रतलाम, 24 सितम्बर (खबरबाबा.कॉम)। बिरमावल गांव में 30 वर्षीय युवक की जहरीला पदार्थ खाने से मौत के बाद गुरुवार को परिजनों और ग्रामीणों ने इंदौर-रतलाम फोरलेन के सातरुंडा चौराहे पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। परिजनों ने जमीन के नामांतरण में देरी के लिए राजस्व विभाग को जिम्मेदार बताते हुए कार्रवाई की मांग की। जाम के कारण फोरलेन के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। बाद में एसडीएम आर्ची हरित के 10 दिन में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराने के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया। इसके बाद शव को बिरमावल ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।
जानकारी के अनुसार बिरमावल निवासी नरेंद्र पिता श्यामस्वरूप गर्ग ने मंगलवार को जहरीला पदार्थ खा लिया था। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे रतलाम मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। बुधवार को वहां से उसे अन्यत्र रेफर किया गया, जिसके बाद परिजन उसे उज्जैन जिले के बड़नगर स्थित निजी अस्पताल लेकर गए। गुरुवार सुबह उपचार के दौरान नरेंद्र की मौत हो गई। उसने जहरीला पदार्थ किन परिस्थितियों में खाया, इसका स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है।
जमीन के नामांतरण को लेकर लंबे समय से थी परेशानी
परिजनों के अनुसार नरेंद्र के पिता तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। तीनों के पास करीब 12 से 13 बीघा पुश्तैनी जमीन थी, जिसका बंटवारा हो चुका था। हालांकि, जमीन के खाता-खसरा रिकॉर्ड में नरेंद्र का नाम अपडेट नहीं हुआ था।
परिजनों का कहना है कि नरेंद्र पिछले करीब 10 वर्षों से जमीन अपने नाम कराने के लिए प्रयास कर रहा था। इसके लिए उसने रतलाम कलेक्टर कार्यालय सहित विभिन्न स्तरों पर आवेदन दिए थे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसी मामले को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
गांव में विरोध के बाद फोरलेन पर पहुंचे
नरेंद्र की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण पहले बिरमावल के मुख्य मार्ग पर शव रखकर विरोध करने लगे। जब मौके पर अधिकारी नहीं पहुंचे तो वे शव लेकर इंदौर-रतलाम फोरलेन के सातरुंडा चौराहे पर पहुंच गए और सड़क पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया।
सूचना मिलने पर एसडीओपी किशोर पाटनवाला मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। इसके बाद नायब तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे। बाद में एसडीएम रतलाम ग्रामीण आर्ची हरित मौके पर पहुंचीं और परिजनों से चर्चा की।
10 दिन में नामांतरण का आश्वासन
एसडीएम ने परिजनों को आश्वासन दिया कि नामांतरण की प्रक्रिया 10 दिन में पूरी कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद परिजन और ग्रामीण चक्काजाम समाप्त करने पर सहमत हुए। जाम खुलने के बाद फोरलेन पर यातायात सामान्य हुआ और शव को बिरमावल ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।
एसडीएम ने कहा—चार साल पहले आवेदन दस्तावेजों के अभाव में खारिज हुआ था
एसडीएम आर्ची हरित ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले दस्तावेजों के अभाव में नामांतरण का आवेदन खारिज हुआ था। इसके बाद नामांतरण के लिए कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। गुरुवार को मौके पर परिजनों को पूरे मामले की जानकारी दी गई है। यदि परिजन आवेदन नहीं करते हैं तो राजस्व विभाग के कर्मचारी को भेजकर आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।