Home रतलाम रतलाम: 17 वर्षों पश्चात तेरापंथ के आचार्य के पदार्पण पर उमड़ा श्रद्धा...

रतलाम: 17 वर्षों पश्चात तेरापंथ के आचार्य के पदार्पण पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

रतलाम, 22 जून 2021| तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता अहिंसा यात्रा प्रणेता पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी का मंगलवार को रतलाम शहर में करमदी नाका स्थित रविदास चौक से भव्य प्रवेश हुआ।
                  इससे पूर्व प्रातः दिलीप नगर से गुरुदेव ने मंगल प्रस्थान किया। जैसे-जैसे आचार्यश्री के चरण शहर की ओर बढ़े,वैसे -वैसे आचार्य श्री की अगवानी में श्रद्धालुओं की संख्या भी वृद्धिंगत होती गई । शहर में कोविड-19 को देखते हुए जुलूस का कार्यक्रम नहीं था। इसलिए स्थान-स्थान पर खड़े होकर श्रद्धालुओ ने जयघोषों से आचार्यश्री की अभिवंदना की। आचार्य श्री ने मंगल प्रवेश के मार्ग में श्रावक समाज के निवेदन पर नवीन तेरापंथ भवन की प्रस्तावित भूमि एवं तेरापंथ भवन में पधार कर पावन आशीर्वाद प्रदान किया। गणवेश में उपस्थित श्रावक समाज एवं हर ओर तेरापंथ की झांकियां दिखाते बच्चों को देख ऐसा लग रहा था,मानो पूरा रतलाम शहर आज महाश्रमण के रंग में रंग गया हो। जैन-अजैन हर समुदाय-वर्ग अहिंसा यात्रा का स्वागत किया । मार्ग में साधुमार्गी स्थानक एवं आचार्य तुलसी डायग्नोस्टिक सेंटर पर भी गुरुदेव ने मंगलपाठ फरमाया। क्षेत्रीय  सांसद श्री गुमान सिंह डामोर एवं शहर विधायक श्री चैतन्य काश्यप ने आचार्य श्री का रतलाम आगमन पर स्वागत किया। शहर के प्रमुख मार्गो से होते हुए लगभग 11 किलोमीटर विहार कर आचार्य प्रवर अमृत गार्डन में प्रवास हेतु पधारे।
गुरु करते है जीवन में पथदर्शन – आचार्य महाश्रमण
ऑनलाइन प्रवचन कार्यक्रम में प्रेरणा देते हुए आचार्य श्री ने कहा- यह जीवन शरीर और आत्मा का योग है। आस्तिकवाद का सिद्धांत है कि हमारी आत्मा और शरीर दोनों अलग-अलग होते हैं। यह शरीर तो अस्थाई है, मृत्यु के बाद समाप्त हो जाता है। परंतु आत्मा स्थाई है वह आगे भी जाती है। हमारी आत्मा अनंत काल से जन्म-मरण कर रही है और जब तक मोक्ष प्राप्ति नहीं हो जाता यह जन्म-मरण का चक्र चलता रहेगा। आत्मा अपने कर्मों के आधार पर विभिन्न योनियों में जन्म लेती है। जो कर्म किए हैं व्यक्ति को उनका फल भोगना ही पड़ता है। जन्म लेना, बुढ़ापा, रोग और मृत्यु यह सब संसार के दुख है। धर्म द्वारा ही इनसे छुटकारा पाया जा सकता है।
पूज्यश्री महाश्रमण ने आगे कहा कि धर्म ही है जो आत्मा को मोक्ष तक ले जाता है। तीर्थंकर वीतराग भगवान धर्म के अधिकृत प्रवक्ता।होते है। वर्तमान में शुद्ध साधु रूप गुरु है जो धर्म का मार्ग बताते हैं। जीवन में गुरु का होना बहुत जरूरी है। गुरु साधना का पथदर्शन करने वाले होते हैं। व्यक्ति के भीतर गुरु के प्रति सम्मान व श्रद्धा की भावना रहे, समर्पण रहे। व्यक्ति सही समझ, चिंतनपूर्वक गुरु व धर्म को समझे यह जरूरी है। त्यागी गुरु का योग मिल जाए और अहिंसा, संयम रूपी धर्म जीवन में हो, सदाचार हो तो जीवन अच्छा बन सकता है। रतलाम पदार्पण के संदर्भ में गुरुदेव ने कहा- 17 वर्षों के अंतराल के बाद यहां आना हुआ है। 2004 में परमपूज्य आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी के साथ यहां आए थे। यहां के लोगों में खूब धार्मिक उत्साह बना रहे, जीवन में अच्छे गुण आएं।
सांसद श्री गुमानसिंह डामोर ने परम पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी से स्वीकार की गुरुधारणा
रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर के लोकसभा सांसद श्री गुमानसिंह डामोर ने आज शांतिदूत पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी को अपना गुरु स्वीकार करते हुए सपत्नी गुरुधारणा स्वीकार की। ज्ञातव्य है कि वे 8 जून 2021 से जब आचार्यश्री ने झाबुआ में प्रवेश किया था, तब से प्रतिदिन अहिंसा यात्रा में पैदल चलकर सहभागी बन रहे हैं।
गुरुधारणा स्वीकार करने के बाद सांसद महोदय ने अपने आस्थायुक्त उद्द्गार में कहा-‘मैंने जब आचार्य श्री को पहली बार देखा तो मुझे एहसास हुआ कि ऐसी अलौकिक आत्मा मैंने जीवन में पहले कभी नहीं देखी। आचार्यश्री में मैंने सहजता, निस्पृहता, सौम्यता और परम पवित्रता के दर्शन किए। आचार्य जी में मैने क्रोध का नामोनिशान नहीं देखा, लोभ-लालच नहीं देखा, तो मुझे लगा कि ऐसे संत पुरुष से मुझे जुड़ना चाहिए। इसीलिए मैंने और मेरी धर्मपत्नी ने विचारपूर्वक आचार्यश्री को अपने गुरुदेव के रूप में स्वीकार किया। आचार्यश्री ने हमें अपना शिष्य बनाकर धन्य कर दिया।
कार्यक्रम में मालवा सभा के अध्यक्ष श्री पूनमचंद बरबेटा, तेरापंथ सभा अध्यक्ष श्री अशोक दख , एडवोकेट श्री रवि जैन, टीपीएफ अध्यक्ष अंकित बरमेचा ने भी अपने विचार रखे। इससे पूर्व तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मंडल, ज्ञानशाला द्वारा गीत की प्रस्तुति दी गई ।