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शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेता राजभवन पहुंचे, अजीत को मनाने में जुटा पवार परिवार

मुंबई,25नवम्बर2019/ पिछले तीन दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति ऐसे मोड़ ले रही जिसके बारे में किसी ने सोचा नहीं था। जोड़-तोड़ के बाद यहां कई ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं। भाजपा जहां दावा कर रही है कि उसके पास बहुमत है। वहीं शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी उनपर सदन में बहुमत परीक्षण कराने की मांग कर रही है। इसके अलावा उनकी कोशिश अपने विधायकों को टूटने से बचाने की भी है। इस सियासी ड्रामे की दशा और दिशा उच्चतम न्यायालय के सोमवार को दिए जाने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं। यह देखना होगा कि अदालत क्या फैसला देती है। इसी बीच शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेता राजभवन पहुंचे हैं।

मैं शिवसेना का साथ नहीं छोड़ूंगा: शरद पवार

सतारा पहुंचे एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने अजित पवार के भाजपा के साथ जाने के पीछे अपना हाथ होने से इनकार करते हुए कहा कि हम सरकार बनाने में पूरी तरह सक्षम हैं, बातचीत में देरी हुई क्योंकि हमारी विचारधारा अलग-अलग थी। इस सवाल पर कि क्या अजित पवार ने आपके इशारे पर यह कदम उठाया है? इसपर शरद पवार ने हंसते हुए कहा कि अगर मेरा हाथ होता तो कम से कम मैं अपनी पार्टी के नेताओं को तो भरोसे में लेता। मैं शिवसेना के साथ आगे बढ़ चुका हूं। अब पीछे नहीं हटूंगा।

सोनिया गांधी के आवास पहुंचे कांग्रेस नेता

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के आधिकारिक आवास पर पार्टी नेता अधीर रंजन चौधरी, गुलाम नबी आजाद, केसी वेणुगोपाल और अन्य नेता पहुंचे हैं। वह यहां कांग्रेस के संसदीय रणनीति समूह की बैठक के लिए पहुंचे हैं।

अजित से मिलने पहुंचे छगन भुजबल

एनसीपी के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार से बातचीत करने के लिए उनके आवास पर पहुंचे। इससे पहले सुबह पांच बजे वह अपने विधायकों से मिलने के लिए हयात होटल पहुंचे थे। विधायकों से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि मैं यहां अपने विधायकों से मिलने आया हूं। हमारे एक या दो विधायक ही यहां नहीं हैं। बाकी हमारी पूरी संख्या है।

वापस लौटे अजित पवार गुट के दो विधायक

अजित पवार गुट का समर्थन करने वाले दो बागी विधायक दिल्ली से मुंबई लौट गए हैं। एनसीपी के दो विधायक दौलत दरौडा और अनिल पाटिल सोमवार सुबह मुंबई पहुंचे। ये दोनों भाजपा के साथ होने का दावा कर दिल्ली पहुंचे थे। इन दोनों विधायकों का एनसीपी के पास वापस लौटना अजित पवार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

(साभार-अमर उजाला)