रतलाम, 22 अगस्त (खबरबाबा.कॉम)। जिले के राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को लेकर शनिवार को कलेक्टर अजय कटेसरिया ने अधिवक्ताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में प्रकरण दर्ज होने में देरी, नियमित कॉज लिस्ट जारी नहीं होने, पेशी के दौरान फाइल तैयार नहीं रहने, आदेश जारी करने में महीनों की देरी और प्रकरणों को पोर्टल पर अपलोड नहीं किए जाने जैसी कई व्यावहारिक समस्याएं खुलकर सामने आईं। अधिवक्ताओं ने व्यवस्थाओं में सुधार के लिए सुझाव भी दिए, जिस पर कलेक्टर ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बैठक में अधिवक्ताओं ने बताया कि कई राजस्व न्यायालयों में रीडर स्तर पर ही प्रकरण दर्ज होने में काफी समय लग जाता है। कुछ मामलों में प्रकरण दर्ज करने में एक माह तक का समय व्यतीत हो जाता है। वहीं न्यायालयों की वाद सूची यानी कॉज लिस्ट नियमित रूप से जारी नहीं होने से अधिवक्ताओं और पक्षकारों को प्रकरणों की स्थिति जानने में परेशानी होती है। हालांकि वर्तमान में करीब एक सप्ताह से कॉज लिस्ट जारी होना शुरू हुई है।
एक ही समय पर कई न्यायालय लगने से अधिवक्ताओं की परेशानी
बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठा कि कई न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों के बैठने का समय स्पष्ट और नियत नहीं होने से अधिवक्ताओं को कठिनाई होती है। विशेष रूप से जावरा की चार टप्पा तहसीलों में कई बार एक ही समय पर अलग-अलग न्यायालय लगने से अधिवक्ताओं के सामने एक साथ कई स्थानों पर उपस्थित होने की समस्या आती है।
अधिवक्ताओं ने बताया कि पेशी के समय रीडर द्वारा फाइलें पहले से तैयार नहीं रखने के कारण सुनवाई में अनावश्यक विलंब होता है। कई प्रकरणों में पूरी कार्रवाई होने के बावजूद दो से तीन माह तक आदेश जारी नहीं किए जाते। इसके अलावा प्रकरणों और आदेशों को वेब जीआईएस पोर्टल पर समय पर अपलोड नहीं किए जाने से नकल प्राप्त करने में भी देरी होती है। अधिवक्ताओं का कहना था कि कई बार नकल मिलने में देरी से अपील की निर्धारित अवधि भी प्रभावित होने की स्थिति बन जाती है।
बैठक में अधिवक्ताओं ने यह भी मुद्दा उठाया कि कई राजस्व न्यायालयों के आदेशों में सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किए गए उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण न्याय दृष्टांतों का उल्लेख नहीं किया जाता। अधिवक्ताओं ने इस संबंध में भी उचित ध्यान देने की मांग रखी।
अपर कलेक्टर स्तर पर प्रकरणों की निगरानी को लेकर भी सुझाव दिए गए। अधिवक्ताओं का कहना था कि निगरानी सीमित शक्ति है और इसका उपयोग केवल विशेष एवं आवश्यक परिस्थितियों वाले प्रकरणों में ही किया जाना चाहिए। निजी भूमि पर बेजा कब्जे से जुड़े कुछ पुराने मामलों में अनावश्यक निगरानी के कारण विलंब होने का मुद्दा भी बैठक में रखा गया, हालांकि अधिवक्ताओं ने बताया कि वर्तमान में इस समस्या का समाधान हो चुका है।
लोक सेवा गारंटी और खसरा सुधार की प्रक्रिया पर भी चर्चा
लोक सेवा गारंटी से जुड़े मामलों में अधिवक्ताओं ने बताया कि कुछ राजस्व प्रकरणों का नकारात्मक निराकरण कर दिया जाता है, जबकि कई लोक सेवा केंद्रों पर अपील दर्ज करने से यह कहकर मना कर दिया जाता है कि पोर्टल काम नहीं कर रहा है।
निजी भूमि के खसरा सुधार से जुड़े प्रकरणों में अनुविभागीय अधिकारियों द्वारा मूल फाइल सीधे पटवारी के पास भेजे जाने की प्रक्रिया पर भी अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई और अपने सुझाव रखे।
कलेक्टर बोले—पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था प्राथमिकता
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने अधिवक्ताओं द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और कहा कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और व्यवस्थित बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर अधिवक्ताओं द्वारा बताए गए व्यावहारिक मुद्दों पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
कलेक्टर ने कहा कि अधिवक्ताओं का मैदानी और न्यायालयीन अनुभव प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। उनके सुझावों से राजस्व न्यायालयों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के साथ ही आम नागरिकों को समय पर न्याय और सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।