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रतलाम के इतिहास में पहली बार होगी पेड़ों की शिफ्टींग, बाजना बस स्टैण्ड फोरलेन के लिए कटने की कगार पर खड़े 450 पेड़ों को बचाने के लिए प्रशासनिक प्रयास शुरु, इंदौर के प्रसिध्द पर्यावरणविद ने रतलाम आकर किया निरीक्षण, सागोद रोड के पेड़ों को किया जा सकता है मेडिकल कालेज में शिफ्ट।

 रतलाम,2 अप्रैल(खबरबाबा.काम)।  पर्यावरण प्रेमियों और शहर के लिए यह एक अच्छी और सकून देने वाली खबर है कि बाजना बस स्टैण्ड (सागोद रोड) पर फोरलेन निर्माण के लिए काटने की कगार पर खड़े करीब 450 से अधिक पेड़ों को जिंदा रखने के प्रयास शुरु हो गए है। यदि सबकुछ ठीक रहा तो इन पेड़ो को सुरक्षित रुप से दुसरी जगह लगाया जाएगा। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों के प्रयास से शहर में पहली बार पर्यावरणविद् वैज्ञानिक मिलकर पेड़ों की शिफ्टिंग का कार्य करेंगे। शिफ्टिंग प्रक्रिया में विशालकाय पेड़ों को जड़ सहित एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर जिंदा लगाया जाएगा। फिलहाल शहर के पर्यावरण प्रेमी और प्रशासन के सहयोग से प्रायोगिक तौर पर करीब एक दर्जन पेड़ शिफ्ट होंगे। इसके बाद सामाजिक संस्थाओं, प्रशासन और निजी सहयोग से  लगभग सभी पेड़ों की शिफ्टिंग की जाएगी।

ज्ञातव्य है कि बाजना बस स्टैण्ड से वरोठ माता मंदिर तक बन रहे ेफोरलेन निर्माण के लिए करीब 453 पेड़ को हटाने की आवश्यकता महसूस हो रही है। इतने पेड़ों को कटने से बचाने के लिए एडीएम डां. कैलाश बुंदैला और पर्यावरणप्रेमी बिलपांक निवासी अशोक पाटीदार ने प्रयास शुरु किए और इनकी पहल पर इंदौर के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. प्रेम कुमार जोशी  सोमवार को रतलाम पहुंचे। अभी तक करीब दो हजार से अधिक बड़े पेड़ो की सफलता पूर्वक शिफ्टींग कर चुके  डॉ. जोशी ने रतलाम आकर नगर निगम के इंजीनियरों के साथ बाजना बस स्टैण्ड फोरलेन के निर्माण स्थल पर पेड़ों को स्थानांतरित करने के लिए निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होने एडीएम डां. बुंदैला से से मुलाकात की। डॉ. जोशी ने बताया कि वे सालों से पर्यावरण बचाने के लिए काम कर रहे हैं। उनके अनुसार यदि स्थितियां अनुकुल रही तो वे रतलाम में 5 पेड़ स्वयं पर्यावरणप्रेमी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनिल माधवदवे की स्मृति में स्थानांतरित करेंगे जिसका पूरा खर्च भी वे और उनके साथी वहन करेंगे। इसके अतिरिक्त पेड़ों को स्थानांतरित करने के लिए जिला प्रशासन से ऐसे पेड़ों की सूची ली जा रही है जो सड़क चौड़ीकरण के लिए काटे जाने हैं। इनके लिए प्रशासनिक सहयोग या स्वंयसेवी संस्थाओ, वॉलेटिंयर युवाओं का सहयोग मिलने पर स्थानांतरित किया जाएगा। इस कार्य में बड़ी मशीनों का भी उपयोग होगा। पर्यावरण प्रेमी  अशोक पाटीदार ने बताया कि शिप्टींग कार्य  के लिए जनसहयोग लेने का प्रयास किया जा रहा है। जो भी व्यक्ति अपने घर, खेत, बगीचे में पेड़ ले जाना चाहता है वह भी ले जा सकेगा। इसके अतिरिक्त जो युवा या व्यक्ति पेड़ शिफ्ट करने की प्रक्रिया सीखना चाहेंगे उन्हें नि:शुल्क रूप से प्रक्रिया सिखाई जाएगी।

मेडिकल कालेज में शिफ्टींग का प्रयास

इस मामले में सराहनीय पहल करने वाले एडीएम डॉ. कैलाश बुंदेला ने बताया कि  पेड़ों की शिफ्टिंग के लिए जरूरी फंड, संसाधन आदि व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है। करीब एक दर्जन पेड़ निजी खर्च पर फिलहाल स्थानांतरित किए जाएंगे। कोशिश की जा रही है कि मेडिकल कॉलेज परिसर में पेड़ों को स्थांनांतरित करवा दिया जाए, जिससे परिसर में भी हरियाली बढ़ेगी और सैकड़ों पेड़ों को भी बचाया जा सकेगा।

खबरबाबा.काम से चर्चा करते पर्यावरणविद श्री जोशी