रतलाम, 8 अक्टूबर (खबरबाबा.कॉम)। स्वामित्व योजना और फार्मर रजिस्ट्री समेत राजस्व विभाग के निर्धारित कार्यों में लापरवाही अब रतलाम जिले के 12 पटवारियों पर भारी पड़ सकती है। शासकीय कार्यों को समयसीमा में पूरा नहीं करने और सौंपे गए दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही के मामले में कलेक्टर अजय कटेसरिया ने 12 पटवारियों को दीर्घ शास्ति संबंधी आरोप-पत्र जारी किए हैं। कार्रवाई के बाद राजस्व अमले में हड़कंप की स्थिति है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब स्वामित्व योजना की प्रगति को लेकर प्रशासन और पटवारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। गुरुवार शाम मुख्य सचिव की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद कलेक्टर अजय कटेसरिया ने यह एक्शन लिया है।
इन 12 पटवारियों को जारी हुए आरोप-पत्र
कलेक्टर द्वारा जारी कार्रवाई में करमदी के दयाराम गुर्जर, गोपालपुरा की अनामिका ओहरी, बिबड़ौद के शैलेन्द्र व्यास, सागोद-नगरा के भरत राठौर, हरथली के राजेश रावल, कनेरी के राजीव योगी, मोरवनी की सीमा राठौर, अमलेटा के संतोष राठौर, घटला के तेजवीर सिंह चौधरी, जड़वासा खुर्द के विजय सोंदल, ईश्वरथुनी के अंकित परिहार और सालाखेड़ी के वीरेन्द्र सोलंकी शामिल हैं।
स्वामित्व योजना और फार्मर रजिस्ट्री पर फोकस
प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इन पटवारियों पर स्वामित्व योजना, फार्मर रजिस्ट्री एवं अन्य निर्धारित शासकीय कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं करने, कार्यों में लापरवाही बरतने तथा निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण नहीं करने के आरोप हैं।
जांच के बाद होगा अंतिम फैसला
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आरोप-पत्र जारी किया जाना अंतिम दंडादेश नहीं है। अब संबंधित पटवारियों से जवाब लिया जाएगा और विभागीय अनुशासनात्मक प्रक्रिया के तहत आरोपों की जांच की जाएगी। उनके उत्तर और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार दीर्घ शास्ति दी जा सकती है। इसमें गंभीर मामलों में सेवा से बर्खास्तगी जैसी सजा का प्रावधान भी हो सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
पटवारी विवाद के बीच प्रशासन का सख्त संदेश
स्वामित्व योजना के काम को लेकर पिछले दिनों प्रशासन और पटवारियों के बीच बढ़े विवाद के बीच 12 पटवारियों को एक साथ दीर्घ शास्ति के आरोप-पत्र जारी किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर मुख्य सचिव की वीसी के तत्काल बाद हुई कार्रवाई से यह संकेत साफ है कि सरकार और जिला प्रशासन अब राजस्व योजनाओं की धीमी प्रगति और लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाने के मूड में हैं।