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भाजयुमो जिलाध्यक्ष की घोषणा ने अचंभित किया,ख़बरबाबा ने पहले ही व्यक्त कर दी थी संभावना

रतलाम(ख़बरबाबा.कॉम)। शनिवार शाम को आखिरकार भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष को लेकर पर्दा उठ ही गया । जैसा की ख़बरबाबा. कॉम ने इस सप्ताह के प्रारंभ में ही चोंकाने वाला नाम सामने आने की संभावना व्यक्त की थी ठीक वैसा ही हुआ और जो नाम दौड़ में चल रहे थे उन सबसे अलग नाम की घोषणा हो गई ।
भाजयुमो के जिलाध्यक्ष के रूप में सोनू यादव के नाम की घोषणा होने के बाद वे सब दावेदारों को सांप सूंघ गया है जिन्होंने इस पद को पाने के लिए एडी चोंटी का जोर लगा दिया था । अब सभी दावेदार और समर्थक आंकलन करने में जुटे है कि सोनू यादव कौन से गुट से है और किसने इनका नाम आगे बढ़ाया है। पार्टी सूत्रों की माने तो उज्जैन के विधायक मोहन यादव की रिश्तेदारी के चलते सोनू यादव को यह तोहफा मिला है । पिछले लंबे समय से भाजयुमो के जिलाध्यक्ष को लेकर काफी खीचतान चल रही थी और कई ऐसे नाम चर्चाओं में थे जो इस पद को पाने के लिए धनबल के साथ साथ अपने आकाओं का पूरा जोर लगवा रहे थे । सोमवार को ही हमारे भोपाल ब्यूरो से मिली खबर के अनुसार हमने चोंकाने वाला नाम जिलाध्यक्ष के रूप में सामने आने की संभावना व्यक्त की थी और एक लेख भी प्रकाशित किया था जिसमे यह स्पष्ट किया था कि भाजयुमो का अगला जिलाध्यक्ष जैन समाज से नही होकर ब्राम्हण या अन्य समाज से हो सकता है । गुरुवार और शुक्रवार को भोपाल में काफी हलचल रही और शुक्रवार को सोनू यादव का नाम लगभग फाइनल हो गया था। शनिवार शाम को इसकी घोषणा भी हो गई।
सोनू यादव के नाम की घोषणा होने के बाद वे सबसे पहले पूर्व महापौर शेलेन्द्र डागा ला आशीर्वाद लेने उनके निवास पर पहुंचे। जिससे यह साफ संकेत मिलते है कि जिससे ये कयास लगाए जा रहे है कि पार्टी ने रतलाम में एक नया प्रयोग किया है। रतलाम शहर की राजनीति की दो धुरियों हिम्मत कोठारी एवं चेतन्य कश्यप के बीच राजनीतिक खाई नही बढ़े इस उद्देश्य से इस नाम की घोषणा की गई है ।हालांकि सोनू यादव के रिश्तेदार अशोक यादव नगर निगम में पार्षद है और पूर्व महापौर शेलेन्द्र डागा को भी नगर विधायक के गुट से जोड़कर देखा जाता है।लेकिन पिछले कुछ समय से शहर के राजनीतिक समीकरण बदलते नज़र आ रहे है।और इन बदलते राजनीतिक समीकरणों की बिसात तथा संभवतया उज्जैन के विधायक मोहन यादव जो रतलाम विधानसभा क्षेत्र के कई चुनावो में प्रभारी भी रह चुके है के कारण पार्टी ने यह प्रयोग किया है जिससे युवा मोर्चा सहित वरिष्ठ कार्यकर्ता भी अंचभित है।और पार्टी को इस प्रयोग का कितना फायदा मिलता है यह तो समय ही बतायेगा ।