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रतलाम: सड़क दुर्घटना पर नियंत्रण के लिए रतलाम पुलिस का रोड सेफ्टी पर ध्यान, एसपी ने बैठक ली और हाइवे पर किया संभावित दुर्घटना स्थलों का निरीक्षण, प्रतिदिन होगी सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा, 1 नवंबर से चलेगा अभियान

रतलाम,27 अक्टूबर(खबरबाबा.काम)/ रतलाम पुलिस अब सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए रोड सेफ्टी को लेकर गंभीरता से प्रयास शुरू कर रही है। रोड सेफ्टी ऑडिट को लेकर आज एसपी गौरव तिवारी ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें आवश्यक निर्देश भी दिए। बैठक में 1 नवंबर से जिले में यातायात नियमों का पालन कराने के लिए सख्त कार्रवाई करने का निर्णय भी लिया गया ।बैठक के बाद एसपी गौरव तिवारी ने हाईवे पर संभावित दुर्घटना स्थल का निरीक्षण भी किया।

रोड सेफ्टी ऑडिट से आशय सडक दुर्घटना के कारणों का पता करना और कारणों का पता कर दुर्घटना का कारण बनने वालें तत्वों का समाधान करना है।इसी आशय से आज जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय मे मीटिंग का आयोजन किया गया, जिसमे पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी, एसडीओपी मान सिंह चौंहान, रक्षित निरीक्षक खिलावन सिंह कवर, थाना प्रभारी यातायात रामुंडा कटारा व यातायात के पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

मीटिंग मे निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा कर निर्णय लिए गए :-

1. प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाओ की समीक्षा की जावेगी, व दुर्घटना के कारण का सही पता लगाया
जाकर, दुर्घटना के कारक को दुरुस्त किया जावेगा, ताकि भव्ष्य में दुर्घटना न हो सके ।

2.सड़क दुर्घटना के प्रकरण मे थाना प्रभारी का घटना स्थल का निरीक्षण करना अनिवार्य होगा।

दुर्घटना पर नियंत्रण लाने हेतु 4 E के सिधान्त पर कार्य किया जावेंगा :-

1. Engeneering
– दुर्घटना का कारण बनने वाले ब्लाइंड स्पॉट, घुमावदार मोड, अनावश्यक साइन बोर्ड,सड़क के आसपास उगी हुई बड़ी झड़िया जों व्यू कटर का काम करती है, आदि को चिन्हित कर संबन्धित विभाग की सहायता से ब्लाइंड
स्पॉट व अन्य को सही करने का प्रयास किया जावेगा।

2.Education
– सड़क दुर्घटनाओ का अंकलन कर पाया गया हैं की 80-85 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र में निवास
करने वाले व्यक्ति सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे है. जिसका मुख्य कारण जानकारी व रोड पर वाहन चलाने संबंधी नियमों की जानकारी का अभाव, ओवर स्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाना, वाहन को असुरक्षित खड़ा करना, हेलमेट का प्रयोग न करना, यातायात संकेतों का ज्ञान न होना पाया गया है। इस हेतु जागरूकता फैलाने हेतु जिले मे अभियान
चलाया जावेगा व जनता को यातायात व रोड बिहेवियर संबंधी जानकारी दी जावेगी |

3.Enforcement

-.इसके अतिरिक्त पाया गया है कि चालक द्वारा शराब पीकर वाइन चलाना, अधिक गति से वाहन चलाना, तीन सवारी बैठा कर वाहन चलना, हेलमेट का प्रयोग नहीं करना, रोड के किनारे असुरक्षित अवस्था में वाहन खड़ा करना सड़क दुर्घटना का कारण
बनता है। जिस पर नियंत्रण करने हेतु 1 नवम्बर से दंडात्मक कार्यवाही की जावेगी ।

