रतलाम, 9अक्टूबर (खबरबाबा. कॉम)। प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों की जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने तथा निजी देवस्थलों को शासकीय मंदिरों की सूची से अलग करने की मांग उठी है। राष्ट्रीय मठ मंदिर संघ ने प्रेस वार्ता चेतावनी दी है की आने वाले दिनों मे यदि शासन प्रशासन अतिक्रमण नहीं हटा पाया तो संघ खुद मैदान मे उतर कर मठ मंदिरो से अतिक्रमण हटाएगा।
प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए मठ मंदिर संघ के प्रदेश अध्यक्ष रघुदास बैरागी ने कहा मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा, पुजारियों के अधिकार और देवस्थानों की भूमि से जुड़े मुद्दों पर शासन का ध्यान लगातार आकर्षित किया गया, कई बार सरकार और कलेक्टर के आदेश के बावजूद एसडीएम और तहसीलदार लेवल के अधिकारी इसे अमल मे लाने मे कतराते है।
संघ ने मांग की कि मंदिरों की कृषि एवं गैर-कृषि भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाकर मूल पुजारियों और सेवादारों को उनका अधिकार वापस दिलाया जाए। साथ ही, मंदिरों की जमीन पर अनधिकृत कब्जा करने वालों और भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
निजी देवस्थलों की बने अलग सूची
संघ ने मध्य प्रदेश शासन के वर्ष 2008 के आदेशों और न्यायालयीन निर्णयों का हवाला देते हुए निजी देवस्थलों की अलग अलग सूची तैयार करने की मांग की।
संघ के अनुसार, निजी देवस्थलों के निजी खातों में पुजारियों का विधिवत वंशानुगत नामांतरण दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि उनके अधिकार सुरक्षित रह सकें। संघ ने यह भी कहा कि निजी देवस्थलों पर शासकीय मंदिरों के लिए निर्धारित नियम लागू नहीं किए जाने चाहिए।
पुराने रिकॉर्ड से हो मंदिरों की जमीन की जांच
संघ की ओर से जारी दस्तावेज में शासनाधीन मंदिरों की संपत्तियों के सर्वेक्षण, सुरक्षा और नियमित समीक्षा का उल्लेख किया गया है। पुराने अभिलेखों के आधार पर मंदिरों की जमीन और संपत्ति की जांच कर गैरकानूनी तरीके से बेची गई जमीन वापस मंदिरों को दिलाने तथा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की मांग की गई है।
पुजारियों को भी मिले सरकारी योजनाओं का लाभ
संघ ने कहा कि देवस्थानों की भूमि पर निर्भर पुजारियों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। पुजारियों को मंदिर की ज़मीन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड मिलना चाहिए।
मंदिरों की जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ संबंधित आपराधिक धाराओं में प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाए। संघ का कहना है कि मंदिरों की संपत्तियों की सुरक्षा के साथ पुजारियों और सेवादारों के पारंपरिक अधिकारों का संरक्षण भी जरूरी है।
संघ ने निजी मंदिरों की जमीन की अनावश्यक बिक्री रोकने के लिए भी प्रयास करने की बात कही है, ताकि देवस्थलों की संपत्ति सुरक्षित रह सके और धार्मिक परंपराओं का संरक्षण हो सके।इस अवसर पर अखिल भारतीय पुजारी संघ के अध्यक्ष महेन्द्र शर्मा, महेंद्रदास बैरागी, सहित पुजारी संघ के पदाधिकारी मौजूद थे।