Home मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधियों पर भारी पड़े नौकरशाह

मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधियों पर भारी पड़े नौकरशाह

रतलाम(खबरबाबा.कॉम)।प्रदेश में वैसे तो आए दिन नौकरशाही हावी होने के मामले सामने आते रहते है, लेकिन इस बार तो आजादी का पर्व उनका शिकार हो गया। प्रोटोकाल याने सरकारी कार्य व्यवहार-समुचित प्रक्रिया का मखौल उड़ाते हुए सरकारी तंत्र ने जिला स्तर के स्वाधीनता दिवस के मुख्य कार्यक्रमों में कलेक्टरों से तिरंगा फहरवाया, जबकि अधिकांश जिलों में प्रोटोकाल के मुताबिक कई जनप्रतिनिधि उपलब्ध थे। राजनीतिक दृष्टि से भी सरकार को कोई परेशानी नहीं थी, क्योंकि पिछले डेढ़-दो साल से वह जनप्रतिनिधियों को सम्मान दे रही थी। चुनावी साल से ठीक पहले नौकरशाहों की इस करतूत के कई मायने निकाले जा रहे है। 
आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस बार स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश के 21 जिलों में कलेक्टरों ने तिरंगा फहराया। इन जिलों में धार, खरगोन, झाबुआ,रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, गुना,  अशोक नगर, श्योपुर, सिंगरौली, अनूपपुर, टीकमगढ़, हरदा, बैतूल, नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडोरी,मंडला, अलीराजपुर, शहडोल जिला शामिल है। विडंबना है कि इनमें से अधिकांश जिलों में पिछलें गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर जिला पंचायत अध्यक्षों अथवा प्रभारी मंत्रियों ने झंडावंदन किया था। इस बार भी शासन ने प्रभारी मंत्रियों के कार्यक्रमों में भी फेरबदल किया गया। पहले उन्हें प्रभार वाले जिलों में भेजा जाना तय हुआ, फिर गृह जिलों में तिरंगा फहराने का तोहफा दे दिया गया। आश्चर्य इस बात का है कि जिन जिलों में कलेक्टरों ने झंडावंदन किया,उनमें से अधिकांश में प्रोटोकाल के वरियता क्रम अनुसार कलेक्टर से कई उंची वरियता रखने वाले जनप्रतिनिधि मौजूद थे। शासन के पास विधायकों और सांसदों को मौका नहीं देने का विकल्प था, तो वह मंत्री का दर्जा प्राप्त जनप्रतिनिधियों को मौका देकर इस स्थिति को संभाल सकता था, लेकिन जनप्रतिनिधियों को सम्मान देने के बजाय भोपाल में बैठे नौकरशाहों ने प्रोटोकाल को ताक में रखकर जिलों में पदस्थ अफसरों को परेड की सलामी दिलवा दी। 

*सांसद, विधायक का 24 और कलेक्टर का 34 वां नंबर*

मध्य प्रदेश राजपत्र के 23 दिसंबर 2011 के प्रकाशन में सामान्य प्रशासन विभाग ने पूर्व की सभी अधिसूचनाओं को शामिल करते हुए विशिष्ट व्यक्तियों की श्रेणी और पद के संबंध में पूर्वता क्रम दर्शाने वाली सूची प्रकाशित की है। इसके मुताबिक सूची में कलेक्टर का स्थान 34 वां है, जबकि सांसद, विधायक, महापौर तथा राज्य मंत्री के समकक्ष हैसियत रखने वाले निर्वाचित व्यक्ति को 24 वां स्थान दिया गया है। भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा 19 नवंबर 2014 को प्रशासन तथा सांसद-विधायकों के बीच सरकारी कार्य-व्यवहार-समुचित प्रक्रिया के पालन के संबंध में पत्र जारी किया गया है। इसमें देश के लोकतांत्रिक ढांचे में सांसदों और विधायकों का महत्वपूर्ण स्थान बताते हुए उन्हें सम्मान देने के संबंध में दिशा-निर्देश दिए गए है। इस पत्र में सभी प्रदेशों के मुख्य सचिवों का दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पाबंद किया गया है। इस लिहाज से कलेक्टर जिसे स्वयं जनप्रतिनिधियों का सम्मान सुनिश्चित करना है, यदि समारोह में वही मुख्य अतिथि बन गया, तो जनप्रतिनिधियों को कोन पूछेगा?

*प्रदेश को चिड़ाती रतलाम की बानगी*

स्वाधीनता दिवस पर रतलाम का मुख्य समारोह पूरे प्रदेश की हकीकत बयां करने के लिए काफी है। इस समारोह में शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। समारोह में महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष और राज्य कृषक आयोग अध्यक्ष उपस्थित रहे। इससे पूर्व रतलाम में पिछले दो अवसरों पर जिला पंचायत अध्यक्ष और एक बार खुद मुख्यमंत्री ने झंडावंदन किया है। प्रोटोकाल के अनुसार रतलाम में कलेक्टर से वरीयता क्रम से उंचा स्थान रखने वाले कई लोग है। महापौर, जिला पंचायत अध्यध, राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष और राज्य कृषक आयोग अध्यक्ष के अलावा राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष का पद भी रतलाम को मिला है, जो वरीयता क्रम में मुख्यमंत्री के साथ 8 वें नंबर पर ही है। नौकरशाहों ने इस सभी का नजरअंदाज कर दिया। आगामी साल में विधानसभा के चुनाव होना है, ऐसी स्थिति में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कई अर्थ निकाले जा रहे है। इस एक मुद्दे से यह भी जाहिर हो गया कि सरकार नौकरशाहों की लगाम कसने के कितने ही दावे करे, लेकिन असल वह स्वाधीनता दिवस को लेकर भी नौकरशाहों के ही पराधीन थी।