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सिंघम रिर्टन:रतलाम में प्रशिक्षु अवधी में थाना प्रभारी और बाद में सीएसपी एवं एएसपी रहने के बाद अब रतलाम SP बने आईपीएस गौरव तिवारी, सोमवार को रतलाम आकर करेंगे ज्वाइन ,अपराधी खाते हैं नाम से खौफ।जानिए किस तरह संघर्ष कर बने आईपीएस-

रतलाम, 8जुलाई(खबरबाबा.काम)। अपनी ईमानदार कार्यशैली और अपराधियों एवं अवैध कार्य करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से आज प्रदेश के आम आदमी के दिलों में जगह बना चुके आईपीएस गौरव तिवारी अब रतलाम एसपी होगें।रतलाम से श्री तिवारी का पुराना और गहरा नाता है, वे एक मात्र एसपी होगें जिनकी परिवीक्षा अवधी भी रतलाम में रही और यहीं वे दो थानों के प्रभारी रहते हुए,सीएसपी और एएसपी भी रहे, अब वे रतलाम एसपी के रुप में ज्वाइन करेंगे।

आईपीएस गौरव तिवारी का रतलाम एसपी का आदेश जारी होते ही आम आदमी में जहां खुशी की लहर है, वही अपराधिक तत्वों में खौफ पैदा हो गया है।

हाल ही में राज्य शासन द्वारा जारी की गई 23 आईपीएस की तबादला सूची में रतलाम एसपी अमित सिंह का तबादला जबलपुर हुआ था ,वही छिंदवाड़ा एसपी गौरव तिवारी को देवास एसपी बनाया गया था। देवास एसपी अंशुमान सिंह को रतलाम एसपी पदस्थ किया गया था। लेकिन रविवार सुबह जारी हुए संशोधित आदेश में देवास SP को यथावत रखते हुए आईपीएस गौरव तिवारी का संसोधित आदेश जारी कर उन्हें रतलाम एसपी पदस्थ किया गया है। वर्ष 2010 बेच के आईपीएस गौरव तिवारी सबसे पहले प्रशिक्षु आईपीएस के रुप में रतलाम आए थे,यहां तत्कालीन एसपी डा. रमणसिंह सिकरवार के कार्यकाल के दौरान उन्होने प्रशिक्षु अवधि में ही बेहतरीन कार्य करते हुए आम जनमानस के बीच अच्छी छवि बना ली थी। प्रशिक्षु अवधि में आप माणक चौक और नामली थाना प्रभारी भी रहे। रतलाम में सीएसपी और एएसपी के पद पर भी रहे। श्री तिवारी बालाघाट, कटनी और छिंदवाड़ा जिले के SP भी रह चुके हैं और कटनी से उनके स्थांनातरण को लेकर वे देश-प्रदेश में खासे चर्चा में आए थे।

सोमवार को ज्वाइन करेंगें एसपी तिवारी

एसपी गौरव तिवारी रविवार दोपहर को उज्जैन पहुंचे। जहां उन्होने बाबा महाकाल के दर्शन कर आर्शिवाद लिया।सोमवार सुबह एसपी  तिवारी रतलाम पहुंचकर चार्ज लेंगे।

जानिए साधारण किसान परिवार का बेटा किस तरह संघर्ष कर बना आईपीएस

आज प्रदेश का बच्चा-बच्चा आईपीएस गौरव तिवारी का नाम जानता है, लेकिन गौरव तिवारी के आईपीएस बनने की कहानी इतनी आसान नहीं है ।

पूर्व में उनके द्वारा विभिन्न समाचार पत्रों को दिए गए साक्षात्कार के अनुसार, बताया जाता है कि कुल 1400 रुपए महीना में उन्होने आईपीएस की तैयारी की।दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी के दौरान वो महज 7000 रुपए बतौर जेब खर्च लेते थे। दिल्ली जैसे शहर में वो 2600 रुपए टिफिन और 3000 रुपए रूम के किराए पर खर्च होने के बाद बचे हुए 1400 रुपए में ही वो अपने स्टडी मटेरियल और अन्य जरूर सामान जुटाते थे। बनारस से 30 किलोमीटर दूर स्थित एक साधारण गांव के रहने वाले गौरव तिवारी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल में प्राप्त की। दसवीं तक गांव में पढ़ाई करने के बाद वे लखनऊ चले गए। इंटरमीडियट लखनऊ से पास करने के बाद उन्होंने आईआईटी से इंजीनियरिंग की। इसके बाद वे टाटा कंपनी में नौकरी करने लगे।गौरव तिवारी शुरू से ही आईपीएस अफसर बनना चाहते थे, लेकिन सिविल सर्विसेस की पढ़ाई करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने इंजीनिरिंग करने के बाद टाटा कंपनी ज्वाईन कर ली। दो साल काम करने के बाद जब पैसे एकत्रित हुए तो वे आईपीएस की कोचिंग करने के लिए दिल्ली चले गए। इसके बाद उनका सिलेक्शन हो गया। बताया जाता है कि जब वे आईआईटी से इंजीनियरिंग कर रहे थे तो उन्हें स्कॉलरशिप मिलती थी। जिसकी वजह से उनकी पढ़ाई संभव हो पाई।

माता पिता की शिक्षा और संस्कार से इस मुकाम पर पहुंचे

गौरव तिवारी साधारण किसान परिवार से है। उनके पिता खेती करते हैं। मां सविता ग्रहणी हैं। माता पिता से मिली शिक्षा और संस्कार के बल पर ही वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं।