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लगभग 125 साल पुरानी एतिहासिक डाट की पुलिया के एक हिस्से का प्लास्टर गिरा, बुधवार सुबह हुई घटना, कोई हताहत नहीं, रात में होगा मरम्मत का कार्य। 

रतलाम, 18 अप्रैल(खबरबाबा.काम)। बुधवार सुबह डाट की पुल के एक हिस्से का प्लास्टर नीचे आ गिरा। गनीमत यह रही है कि घटना सुबह के समय हुई ,जब पुलिया के नीचे कम आवागमन था, जिससे किसी को चोट नहीं आई है। सूचना मिलने के बाद रेलवे इंजीनियरों की टीम ने निरीक्षण किया। दशकों पुरानी पुलिया की मरम्मत का काम रात में किया जाएगा ।

घटना बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक डाट की पुल की छत के एक हिस्से का प्लास्टर नीचे आ गिरा। इस दौरान पुलिया  से वाहन गुजर रहे थे, लेकिन गनीमत यह रही कि कोई चोटिल नहीं हुआ। इसके बाद वहां आसपास के लोग इकट्ठे हो गए और रेलवे तथा पुलिस को जानकारी दी गई। रेलवे टीम ने निरीक्षण किया और रिपोर्ट भी तैयार की है। रेलवे द्वारा बुधवार रात को पुलिया की मरम्मत का काम भी किया जाएगा। इंजीनियरों के अनुसार फिलहाल मरम्मत की जाएगी, इसके बाद राज्य शासन और रेलवे प्रशासन के बीच अगर कोई योजना तय होती है तो उसके अनुसार कार्य होगा।

125 साल से भी ज्यादा पुरानी 

जानकारों के मुताबिक डाट की पुलिया का निर्माण अंग्रेजों द्वारा करीब 1890 के आसपास करवाया गया था। डॉट यानी गोल बिंदु से है। इस सबंध में जानकारों के अनुसार उस दौर में आरसीसी तकनीक विकसित नहीं हुई थी। ऐसे में मजबूती वाली पुलिया, मकान या भवन निर्माण के लिए उन्हें निश्चित गोलाई का आकार दिया जाता था जो उसे मजबूती प्रदान करता था। गोलाई (डॉट) के कारण इस पुलिया का नाम डॉट की पुलिया पड़ गया। उस दौरान पुलिया की चौड़ाई बहुत कम थी। इसके बाद आबादी बढऩे पर आवश्यकता अनुसार करीब 3 बार इसकी बड़े स्तर पर मरम्मत और लंबाई,चौड़ाई बढ़ाने का काम किया गया है। जिससे एक सदी से भी ज्यादा पुरानी पुलिया अब जर्जर हो रही है।

हजारों वाहन, सैकड़ों ट्रेनों का दबाव हर रोज….

उल्लेखनीय है कि डॉट की पुलिया क्षेत्र में करीब 40-50 साल पहले तक घनी आबादी नहीं थी। रेलवे के क्वार्टर के अतिरिक्त ट्रैफिक का भी दबाव नहीं था। इसके बाद से तेजी से शहर और यातायात में बढ़ोतरी हुई है। रेलवे की बात करें तो दिल्ली-मुबंई रेलवे ट्रैक होने से हर रोज 70 पैसेंजर और इतनी ही मालगाडिय़ों का भी दबाव पुलिया पर रहता है। साथ ही वर्तमान में अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन करीब 25 से 30 हजार से ज्यादा वाहनों की आवाजाही यहां से होती है।

3 साल से अटका है प्रस्ताव…

डाट की पुलिया के पुरानी होने और यातायात के दबाव के अनुसार चौड़ीकरण को लेकर लंबे समय से मांग की जा रही है। इसे देखते हुए 2015 में रेलवे और जिला प्रशासन ने इसके नवनिर्माण को लेकर प्रक्रिया शुरु भी की थी। परंतु अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में चला गया। पुलिया का प्लास्टर गिरने के बाद से एक बार फिर इसके जर्जर होने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। अगर अब भी ठोस प्रयास कर निराकरण नहीं हुआ तो किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण भी बन सकता है।

राशि को लेकर समन्वय जरूरी 

जानकारों के अनुसार डाट की पुलिया को लेकर तकनीकी सहमति राज्य और रेलवे दोनों के बीच बनना जरूरी है। रेलवे अधिकार क्षेत्र होने से इसकी मरम्मत, पुननिर्माण रेलवे ही करेगा, लेकिन इसके लिए मांग राज्य सरकार को करनी पड़ेगी। इतना ही नहीं बल्कि लोगों की आवाजाही के इस्तेमाल हो रहे मार्ग के निर्माण के लिए राशि भी राज्य शासन द्वारा  उपलब्ध करवाई जाएगी। ऐसे में साफ है कि प्रशासनिक के साथ ही राजनैतिक सहभागिता होने पर ही काम आगे बढ़ सकेगा।

इनका कहना है
अभी यातायात को लेकर ज्यादा दिक्कत वाली स्थिति नहीं है, पुलिया को लेकर रेलवे अधिकारियों से चर्चा कर निराकरण किया जाएगा।

डॉ. कैलाश बुंदेला, अपर कलेक्टर ,रतलाम 

फिलहाल रेल प्रशासन पुलिया का मेटंनेंस कर रहा है। रात में ट्रैफिक रुकने पर पुलिया की मरम्मत की जा रही है। पुलिया के नवनिर्माण का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।

-मुकेश कुमार पाण्डेय, पीआरआई, रतलाम रेल मंडल