रतलाम, 9 अगस्त (खबरबाबा.कॉम)। जिले में राजस्व प्रकरणों के समय-सीमा में निराकरण को लेकर नवागत कलेक्टर अजय कटेसरिया ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर ने न्यायालयीन प्रकरणों में समय पर जांच एवं तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करने तथा प्रकरणों को वर्षों तक लंबित रखने के मामले में तहसीलदार रतलाम शहर कुलभूषण शर्मा और तहसीलदार रतलाम ग्रामीण प्रतिभा भाभर को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए हैं।
मामला 5 वर्ष से अधिक समय से लंबित न्यायालयीन प्रकरणों से जुड़ा है। आयुक्त, उज्जैन संभाग के निर्देशों के पालन में कलेक्टर न्यायालय में चल रहे प्रकरणों में संबंधित भूमियों के वर्तमान उपयोग और मौके की स्थिति का जांच प्रतिवेदन मांगा गया था। इसके लिए दोनों तहसीलदारों के स्तर पर प्रकरण भेजे गए थे और 7 दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन एसडीएम रतलाम ग्रामीण के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
समीक्षा बैठक में सामने आई लापरवाही
6 अगस्त को हुई राजस्व अधिकारियों की बैठक में कलेक्टर न्यायालय में लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई। इस दौरान सामने आया कि रतलाम शहर तहसीलदार के स्तर पर भेजे गए प्रकरण क्रमांक 04, 05, 06, 09, 011, 012, 014, 015 एवं 016/अ-21/2021-22 तथा रतलाम ग्रामीण तहसीलदार के स्तर पर भेजे गए प्रकरण क्रमांक 07, 08 एवं 017/अ-21/2021-22 पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं।
जांच प्रतिवेदन समय पर प्राप्त नहीं होने के कारण इन प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण नहीं हो सका और न्यायालयीन कार्यवाही प्रभावित हुई।
कर्तव्य में लापरवाही मानते हुए नोटिस
कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि सौंपे गए न्यायालयीन दायित्वों के निर्वहन में अपेक्षित तत्परता एवं कर्तव्यनिष्ठा का पालन नहीं किया गया। प्रकरणों का लंबे समय तक लंबित रहना और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई पूरी नहीं करना कार्य के प्रति उदासीनता एवं लापरवाही को दर्शाता है।
नोटिस में इस कृत्य को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3(1)(i), 3(1)(ii) एवं 3(1)(iii) के विपरीत बताते हुए कदाचरण, शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना की श्रेणी में माना गया है।
दो दिन में देना होगा जवाब
दोनों तहसीलदारों को दो दिवस के भीतर विलंब के कारणों सहित अपना स्पष्टीकरण तथा संबंधित मूल प्रकरण कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में स्पष्टीकरण एवं मूल प्रकरण प्रस्तुत नहीं किए जाने अथवा स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर के सख्त रुख से साफ संकेत है कि राजस्व एवं न्यायालयीन प्रकरणों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी को अब गंभीरता से लिया जाएगा।