रतलाम,22सितम्बर(खबरबाबा. कॉम)।पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनुचित रील्स, फोटो-वीडियो और आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। डीजीपी कैलाश मकवाना ने पुलिस बल के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद वर्दी में अथवा अशोभनीय वेशभूषा में रील, फोटो, वीडियो या ऑडियो क्लिप अपलोड करने पर रोक लगाई गई है।
रतलाम एसपी अमित कुमार ने कहा कि सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर जो निर्देश जारी किए गए हैं, उनका विभाग में पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जाएगा। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी इन निर्देशों का उल्लंघन करते हुए सोशल मीडिया पर अनुचित या प्रतिबंधित सामग्री पोस्ट करता पाया गया तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शासकीय दस्तावेज सोशल मीडिया और AI टूल्स पर भी नहीं होंगे अपलोड
जारी निर्देशों में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को शासकीय दस्तावेजों को स्कैन कर, स्क्रीनशॉट लेकर अथवा किसी अन्य माध्यम से सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसी जानकारी जिसे शासकीय नियमों के तहत गोपनीय रखना आवश्यक है या जो सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील है, उसे सार्वजनिक करना प्रतिबंधित रहेगा।खास तौर पर ऐसे दस्तावेजों को ChatGPT, Gemini अथवा अन्य AI टूल्स पर भी अपलोड नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
संवेदनशील ड्यूटी और लोकेशन की जानकारी साझा करने पर रोक
संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अपने दायित्व, कार्य की प्रकृति और कार्यस्थल से संबंधित जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं कर सकेंगे। संवेदनशील स्थानों पर ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के इस्तेमाल में लोकेशन और जियो टैगिंग जैसे विकल्प बंद रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पेड प्रमोशन और सोशल मीडिया से कमाई पर भी प्रतिबंध
पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शासन की पूर्व अनुमति के बिना अपने नाम, आश्रितों या परिजनों के नाम अथवा छद्म नाम से सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर पेड प्रमोशन या अकाउंट मॉनेटाइज नहीं करा सकेंगे। व्यक्तिगत व्यवसाय, कंपनी, उत्पाद या सेवा के प्रचार-प्रसार के लिए भी शासकीय अथवा व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा।
निर्देशों के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिकारी-कर्मचारी या उनके आश्रितों अथवा परिजनों के बैंक खातों में किसी भी प्रकार की आय प्राप्त हुई है तो उसका पूरा विवरण निर्देश जारी होने की तारीख से 30 दिन के भीतर विभाग को देना होगा।
आपत्तिजनक और भेदभाव वाली पोस्ट पर प्रतिक्रिया भी नहीं
दुर्भावनापूर्ण, भेदवाव, किसी वर्ग के प्रति पक्षपात प्रदर्शित करने वाली फोटो, टिप्पणी या AI से तैयार अथवा अन्य किसी माध्यम से निर्मित सामग्री पोस्ट करने पर भी रोक लगाई गई है। ऐसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने से भी पुलिसकर्मियों को बचने के निर्देश दिए गए हैं।
वीआईपी सुरक्षा में सेल्फी और संवेदनशील फोटो पर रोक
विशिष्ट और अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को महत्वपूर्ण स्थलों के फोटो, सेल्फी अथवा सुरक्षा से जुड़े किसी भी ब्यौरे को सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
हथियारों के प्रशिक्षण, ड्रिल, चांदमारी, दबिश और अन्य संवेदनशील पुलिस कार्रवाई के फोटो या वीडियो पोस्ट करना अथवा उन्हें लाइव करना भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
जांच और विवेचना से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी
शिकायत, जांच, विवेचना और जनसुनवाई के दौरान पीड़ित, साक्षी, आवेदक, अनावेदक या आरोपी के फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट या लाइव करने पर रोक लगाई गई है। आवश्यक परिस्थितियों में अनुमति के बाद और चेहरे ब्लर करने के बाद ही ऐसी सामग्री साझा की जा सकेगी।
इसी तरह किसी ऐसे अपराध से जुड़ी जानकारी, जिसकी विवेचना चल रही हो या मामला न्यायालय में लंबित हो, सोशल मीडिया पर इस तरह साझा नहीं की जाएगी जिससे विवेचना अथवा अभियोजन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता हो।
पुलिस की उपलब्धि को व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाएगा
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विभाग की उपलब्धियों को पुलिस बल की सामूहिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जाए। किसी एक अधिकारी के व्यक्तिगत प्रयास या उपलब्धि के रूप में विभागीय उपलब्धियों को प्रचारित करने से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही सोशल मीडिया समूहों में त्रुटिपूर्ण, अनधिकृत अथवा अपुष्ट तथ्यों के आधार पर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं देने को भी कहा गया है।
पुलिस मुख्यालय के इन निर्देशों के बाद अब रतलाम जिले में भी एसपी ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर निगरानी और अनुशासन को लेकर सख्ती के संकेत दिए है।