4.Emergency

– सड़क दुर्घटना के मामलों मे अत्यधिक मृत्यु त्वरित प्राथमिक उपचार नहीं मिलने से होती हैं । जिस संबंध मे दुर्घटना के समय रिस्पॉंस टाइम मे कमी लाने हेतु जिले मे उपलब्ध डायल 100 वाहन, 108 एम्बुलेंस , टोल नाके पर उपलब्ध एंबुलेंस के साथ – साथ प्राइवेट अस्पतालों आदि से सहायता प्राप्त की जावेगी व घायल व्यक्ति को शीघ्र अति शीघ्र नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाने का प्रयास किया जावेगा। उक्त संबंध मे जिला स्तर पर 704927589 नंबर से एक हेल्प लाइन शुरू की गई हैं, जिसपर आम जनता अपना सुझाव व दुर्घटना या दुर्घटना संभावित क्षेत्र की जानकारी साझा कर सकते है।

सड़क दुर्घटना की स्थिति मे समान्यतः आम जनता पीड़ित की मदद से कतराती है व कानूनी कार्यवाही के डर से पीड़िंत की सहायता नहीं करती है, उक्त संबंध मे मीटिंग में चर्चा कर तय किया गया कि कोई भी व्यक्ति जो सड़क दुर्घटना मे पीड़ित की मदद कर उसे अस्पताल मे भर्ती करता है, वह केवल अपना मोबाइल नंबर अस्पताल में देकर बिना किसी पूछताछ के घर जा सकता है, यदि पुलिस द्वारा पूछताछ की आवश्यकता पड़ती है, तो पुलिस स्वयं सहायता करने वाले व्यक्ति के घर जाकर आवश्यक कार्यवाही करेगी, जिससे सहायता करनें वालें व्यक्ति को असुविधा न हो ।

इसके अतिरिक्त यदि कोई भी डॉक्टर या अस्पताल सड़क दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति में घायल व्यक्ति को भर्ती करने या इलाज करने से मना करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धास 166-B के तहत कार्यवाही की जा सकती है । इसके तहत डॉक्टर को एक साल तक की जेल की सजा हो सकती है, साथ ही जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

सड़क दुर्घटनाओ में कमी लाने हेतु 1 नवम्बर से चालानी व दंडात्मक कार्यवाही प्रारम्भ की जा रही है ,जिसमें चालक द्वारा शराब पीकर वाहन चलाना, अधिक गति से वाहन चलाना, तीन सवारी बैठा कर वाहन चलना, ओवरलोड या क्षमता से अधिक सवारी वाहन में बैठना, हाइवे पर हेलमेट का प्रयोग नहीं
करना, रोड के किनारे असुरक्षित अवस्था मे वाहन खड़ा करना सड़क दुर्घटना का कारण बनाता है। जिनके विरूद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जावेंगी, एवं जो वाहन रोड किनारे असुरक्षित दशा में खड़े पायें जाते है व उनके कारण कोई दुर्घटना कारित होती है, तो उन वाहनों व वाहन स्वामियों के विरूद्ध भीउचित कार्यवाही की जावेंगी |

शुरुवाती चरण में जिले के मुख्य मार्गों जैंसे महू – नीमच हाइवे, जावरा- आलोट हाइवे, जावरा -नागदा हाइवें, रतलाम – सरवन मार्ग पर सड़क दुर्घटना संभावित क्षेत्र का आकलन कर, दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जाकर सुधार कार्य प्रारम्भ किया जा रहा हैं।

पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी द्वारा महू-नीमच हाइवे पर 3 दुर्घटन संभावित क्षेत्र (सलाखेड़ी तिराहा, आरटीओ ऑफिस, इटावा माता रोड) का निरीक्षण किया व दुर्घटना होने के संभावित कारणों जैसे प्रकाश की कमी, छोटी सड़क का मुख्य सड़क से जुडने पर ब्रेकर या कोई यातायात संकेत का न होना, झड़िया बड़ी होने से ब्लाइंड स्पॉट का बनना आदि चिन्हित कर एसडीओपी रतलाम मान सिंह चौहान व थाना प्रभारी यातायात को आवश्यक कार्य किया जाने हेतु निर्देशित किया |