस थेरेपी भी मिले – कलेक्टर ने दिए बैठक में निर्देश

रतलाम 02 दिसम्बर 2019/ जिला मुख्यालय स्थित बाल संरक्षण गृह के बच्चों को आजीविका के लिए मोबाइल मरम्मत प्रशिक्षण दिलवाया जा रहा है। इन बच्चों को जुंबा डांस थेरेपी एवं योग का लाभ दिलाने के निर्देश भी कलेक्टर ने विगत दिवस संपन्न जिला बाल संरक्षण समिति की बैठक में दिए। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी, जिला महिला बाल विकास अधिकारी श्रीमती सुनीता यादव, सहायक संचालक सुश्री अंकिता पंड्या, जिला बाल कल्याण समिति के सदस्यगण श्री के.एन. जोशी, श्री वीरेंद्र कुलकर्णी, श्री जीवराज पुरोहित, सुश्री सुमित्रा आवतानी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर ननावरे आदि उपस्थित थे।

बैठक में बताया गया कि वन स्टॉप सेंटर तथा बाल कल्याण समिति के मध्य तालमेल की कमी है, इस पर पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिए कि वही निर्णय लिया जाए जो बच्चों के हित में सर्वोत्तम हो। एकीकृत बाल संरक्षण योजना के तहत जिले में 13 पद स्वीकृत हैं परंतु अभी तक मात्र 2 पद ही भरे हुए हैं। कलेक्टर ने विभाग को निर्देश दिए कि पदों की पूर्ति के लिए राज्य शासन को पत्र लिखा जाए।

कलेक्टर ने समीक्षा के दौरान उन बालिकाओं का नियमित फॉलोअप लेने के निर्देश दिए जिनको रतलाम में बालिका संरक्षण गृह नहीं होने की वजह से अन्य स्थानों के बालिका संरक्षण गृहों में भेजा जाता है। कलेक्टर ने कहा कि वहां भेजे जाने के पश्चात देखा जाए कि वे किस हाल में है, उनकी स्थिति कैसी है। साथ ही रतलाम में बालिका संरक्षण गृह स्थापना के लिए शासन को पुनः अर्द्ध शासकीय पत्र भेजने के निर्देश कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास को दिए। कलेक्टर द्वारा पुलिस महिला बाल विकास एवं श्रम विभाग के संयुक्त दल गठित कर अपने बच्चों से जबरन भीख मंगवाने वाले पालकों के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही जो बच्चे ट्रेन से अथवा कहीं से भाग कर आते हैं और उन्हें संरक्षण गृह में रखा जाता है, उनकी सोशल जांच रिपोर्ट भी प्राप्त करने के निर्देश जिला बाल संरक्षण अधिकारी को पुलिस अधीक्षक श्री तिवारी ने दिए।

बैठक में कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास सुनीता यादव ने बताया कि पॉक्सो एक्ट तथा किशोर न्याय अधिनियम के तहत जिला एवं विकासखंड स्तरों पर कार्यशाला सह प्रशिक्षण आयोजित किए जा चुके हैं। इसी के साथ ही जिला एवं विकासखंड स्तर पर बाल संरक्षण समितियों के गठन की जानकारी भी दी गई। कलेक्टर द्वारा शीघ्र ही ग्राम पंचायत स्तर की समितियां भी गठित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर द्वारा पॉक्सो एक्ट और बाल संरक्षण अधिनियम की जानकारी जिले के सभी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने के निर्देश महिला बाल विकास विभाग को दिए। अभी लगभग 100 स्कूलों में इस प्रकार की जानकारी दी गई है। जिले में लगभग 1400 स्कूल हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि बाल संरक्षण गृह में रहने वाले बच्चों को यदि उनके माता-पिता नहीं ले जाते हैं तो बच्चों को एक निश्चित समय में लीगल फ्री किया जाए ताकि अन्य पालकगण उन्हें गोद लेने की कार्रवाई कर सकें। साथ ही बच्चों के यौन शोषण के विरुद्ध स्कूल बसों में पोस्टर चस्पा करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा चाइल्ड लाइन द्वारा विभिन्न स्थानों से प्राप्त किए गए बच्चों की आयु का सत्यापन एवं अल्कोहल टेस्ट में देरी नहीं करने के निर्देश भी स्वास्थ्य विभाग को कलेक्टर द्वारा दिए गए।