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लाकडाउन का असर, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अब सबसे साफ हुई धरती की हवा

नई दिल्ली, 3अप्रैल2020/कोरोना वायरस की वजह से लाखों लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है. लेकिन कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन से धरती को बहुत फायदा हो रहा है. धरती अब ज्यादा साफ हवा में सांस ले पा रही है. धरती पर इतनी साफ हवा करीब 75 साल बाद देखने को मिल रही है. इससे पहले द्वितीय विश्व युद्ध के समय इतनी साफ हवा हुई थी.

अब वैज्ञानिकों ने उम्मीद है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा पहली बार होगा कि धरती पर कार्बन उत्सर्जन सबसे कम होगा. यानी कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा है. लॉकडाउन की वजह से पूरी दुनिया में कार्बन उत्सर्जन कम हो गया है.

ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट के प्रमुख रॉब जैक्सन ने कहा है कि इस साल कार्बन उत्सर्जन में 5 फीसदी की गिरावट आने की उम्मीद है. इससे पहले 2008 की आर्थिक मंदी के समय कार्बन उत्सर्जन गिर कर 1.4 फीसदी हो गया था.

रॉब जैक्सन कैलिफोर्निया स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं. रॉब जैक्सन ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय कई देश बंद थे. बाजार, यातायात, उद्योग बंद थे. इसलिए हवा में प्रदूषण का स्तर बेहद कम हो गया था. फिर वैसा ही नजारा देखने को मिल रहा है.

रॉब ने बताया कि सोवियत संघ के टूटने पर न ही तेल संबंधी क्राइसिस के दौरान कभी भी कार्बन उत्सर्जन इतने कम स्तर पर नहीं आया. कोरोना वायरस की आपदा के दौरान कार्बन उत्सर्जन का कम होना एक छोटी सी खुशखबरी है.

रॉब जैक्सन ने कहा कि लेकिन प्रदूषण में आई कमी तो अस्थाई है. जैसे ही लॉकडाउन हटेगा फिर हम उसी गंदगी में जीने के लिए मजबूर हो जाएंगे. हमारी धरती भी प्रदूषणयुक्त हवा में सांस लेगी. लेकिन इसे धीरे-धीरे कम करने की जरूरत है.

पूर्वी इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया की पर्यावरण विज्ञानी कोरीन ले क्वेरे ने बताया कि ये जो अभी अच्छा बदलाव दिख रहा है, ये लॉकडाउन हटते ही वापस उसी जगह पहुंच जाएगा, जहां पहले था. यानी कुछ ही दिन धरती साफ हवा में सांस ले पाएगी.

कोरीन ले क्वेरे ने बताया कि 2008 की आर्थिक मंदी के बाद धरती पर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में अद्भुत गिरावट आई थी. लेकिन उसके बाद वह वापस 5.1 फीसदी बढ़ गया. चीन में लॉकडाउन की वजह से प्रदूषण का स्तर और कार्बन उत्सर्जन 25 फीसदी तक गिर चुका है.

संयुक्त राष्ट्र ने पिछले साल नवंबर में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि अगर हर साल कार्बन उत्सर्जन में 7.6 फीसदी की गिरावट आए तब जाकर ग्लोबल वॉर्मिंग में 1.5 डिग्री सेल्सियस की कमी आएगी.

वैज्ञानिकों ने माना है कि इस साल कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से कार्बन उत्सर्जन में 10 से 20 फीसदी की गिरावट आती भी है तो ये बहुत दिन तक नहीं रह पाएगी. क्योंकि 2021 की शुरुआत होते ही यह फिर से बढ़ने लगेगी. जो कि चिंता का विषय है.

(साभार-आज तक)