Monday, August 2, 2021
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रॉकेट में खामी की वजह से आखिरी घंटे में रोकी गई चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग

नई दिल्ली,15जुलाई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के दूसरे मून मिशन Chandrayaan-2 की लॉन्चिंग तकनीकी कारणों से रोक दी गई है. लॉन्च से 56.24 मिनट पहले चंद्रयान-2 का काउंटडाउन रोक दिया गया है. अगली तारीख की घोषणा जल्द की जाएगी. चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को तड़के 2.51 बजे देश के सबसे ताकतवर बाहुबली रॉकेट GSLV-MK3 से लॉन्च किया जाना था. इसरो वैज्ञानिक ये पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि लॉन्च से पहले ये तकनीकी कमी कहां से आई. इसरो प्रवक्ता बीआर गुरुप्रसाद ने इसरो की तरफ से बयान देते हुए कहा कि जीएसएलवी-एमके3 लॉन्च व्हीकल (रॉकेट) में खामी आने की वजह से लॉन्चिंग रोक दी गई है. लॉन्चिंग की अगली तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी.

लॉन्च से करीब 56.24 मिनट पहले इसरो मीडिया सेंटर और विजिटर गैलरी में लाइव स्क्रीनिंग रोक दी गई. कमी देखते ही लॉन्च की प्रक्रिया रोक दी गई. इस रुकावट की वजह से इसरो वैज्ञानिकों की 11 साल की मेहनत को छोटा सा झटका लगा है. हालांकि, इसरो वैज्ञानिकों द्वारा अंतिम क्षणों में यह तकनीकी कमी खोज लेना बड़ा कदम है. अगर इस कमी के साथ रॉकेट छूटता तो बड़ा हादसा हो सकता था. यह वैज्ञानिकों की महारत है कि उन्होंने गलती खोज ली है. इसे जल्द ही ठीक करके वे लॉन्च की नई तारीख घोषित करेंगे.

ये हैं संभावित कारण

  • क्रायोजेनिक इंजन में लिक्विड हाइड्रोजन भरते समय सही तापमान या दबाव का न होना. क्योंकि जिस समय काउंटडाउन रोका गया उससे ठीक पहले लिक्विड हाइड्रोजन भरने का काम पूरा हुआ था.
  • बाहुबली रॉकेट जीएसएलवी-एमके3 की बैटरी में दिक्कत हो सकती है.

पिछले साल जीसैट-11 और 2013 में जीएसएलवी-डी5 की लॉन्चिंग भी टाली गई थी

इससे पहले पिछले साल जीसैट-11 को मार्च-अप्रैल में भेजा जाना था लेकिन जीसैट-6ए मिशन के नाकाम होने के बाद इसे टाल दिया गया. 29 मार्च को रवाना जीसैट-6ए से सिग्नल लॉस की वजह इलेक्ट्रिकल सर्किट में गड़बड़ी हो गई थी. ऐसी आशंका थी कि जीसैट-11 में यही दिक्कत सामने आ सकती है, इसलिए इसकी लॉन्चिंग को रोक दिया गया था. इसके बाद कई टेस्ट किए गए और पाया गया कि सारे सिस्टम ठीक हैं. फिर इसकी लॉन्चिंग 5 दिसंबर 2018 को की गई. उस समय भी इसरो को जांच संबंधी सारी प्रक्रिया पूरी करने में काफी समय लगा था.

इसरो ने 2013 में जीएसएलवी डी-5 रॉकेट का प्रक्षेपण भी ईंधन रिसाव के चलते स्थगित कर दिया था. तब इसरो के तत्कालीन चेयरमैन के राधाकृष्णन ने यह घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि ईंधन रिसाव के चलते हम जीएसएलवी डी-5 का प्रक्षेपण स्थगित कर रहे हैं. अब हम रॉकेट को असेंबली बिल्डिंग ले जाएंगे. डाटा का आकलन करेंगे. ईंधन रिसाव के कारण का पता लगाएंगे. तब भी लॉन्चिंग तय समय से 74 मिनट पहले रोक दी गई थी.

इसरो के लिए क्यों अहम है चंद्रयान-2 मिशन, पांच बड़े कारण

1. वैज्ञानिक क्षमता दिखाना – जब रूस ने मना किया तो ISRO वैज्ञानिकों ने खुद बनाया लैंडर-रोवर

नवंबर 2007 में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने कहा था कि वह इस प्रोजेक्ट में साथ काम करेगा. वह इसरो को लैंडर देगा. 2008 में इस मिशन को सरकार से अनुमति मिली. 2009 में चंद्रयान-2 का डिजाइन तैयार कर लिया गया. जनवरी 2013 में लॉन्चिंग तय थी, लेकिन रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस लैंडर नहीं दे पाई. इसरो ने चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग मार्च 2018 में तय की. लेकिन कुछ टेस्ट के लिए लॉन्चिंग को अप्रैल 2018 और फिर अक्टूबर 2018 तक टाला गया. इस बीच, जून 2018 में इसरो ने फैसला लिया कि कुछ बदलाव करके चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग जनवरी 2019 में की जाएगी. फिर लॉन्च डेट बढ़ाकर फरवरी 2019 किया गया. अप्रैल 2019 में भी लॉन्चिंग की खबर आई थी. इस मिशन की सफलता से यह साफ हो जाएगा कि हमारे वैज्ञानिक किसी के मोहताज नहीं हैं. वे कोई भी मिशन पूरा कर सकते हैं.

(साभार-आज तक)