रतलाम,15 सितंबर(खबरबाबा.काम)। दीक्षा दानेश्वरी, आचार्य प्रवर 1008 श्री रामलाल जी म.सा.की प्रेरणा से रतलाम में चल रहा संयम साधना महोत्सव संयम के नित नए इतिहास रच रहा है। एक गुरूभक्त, आचार्यश्री से 58 उपवास के प्रत्याख्यान लेकर अब तक की सर्वाधिक तपस्या की और अग्रसर हुए। इसके अलावा दो तपस्वियों ने 31-31 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। इससे पूर्व अब तक महोत्सव में 96 मासक्षमण हो चुके है। केशलोच का क्रम भी निरंतर जारी है। पर्यूषण पर्व तक 389 गुरूभक्तों द्वारा केशलोच कराया जा चुका है।
आचार्यश्री से शनिवार को पूना में रहने वाले देशनोक निवासी पुलकित-पारस गुलगुलिया ने 58 उपवास का प्रत्याख्यान लिया। उनके परिवार से पूर्व में श्री गौरवमुनिजी एवं श्री लाघवमुनिजी म.सा.दीक्षा लेकर संयम जीवन अंगीकार कर चुके है। पुलकित से पूर्व आचार्यश्री की प्रेरणा से विजय कुमार सांड एवं पुष्पा पगारिया द्वारा 51-51 उपवास की तपस्या की जा चुकी है। समता कुंज में व्याख्यान के बाद 25 उपवास की तपस्या कर रहे महेंद्र-पारसमल जारोली एवं मंजु वया बंबोरी ने 31 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। इनके अलावा ऋषभ-संजय पावेचा ने 25 उपवास तथा कई तपस्वियों ने अलग-अलग तपस्या का प्रत्याख्यान लिया।
पर्वाधिराज पर्यूषण के दौरान 110 गुरूभक्तों द्वारा अठ्ठाई एवं इससे तपस्या भी की गई। बैंगलुरू के शुभकरण सिपानी ने आजीवन शीलव्रत का संकल्प लिया। चातुर्मास संयोजक महेंद्र गादिया ने बताया कि व्याख्यान में इस दौरान इंदौर, पूना, बैंगलुरू, बीकानेर, बंबोरी, चेन्नई, दुर्ग, उज्जैन आदि कई स्थानों के गुरूभक्त उपस्थित रहे। श्री गौतममुनिजी ने गुस्से को पीने पर जोर हुए कहा कि एक बार गुस्सा पीने से 66 करोड़ उपवास का लाभ मिलता है। उनसे प्रेरणा पाकर गुरूभक्तों ने आचार्यश्री से गुस्सा नहीं करने का संकल्प लिया। संचालन चंदनमल पिरोदिया ने किया।
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