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रतलाम में 111 मासक्षमण की दीर्घ तपस्याएं पूर्ण,14 व 17 वर्षीय बालिकाओं ने भी किए मासक्षमण,सुनंदादेवी ने लिया सर्वाधिक 71 उपवास का प्रत्याख्यान

रतलाम,1 अक्टूबर(खबरबाबा.काम)। दीक्षा दानेश्वरी, आचार्य प्रवर 1008 श्री रामलालजी म.सा.की प्रेरणा से रतलाम में त्याग और तप का ठाठ निरंतर बढ़ रहा है। सोमवार को छत्तीसगढ़ की सुनंदा पारख ने सर्वाधिक 71 उपवास की तपस्या के प्रत्याख्यान लिए। इससे पूर्व तनिष्का-रमणलाल घोटा ने मात्र 14 वर्ष तथा नैनी-संजय लुनिया ने 17 वर्ष की उम्र में मासक्षमण पूर्ण किया। इसके साथ ही  रतलाम के संयम साधना महोत्सव में 111 मासक्षमण पूर्ण हो गए।

चातुर्मास संयोजक महेंद्र गादिया ने बताया कि आचार्यश्री की निश्रा में कई तपस्याएं हो रही है। महासतीश्री प्रीतीसुधाजी म.सा. ने 27 तथा श्री प्रतिज्ञाश्रीजी म.सा.ने 8 उपवास का तप पूर्ण किया। इसी प्रकार आजादबेन मेहता ने सिद्धी तप किया। नई दिल्ली के किशनलाल जैन एवं कानोर के नक्षत्रमल-पुष्पादेवी नागोरी ने आजीवन शीलव्रत का संकल्प लिया। कई तपस्वियों ने अलग-अलग तप आराधना के प्रत्याख्यान लिए।

धर्म की जड़ है विनय-आचार्यश्री

आचार्यश्री ने अमृत देशना में कहा कि सिद्धी का दरवाजा संयम तथा विनय मोक्ष की नींव है। धर्म के मर्म को समझने की कोई चाबी है, तो वह विनय ही है। इससे सारे ताले खुल जाते है। विनय धर्म की जड़ है। धर्म उस पेड़ का नाम है, जिस पर मोक्ष रूपी फल लगा करते है। मानव जन्म काफी पुण्योदय से मिलता है। इसमें हर व्यक्ति को विचार करना चाहिए कि अच्छा कुल मिला, तीर्थकंर देवो की वाणी मिली है, तो विनय की क्षमता पैदा करने में सक्षम बने ।  इससे ही जीवन धन्य होगा।

श्री आदित्ममुनिजी म.सा.ने कहा कि ऐसा कोई दर्शन नहीं है, जिसमें मोक्ष की कामना नहीं की गई हो। मानव जीवन में सम्यक दृष्टि वाला बनने का प्रयास करे। पहले अच्छा श्रावक फिर स्वाध्यायी बने। स्वाध्यायी से साधु बने और फिर अरिहंत भी बन सकते है। हमारे अंदर अनंत शक्ति है, केवल पुरूषार्थ करने की जरूरत है। इस मौके पर साध्वी मंडल ने तप अनुमोदना गीत प्रस्तुत किया। संचालन सुशील गौरेचा एवं महेश नाहटा ने किया।