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IAS बनने का जुनून, छोड़ी लाखों की जॉब, इंजीनियर से ऐसे बने UPSC टॉपर

नई दिल्ली, 28 नवम्बर2019/ पॉवर ग्रिड कार्पोरेशन में इंजीनियर की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर आईएएस की तैयारी में जुटना आसान नहीं है. उस पर भी अगर आपको तीन बार फेलियर मिले तो ये और भी कठिन हो जाता है. लेकिन, वर्णित नेगी ने अपनी स्मार्ट वर्क स्ट्रेटजी से ये कर दिखाया. उन्होंने बीते साल 2018 में यूपीएससी में 13वीं रैंक हासिल की है. आईए जानें- छत्तीसगढ़ के जशपुर के इस लड़के के जुनून की कहानी.

आईएएस वर्णित नेगी ने एक वीडियो इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए हार्ड वर्क से नहीं बल्कि स्मार्ट वर्क से सफलता हासिल की है. वो
जसपुर में पले बढ़े हैं, जसपुर से शुरुआती पढ़ाई के बाद बिलासपुर में डीएवी पब्लिक में सातवीं से दसवीं कक्षा की पढ़ाई की. इसके बाद 11वीं और 12वीं की पढ़ाई कोटा राजस्थान से की.

वर्ण‍ित ने एनआईटी से सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद पॉवर ग्रिड कार्पोरेशन में इंजीनियर की जॉब पा ली थी. यहां नौकरी के दौरान भी उनके मन में आईएएस बनकर देश के लिए बेहतर करने का सपना साथ में पल रहा था.
अपने सपने को पूरा करने के लिए मार्च 2016 में उन्होंने रिजाइन करके तैयारी शुरू कर दी. वो बताते हैं कि पहले अटेंप्ट में मैं मेन क्लीयर नहीं कर पाया. दूसरी बार फिर तैयारी की तो 504 रैंक आई, जिसमें उन्हें असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स का पद ऑफर किया गया. लेकिन उन्होंने तीसरे अटेंप्ट की तैयारी शुरू कर दी.
लेकिन, तीसरी बार में उन्हें 13वीं रैंक हासिल हुई. वो बताते हैं कि यूपीएससी की तैयारी काफी डिमांडिंग होती है, इसके लिए अपने जीवन और तैयारी के तरीकों में कई तरह की चीजें जरूरी होती हैं. पहले मैं सोचता था कि वो कौन लोग होते हैं जो लाखों में टॉप 100 में आ जाते हैं.

परिवार का साथ भी है जरूरी

वो कहते हैं कि तैयारी के लिए हमें सोशल मीडिया से बाहर आना होता है. इस दौरान हम लोगों से कटकर रहते हैं. इस दौरान फेमिली का सपोर्ट सबसे ज्यादा जरूरी है. वो कहते हैं कि मैं अपनी सफलता का सबसे पहला श्रेय अपने परिवार का ही देता हूं जिन्होंने मुझे पूरी तरह मानसिक रूप से सहयोग दिया.

स्मार्ट हार्डवर्क है जरूरी

वो कहते हैं कि यूपीएससी की तैयारी में हार्डवर्क तो जरूरी है लेकिन ये स्मार्ट हार्डवर्क होना चाहिए. आप जबतक स्मार्टली तैयारी नहीं करते सफलता मिलना मुश्किल है. इसमें धैर्य और निरंतरता दोनों जरूरी है.

अपने मन की सुनना भी जरूरी

वो कहते हैं कि तैयारी के दौरान सबसे जरूरी है कि आप अपने मन के हिसाब से चलें, मसलन जब पढ़ने का मन है तो आप बहुत कुछ पढ़ सकते हैं. मैं भी जब मन करता था तभी पढ़ता था. ये भी हुआ कि जब कई दिनों तक मैंने पढ़ाई नहीं की, कई बार काफी देर तक पढ़ता रहा. ये बहुत टफ कंपटीशन है जिसमें आईआईटी, मेडिकल और सीए के टॉपर्स आते हैं.

ये थी स्ट्रेटजी

वर्णित कहते हैं कि प्री और मेन्स की तैयारी में कुछ चीजों में समानता है तो कुछ डिफरेंस भी हैं. कुछ सिमिलर सिलेबस है, लेकिन प्री में ऑप्शन होते हैं तो उसमें परीक्षा के दौरान टॉपिक देखकर आप रीकॉल कर सकते हैं. वहीं मेन्स में सारे टॉपिक खुद रीकॉल करने पड़ते हैं. इसकी तैयारी साथ में हो सकती है लेकिन हमें स्मार्ट तरीके से ये ध्यान रखना होता है कि किन टॉपिक्स को कैसे तैयार करना है.

(साभार-आज तक)