
रतलाम पुलिस के लिए चुनौती बन रहा दिल्ली-मुंबई 8 लेन एक्सप्रेस-वे….जिले में तस्करी से लेकर अपराधी भागने और अवैध कारोबार के लिए कर रहे उपयोग- पुलिस भी हो रही हाईटैक, जल्द ही चैकिंग और सुरक्षा के लिए दिख सकते हैं कई उपाय
रतलाम,7अक्टूबर(खबरबाबा.काम)। दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस वे आम लोगों के लिए सुविधा बन रहा है, लेकिन पुलिस के लिए चुनौती भी। हाल के दिनों में एक नई और चिंताजनक समस्या सामने आ रही है। अपराधी, विशेषकर तस्कर, 8 लेन एक्सप्रेस-वे का इस्तेमाल करते हुए अपने अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। यह समस्या न केवल स्थानीय पुलिस के लिए चुनौती बन गई है, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। तेज गति और सीमित चैकिंग तस्करों के लिए भागने को सुरक्षित विकल्प दे रहे हैं।
दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस वे मध्यप्रदेश में करीब 244 किमी में फैला हुआ है। राजस्थान के झालावाड़ से मंदसौर के समीप गरोठ एंट्री पोइंट से रतलाम होता हुआ झाबुआ जिले के थांदला में इंट्री पोइंट से गुजरात जा रहा है। रतलाम जिले में धामनोद, नामली और भूतेड़ा के समीप एंट्री-एक्जिट पोइंट हैं। रतलाम जिले में मादक पदार्थों, अवैध हथियारों, अवैध शराब और अन्य तस्करी की गतिविधियां होती रहती हैँ।
जिले के जावरा क्षेत्र समेत पड़ोसी जिले मंदसौर, नीमच में अफीम की खेती और डोडाचुरा का परिवहन बड़ा कारण है ही। इसके साथ ही राजस्थान और गुजरात से जुड़ाव और दिल्ली-मुंबई तक पंहुच। सभी रतलाम को आम लोगों के साथ ही अपराधियों के लिए भी उपयुक्त बनाते हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में पुलिस ने कई ऐसे मामले दर्ज किए हैं, जहां तस्करों ने तेज गति से एक्सप्रेसवे का उपयोग करते हुए पुलिस की नाकाबंदी को चकमा दिया।
पूर्व एसपी ने लिखा था पत्र
तेजी से बढ़ती इस समस्या को लेकर पूर्व एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को एक पत्र भी लिखा था। इसमें उन्होंने जिले में एक्सप्रेस वे पर इस तरह की गतिविधियां प्रकाश में आने पर करीब 6 पुलिस चौकी खोलने का प्रस्ताव भी दिया था। इसमें बताया गया था कि फिलहाल एक्सप्रेस वे पर सीमित टोल हैं तथा निर्माण पूर्ण न होने के कारण वाहनों की आवाजाही भी कम रहती है। ऐसे में तेज गति से भागते अपराधियों पर रोक लगाने के लिए पुलिस चौकियां खोली जानी चाहिए ताकि शंका होन पर वाहनों को गति अवरोधित करते हुए पकड़ा जा सके।
तस्करों ने बदला पैटर्न
सूत्रों की मानें तो तस्कर अब अधिक संगठित और योजनाबद्ध तरीके से ज्यादा काम कर रहे हैं। एक्सप्रेस- वे की सुविधा का लाभ उठाते हुए, वे सामान को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा रहे हैं। कई तस्कर तो ऐसे वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो दिखने में सामान्य हैं, यहां तक कि कार, जीप में महिलाएं, बच्चे भी बैठे होते हैं। इससे वे यात्रा कर रहे सामान्य परिवार की तरह प्रतीत होते हैं, उन्हें टोल नाके पर या पुलिस को शंका भी नहीं होती।
पुलिस ने कुछ मामलों की तस्दीक में यह भी पाया है कि तस्कर अक्सर रात के समय अपने कार्य को अंजाम देते हैं, जब सड़कों कम भीड़भाड़ वाली होती हैं। इसके अलावा, उन्हें पता है कि एक्सप्रेसवे पर टोल के अलावा चैकिंग नहीं होती इस कारण पुलिस की नाकाबंदी से बचने में आसानी होती है।
पुलिस भी हो रही हाईटैक
बढ़ती समस्या के खिलाफ रतलाम पुलिस ने अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रही है। हाल ही में नवागत एसपी अमित कुमार ने भी मीडिया से चर्चा में कहा था कि “हमारी प्राथमिकता है कि हम तस्करी के मामलों पर काबू पाएं। ऐसे में पुलिस अब एक्सप्रेसवे पर निगरानी बढ़ा रही है। मुखबिरों के साथ ही तकनीकी विशेषकर मोबाइल ट्रैकिंग और साइबर की मदद से भी तस्करों के मूवमेंट और रूट को ट्रैक किया जा रहा है। सीसीटीवी कैमरों समेत कई और नई तकनीकी को भी अपनाया जाएगा।
पुलिस के अनुसार पुलिस चौकियां खुलने से अपराधियों को रोकने में बहुत मदद मिलेगी। इसके अलावा भविष्य में एक्सप्रेसवे पर उच्च निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग भी किया जा सकता है। फिलहाल जिले के सभी संबंधित थानों को भी सक्रिय किया गया है वे अपने वाहनों के साथ एक्सप्रेस वे पर भी गश्त और निगरानी रखें।
विशेषज्ञों से ली जा रही राय