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महाअष्टमी पर हुई बंगाली समाज के दुर्गा उत्सव की संधि पूजा। मंगलवार को होगा विसर्जन

रतलाम,6अक्टूबर। रविवार को बंगाली समाज की दुर्गा पूजा का विशेष दिन रहा। नवरात्रि के महाअष्टमी पर विशेष संधिपूजा सम्पन्न हुई। “दुर्गा माई की जय” के जयकारे एवं ढाक ताशे के साथ दुर्गापूजा का उल्लास और उमंग अपने चरम पर था।

अष्टमी के समापन एवं नवमी के प्रारंभ होने के बीच के काल मे होने से इसका विशेष महत्व है। 108 कमल पुष्प एवं दीपों से देवी माँ की पूजा की गई। शुक्रवार शाम को बंगाली समाज रतलाम की 5 दिवसीय दुर्गा पूजा देवी बोधन, कल्पारम्भ एवं अधिवास के साथ प्रारंभ हुई थी। समाज की अनेक महिलाओं द्वारा अपने बच्चों के स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए व्रत रखकर शाम को षष्टी पूजा की गई। ढोल ताशों की ध्वनि में धुनुची नृत्य के साथ माँ दुर्गा के आमंत्रण की पूजा अर्चना की गईं। शनिवार को सप्तमी की पूजा के अवसर पर नवपत्रिका के विभिन्न प्रकार के पवित्रजल से स्नान पूजन के पश्चात स्थापना की गई। भगवान गणेश के पत्नी के रूप में कोलाबऊ की पूजन एवं स्थापना हुई। अष्टमी की संधि पूजा के पश्चात सोमवार को नवमी की आरती, पूजा एवं पुष्पांजलि के साथ देवी माँ की पूजा अर्चना की जाएगी। बंगाली समाज की दुर्गापूजा का समापन 8 अक्टूबर मंगलवार की सुबह 10.30 बजे दर्पण विसर्जन पूजा, सिंदूर खेला के पश्चात चल समारोह के रूप जलविसर्जन के रूप में होगा। माँ दुर्गा को उनके परिवार के साथ मायके से अपने ससुराल की विदाई की मान्यता के साथ चल समारोह में “आश्छे बोशोर आबार होबे” का उद्घोष लगेंगे। अगले वर्ष देवी माँ की आराधना के पुनः अवसर आने के साथ आशा और उल्लास के साथ पूजा सम्पन्न होगी। बंगाली समाज की दुर्गा पूजा में अज्ञान पर ज्ञान की विजय एवं नारी शक्ति के जागरण का संदेश होता हैं। स्थानीय जवाहर नगर स्थित श्रीरामकृष्ण विवेकानंद आश्रम परिसर में आयोजित हो रही दुर्गापूजा में बंगाल से मूर्तिकार के द्वारा निर्मित महिषासुर मर्दिनी माँ दुर्गा की विशाल प्रतिमा सहित देवी सरस्वती एवं लक्ष्मी तथा भगवान गणेश एवं कार्तिकेय प्रतिमाएं लोगो को आकर्षण का केंद्र है।