भोपाल,23मार्च2020/ मध्य प्रदेश में 15 साल के सत्ता का वनवास काट के लौटी कांग्रेस 15 महीने तक की ही सत्ता में रह सकी. 15 सालों तक सत्ता पर काबिज रही बीजेपी को दोबारा से वापसी के लिए 15 महीने तक का ही इंतजार करना पड़ा. कमलनाथ के इस्तीफे के बाद अब एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान के सिर सत्ता का ताज सजने जा रहा है.
कमलनाथ सरकार के खिलाफ सारे मोर्चों पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नेतृत्व कर रहे थे. मध्य प्रदेश में 13 साल तक सत्ता की बागडोर संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चौथी बार भी मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. बीजेपी ने शिवराज चौहान को अब तक सभी मोर्चों में आगे किया हुआ है, ऐसे में सरकार बनने पर प्रदेश की कमान भी उन्हें सौंपी जा रही है. वो सोमवार शाम मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं.
शिवराज सिंह चौहान की छवि जनता के बीच एक सरल नेता की है. बीजेपी आलाकमान भी शिवराज सिंह चौहान को तवज्जो देना नहीं भूलता. पिछले 15 महीनों में कई बार ऐसी नौबत आई, जब लगा कि कांग्रेस के हाथ से सत्ता छिन सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. इसका कारण है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ भी कम बड़े खिलाड़ी नहीं हैं, लेकिन इस बार उनकी एक नहीं चली और उन्हें सत्ता से विदा होना पड़ा. कमलनाथ को पिछले 15 महीनों में कई बार संकट का सामना करना पड़ा.
बता दें कि 2018 के विधानसभा चुनावों में शिवराज के नेतृत्व में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था. इसी हार के साथ शिवराज से मुख्यमंत्री की कुर्सी छिन गई. हालांकि अब 15 महीने के बाद कमलनाथ की विदाई और बीजेपी की वापसी हुई है तो सत्ता की कमान फिर से शिवराज को मिलने जा रही है. मध्य प्रदेश के इतिहास में शिवराज पहले नेता हैं, जो चौथी बार सीएम बनेंगे. इससे पहले तक तीन बार का रिकॉर्ड श्यामा चरण शुक्ला और शिवराज के नाम दर्ज है.
शिवराज का सियासी सफर
शिवराज सिंह चौहान छात्र राजनीति से उभरने वाले नेता हैं. शिवराज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं और वे 13 साल की आयु में 1972 में आरएसएस में शामिल हुए और तब से लेकर आज तक वे अलग-अलग स्वरूपों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं. वे मध्य प्रदेश की विदिशा लोकसभा सीट से पांच बार सांसद रह चुके हैं. शिवराज इमरजेंसी में जेल भेजे गए थे और बाहर आकर एबीवीपी के संगठन मंत्री बना दिए गए.
पहली बार बने विधायक
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान पहली बार विधायक 1990 में हुए उपचुनाव में जीतकर बने. बुधनी विधानसभा सीट से उन्होंने जीत हासिल की थी. हालांकि, बुधनी ने शिवराज को टिकट दिलाने की भूमिका 1989 में विदिशा से सांसद बने राघवजी ने बनाई. राघवजी को दिल्ली की राह पकड़नी थी तो वो अपने इलाके में अपने ही लोग बैठाना चाहते थे. ऐसे में शिवराज उनकी पसंद बने और उन्हीं की सिफारिश पर शिवराज को टिकट मिला था. इसके बाद शिवराज ने सियासत में पलट कर नहीं देखा.
शिवराज सिंह चौहान 2005 में बीजेपी मध्य प्रदेश के अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे. इस साल उनके सियासी सितारे बुलंद हुए और पार्टी ने बाबूलाल गौर को हटाकर शिवराज सिंह चौहान को सीएम की कुर्सी सौंपी. इसके बाद शिवराज 2008 में दोबारा से प्रचंड जीत के साथ मुख्यमंत्री बने और 2013 में शिवराज ने तीसरी बार लगातार जीत दर्ज की और तीसरी बार मुख्यमंत्री बने. इस तरह सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले मुख्यमंत्री के रूप में उनका नाम दर्ज है.
(साभार-आज तक)
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