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आदिवासी संस्कृति को बचाने के लिए सरकार करे प्रयास – विधायक गेहलोत ने सैलाना में आदिवासी संग्रहालय सहित विधानसभा में उठाए कई मुद्दे

रतलाम,20जुलाई। आदिवासी संस्कृति को बचाने के लिए सरकार क्या प्रयास कर रही है। इसके लिए सैलाना विधायक हर्षविजय गेहलोत ने शुक्रवार को विधानसभा में आवाज उठाई।

विधायक श्री गेहलोत ने  विधानसभा मे पुछा की प्रदेश में आदिवासी संस्कृति किस किस क्षेत्र में बहुलता से है तथा किस नाम से जाना जाता है। इसका मूल तत्व क्या है, तत्वों में वर्तमान शहरी संस्कृति के प्रभाव से क्या परिवर्तन हो रहे हैं। प्रदेश में कौन सी आदिवासी संस्कृति लुप्त होने की कगार पर है और क्या प्रयास कर बचाया नहीं जा सकता। यदि हां तो किस स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि आदिवासी गीत और संगीत को जन सामान्य में लोकप्रिय बनाने हेतु पांच सालों में क्या क्या आयोजन कहां किए गए। आदिवासी संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन हेतु भोपाल की तर्ज पर सैलाना में क्या कोई संग्रहालय बनाया जाएगा। क्या शासन आदिवासी लोकगीत, किदबंतिया तथा कथाओं पर कोई पुस्तक प्रकाशित करेगा।
जवाब में मंत्री ओमकार सिंह मरकाम ने बताया कि बुदेलखंड, बघेलखंड, निमाड़ और मालवा, चंबल क्षेत्र में बहुलता से आदिवासी पाए जाते हैं। जनजातीयों के नाम गौंड, बैगा, कोरकू, भारिया, सहरिया, कोल और भील है। आदिवासियों द्वारा उपयोग की जाने वाली बोली, भाषा, खान पान, रीति रिवाज कला पंरपरा मूल तत्व है। पारंपरिक जीवन शैली और शहरी संस्कृति के प्रभाव से देशज ज्ञान परंपराओं के प्रचि अरुचि की स्थिति है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई भी आदिवासी संस्कृति लुप्त होने की कगार पर नहीं है। सैलाना में आदिवासी संग्रहालय बनाने की कोई योजना वर्तमान में प्रस्तावित नहीं है।  प्रदेश की अवैध कॉलोनियों को वैध नहीं कर पाने में किसी भी एजेंसी अधिकारी, कर्मचारी को कोई गलती नहीं है। यह बात प्रदेश सरकार के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ने सैलाना विधायक के जवाब में कही।
 अवैध कॉालोनियों में लापरवाही का जिम्मेदार कौन ? 
सैलाना विधायक हर्षविजय गेहलोत ने सवाल किया कि अवैध कालोनियों को वैध करने की प्रक्रिया में कानूनी कमी एवं लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है। रतलाम में कौन कौन सी अवैध कालोनी है। ये कालोनी कब निर्मित हुई तथा किसके द्वारा। किस किस कालनी को वैध घोषित किया गया था और किस किस कालोनी में कितनी राशि का निर्माण कार्य स्वीकृत कर प्रारंभ किया गया था। क्या विभाग ने कालोनाइजर को फायदा पहुंचाने और रहवासियों से जबरन राशि वसूल करने के उद्देश्य से कालोनियों को वैध करने का कार्य किया है। यदि हां, तो अब क्या किया जाएगा।
जवाब में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने कहा कि निगम में अवैध कालोनियों के नियमितिकरण की कार्यवाही मप्र नगर पालिका नियम 1998  के आधार पर की गई। इसमें समय-समय पर संशोधनों में उल्लेखित प्रावधान अनुसार की जाती है। नियमों में नगर निगम के मामले में आयुक्त तथा नगर परिषदों के मामले में कलेक्टर सक्षम प्राधिकारी के रूप में प्राधिकृत है। प्रक्रिया में कानूनी कमी एवं लापरवाही नहीं हुई है ऐसे में कोई जिम्मेदार नहीं है।
अवैध खनन का मुद्दा भी उठाया
विधायक गेहलोत ने विधानसभा में सवाल पुछा कि पांच सालों में अवैध रैत खनन के कितने मामले सामने आए और क्या इसकी उच्च स्तरीय जांच की जाएगी। तीन सालों में कितने आरोपी बनाए गए और कितने आरोपी बार बार यह काम कर रहे हैं। जवाब में खनिज मंत्री प्रदीप अमृतलाल जायसवाल ने बताया कि  फिलहाल जांच को लेकर कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।