Home रतलाम रतलाम: आचार्य श्री महाश्रमणजी का तीन दिवसीय प्रवास गुरुवार को पूर्ण,आचार्य प्रवर...

रतलाम: आचार्य श्री महाश्रमणजी का तीन दिवसीय प्रवास गुरुवार को पूर्ण,आचार्य प्रवर से वर्ष 2024 के चातुर्मास की पुरजोर विनती

रतलाम,24 जून 2021| अंहिसा यात्रा के साथ रतलाम पधारे तेरापंथ धर्मसंघ के नायक आचार्य श्री महाश्रमण का तीन दिवसीय प्रवास गुरुवार को पूर्ण हो गया| अंतिम दिन रतलाम तेरापंथ धर्मसंघ रतलाम ने आगामी वर्ष 2024 के लिए आचार्य प्रवर से बार-बार चातुर्मास की पुरजोर विनती की। इससे पहले भी शहर वासियो की और से तीनो दिन चातुर्मास की विनती की गई| इसमें जनप्रतिनिधियों ने भी पुरजोर तरीके से शामिल होकर संघ के भावो को बल दिया|

गुरुवार को बोहरा समाज की और आमिल साहब शेख जोहर भाई शाकिर एवं समाज के सेकेट्री इब्राहिम हांडा एवं प्रवक्ता सलीम आरिफ ने भी अतिथि गार्डन आकर चातुर्मास की विनती की| ज्ञातव्य है कि आचार्य प्रवर का वर्ष 2021 का चातुर्मास भीलवाड़ा में वर्ष 2022 का राजस्थान के ग्राम छापर में तथा वर्ष 2023 का मुम्बई के लिए घोषित है। रतलाम के सर्व समाज की चातुर्मासिक मांग और प्रस्तुति को गुरुवर ने अपने प्रवचन में सराहा। इस सराहना से रतलाम संघ का उत्साह और भी दोगुना हो गया है।

आगमन से उल्लासित श्रावक भारी मन से देंगे विदाई

विगत 22 जून को अंहिसा यात्रा के साथ रतलाम पधारे तेरापंथ धर्मसंघ के नायक आचार्यश्री महाश्रमण के नेतृत्व में जारी अहिंसा यात्रा 25 जून को सुबह 6:30 बजे नामली की और प्रस्थान करेगी। यात्रा के तीन दिवसीय प्रवास के अंतिम दिन रतलाम में श्रध्दालुओं का गुरुदर्शन और वंदन के लिए उत्साह के साथ आना – जाना चलता रहा। तेरापंथ धर्मसभा रतलाम के श्रावक – श्राविकाओं के जोश और उत्साह में तीसरे दिन भी किंचित अंतर नही आया। श्रावक – श्राविकाओं ने अपने गुरु के व्याख्यान के प्रसारण को डिजिटल माध्यम से सुना। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए सामायिक आराधना की और गुरु चरणों मे अपने भावों की अभिव्यक्ति भी दी। सवेरे आध्यात्मिक कार्यक्रमों की व्यस्तता के बाद हर एक श्रावक भारी मन से एक – दूसरे को इस बात के लिए आश्वस्त कर रहा था कि 25 जून की सुबह की विदाई के बाद अब 2024 में फिर से मिलन होना है। इसके लिए सभी एक दूसरे को संकल्प दिला रहे थे। समाजजनों ने 17 वर्षों के लंबे अन्तराल के बाद आचार्य – प्रवर को अपने मध्य पाया। लेकिन मात्र तीन दिनों के बाद विदाई की बात से सभी के मन में एक उदासी भी नजर आती रही।

श्री महाश्रमणजी का आगामी कार्यक्रम

आचार्यश्री 25 को नामली, 26 को हसनपालिया, 27 को जावरा, 28 को रिछांचांदा, 29 को कचनारा, 30 को दलोदा तथा 1 जुलाई को मंदसौर, 2 जुलाई सकोड़ा, 3 को मल्हारगढ़, 4 को भाटखेडा 5 को नीमच, 7 को जावद, 8 को नयागांव, 9 को निम्बाहेड़ा, 10 को मांगरोल, 11 को अरनियापंथ तथा 12 जुलाई को चित्तौडग़ढ़ पहुंचेंगे, जहां से भीलवाड़ा राजस्थान की ओर प्रस्थित होंगे।

आत्मा पर विजय प्राप्त कर लेना परम विजय है- आचार्य महाश्रमण

शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी ने रतलाम प्रवास में तृतीय दिन अतिथि गार्डन पर मंगल प्रवचन में कहा कि दुनिया में जय-पराजय की बात चलती है। चाहे युद्ध की बात हो या चुनाव की, कौन जीता कौन हारा इसका बहुत महत्व होता है। कई संदर्भों में हार जीत की बात आती है। परंतु जीत में भी परम जय किसकी होती है यह प्रश्न है? हो सकता है कि कोई योद्धा युद्ध में 10 लाख योद्धाओं को जीत ले, विजय पा लें परंतु वह परम विजय नहीं है। केवल एक अपनी आत्मा को जीत लेना, उस पर विजय प्राप्त कर लेना परम विजय है। आचार्य श्री ने आगे कहा कि अपने आप को जीतने का मतलब अपनी पांच इंद्रियां, क्रोध मान माया लोभ रूपी कषाय और मन को जीतना। इनको जीत लिया उसे परम विजयी कह सकते हैं।व्यक्ति आध्यात्म की साधना करें, आत्म युद्ध करें। जैसे सूर्य बादलों से ढका होता है, वैसे हमारी आत्मा है जो कर्मों से ढकी हुई है। जब मोह कर्म का क्षय होगा तब आत्मा भी मुक्त बन सकेगी। जीवन में सदाचार और अणुव्रत जैसे छोटे-छोटे नियम भी मोहनिय को कमजोर करने का कार्य करते हैं। व्यक्ति जीवन में आध्यात्म की दिशा में आगे बढ़े, धर्म आराधना करें। आचार्यप्रवर का रतलाम प्रवास अनेक दृष्टियों से जैन शासन प्रभावक रहा। तीन दिवसीय प्रवास का सभी श्रद्धालुओं नें भी धर्माराधना कर पूरा लाभ उठाया। अभिवंदना के क्रम में मुनि सिद्धप्रज्ञ जी ने अपने विचार रखे। तेरापंथ सभा के मंत्री विजय वोरा, तेयुप मंत्री पुनीत भंडारी, तेमम मंत्री सुनीता कोठारी, मालवा सभा मंत्री कमलेश बम, श्रीमती चंदनबाला दख, श्रीमति प्रेमा मांडोत, प्रिया कोठारी, सुहानी दख , तेरापंथी युवतियां आदि ने प्रस्तुतियां दी।अमृतवाणी के पूर्व अध्यक्ष सुखराज सेठिया ने भी अपने विचार रखें।