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महापौर और एसडीएम से मिले कोठारी, मांगे एमओएस अनुमती और जमीन रेकार्ड संबधी दस्तावेज,फोरलेन को लेकर अब पूर्व महापौर पारस सकलेचा भी कूदे मैदान में, बाजना बस स्टैण्ड पहुंचकर कार्रवाई पर उठाए सवाल।

 

रतलाम,16 मार्च(खबरबाबा.काम)। बाजना बस स्टैण्ड फोरलेन की चौड़ाई को लेकर राजनीतिक गहमागहमी शुक्रवार को भी जारी रही। एक और जहां वित्त आयोग अध्यक्ष हिम्मत कोठारी ने नगर निगम पहुंचकर इस मामले में महापौर और निगम आयुक्त और बाद में शहर एसडीएम से मुलाकात की और कार्रवाई से सबंधित दस्तावेज मांगे, वहीं दूसरी और पूर्व महापौर पारस सकलेचा भी फोरलेन को लेकर शुक्रवार को मैदान में उतर गए। वे आज  बाजना बस स्टैण्ड पहुंचे और बाधक निर्माण हटाने की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए।

बाजना बस स्टैण्ड पर हुई कार्रवाई के विरोध में एक दिन का अनशन करने के बाद शुक्रवार को पूर्व गृह मंत्री एवं वित्त आयोग अध्यक्ष हिम्मत कोठारी नगर निगम पहुंचे और यहां पर महापौर डॉ. सुनीता यार्दे से मुलाकात की। श्री कोठारी ने कहा कि महापौर, सांसद, विधायक एक सेतु है प्रशासन, शासन और जनता के बीच का। उन्होने कहा कि बाजना बस स्टैण्ड पर  कितने मकान तोड़े उनकी अनुमति आप निकाले और कितने मकानों में अनुमति में एमओएस नहीं है, यह देखें। उन्होने कहा कि शहर में  कहीं 80, कहीं 60 फीट और कहीं 104 फीट की सड़क बन रही है, कोई तो पैमाना होना चाहिए। तोडफ़ोड़ के लिए संसाधन नगर निगम के थे इसलिए मुझे आपको आकर कहना पड़ा, वरना मैं आपको कुछ नहीं कहता। मैं चाहता हूं कि मुझे वहां हुई कार्रवाई के संबंध में आप दस्तावेज उपलब्ध कराए। श्री कोठारी निगम आयुक्त एसके सिंह से भी मिले और कहा कि जितने मकानों को नोटिस दिए है, उन लोगों की मकान अनुमति मैं देखना चाहता हूं। इसके बाद श्री कोठारी शहर एसडीएम अनिल भाना से भी मिले और बाजना बस स्टैण्ड पर जहां कार्रवाई की गई है, वहां की शासकीय जमीन के सबंध में दस्तावेज मांगे।

 पारस सकलेचा भी कूदे मैदान में

शुक्रवार को कांग्रेस नेता पारस सकलेचा भी बाजना बस स्टैण्ड पहुंचे। सकलेचा ने यहां आकर स्थिति देखी और आमजन के साथ ज्यादती का आरोप लगाते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए। वित्त आयोग अध्यक्ष कोठारी के धरने पर उनका कहना था कि ये दुर्भाग्य पूर्ण है कि सत्ताधारी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता को धरने पर बैठना पड़ रहा है।  सकलेचा ने कहा कि हम पहले भी प्रशासन से  पूछ चूके है, कि इस रोड को 104 फीट का बनाया जाए ये किस स्तर पर तय हुआ है। शहर के विकास के लिए जो निर्णय लिए जाते है, उसके लिए दो प्रकार की एजेंसी है। यदि सड़क नगर निगम की है, तो परिषद् के अंदर इसका फैसला होना चाहिए, कि इस रोड को कितना चौड़ा बनाया जाए और अगर सड़क पीडब्ल्यूडी की है, तो जिला योजना समिति में प्रस्ताव में रखकर तय करना होता है, यहां पर दोनों प्रकार के प्रस्ताव का कोई अता -पता नहीं है।