रतलाम, 22 अगस्त (खबरबाबा.कॉम)। रतलाम जिले में लंबे समय से अटके वर्ष 1956-57 के भू-अभिलेखों से जुड़े जमीनों के नामांतरण प्रकरणों के निराकरण की दिशा में अब उम्मीद जगी है। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने शनिवार को राजस्व निरीक्षकों और पटवारियों के साथ सीधे बैठक कर न केवल उनकी व्यावहारिक समस्याएं सुनीं, बल्कि स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों और पूर्व कलेक्टर राजेश बाथम द्वारा लिखित में जारी आदेश के अनुसार नामांतरण प्रकरणों में कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि संभवतः यह पहला अवसर है, जब जिले के कलेक्टर ने सीमांकन और नामांतरण जैसे सीधे आमजन से जुड़े राजस्व मामलों को लेकर आरआई और पटवारियों से आमने-सामने चर्चा कर मैदानी स्तर की दिक्कतों को समझा। बैठक में सीईओ जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन और अपर कलेक्टर बृजेंद्र रावत भी उपस्थित रहे।
56-57 के रिकॉर्ड से अटके नामांतरण मामलों पर चर्चा
बैठक में आरआई और पटवारियों ने कलेक्टर के सामने वर्ष 1956-57 के भू-अभिलेखों से जुड़े जमीनों के नामांतरण प्रकरणों में आ रही परेशानियों की जानकारी रखी।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में जमीनों के नामांतरण के दौरान वर्ष 1956-57 के भू-अभिलेख को महत्वपूर्ण और अनिवार्य आधार बनाया गया था। पुराने रिकॉर्ड में यदि भूमि शासकीय दर्ज थी, तो बाद के वर्षों में निजी नाम दर्ज होने के बावजूद कई नामांतरण प्रकरण निरस्त कर दिए गए या लंबित रखे गए।
इस स्थिति के कारण जिले के सैकड़ों-हजारों किसान और जमीन मालिक वर्षों से अपनी जमीनों के नामांतरण को लेकर परेशान हैं। मामले के निराकरण के लिए जनप्रतिनिधियों ने भी राजस्व मंत्री से मुलाकात कर लंबित प्रकरणों के सरल समाधान की मांग उठाई थी।
इसके बाद राजस्व विभाग द्वारा कलेक्टर स्तर पर भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। पूर्व कलेक्टर राजेश बाथम ने भी इस संबंध में उच्च स्तर पर मार्गदर्शन मांगा था, जिसके बाद शासन स्तर से नियमानुसार नामांतरण की कार्रवाई करने के निर्देश प्राप्त हुए थे। बावजूद इसके, 56-57 से जुड़े कई प्रकरणों में स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी।
शनिवार की बैठक में कलेक्टर अजय कटेसरिया ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए निर्देश दिए कि शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों और पूर्व कलेक्टर राजेश बाथम द्वारा लिखित में जारी आदेश के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इन निर्देशों के बाद लंबे समय से अटके 56-57 से जुड़े नामांतरण प्रकरणों के निराकरण का रास्ता खुलने की उम्मीद है।
सीमांकन की धीमी गति पर भी सख्ती, प्रतिदिन औसतन दो सीमांकन के निर्देश
बैठक में सीमांकन, नामांतरण और अतिक्रमण से जुड़े प्रकरणों की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सीमांकन कार्य की धीमी प्रगति के कारणों की जानकारी ली और निर्देश दिए कि प्रतिदिन औसतन दो सीमांकन किए जाएं।
उन्होंने कहा कि सीमांकन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए एक एसओपी तैयार की जाएगी, ताकि कार्यप्रणाली में एकरूपता लाई जा सके और अनावश्यक विवादों की स्थिति से बचा जा सके।
कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि सीमांकन से पहले संबंधित भूमि के पूर्व सीमांकन से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि पूर्व में सीमांकन कब हुआ था और वास्तव में सीमांकन की कार्रवाई हुई भी थी या नहीं। साथ ही फील्ड बुक समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
नई रोवर मशीन खरीदी जाएगी
कलेक्टर ने सीमांकन के दौरान पजेशन में होने वाले बदलाव और उससे संबंधित प्रक्रिया की भी जानकारी ली। राजस्व कार्यों में तकनीक के अधिक उपयोग पर जोर देते हुए उन्होंने जिले के लिए अतिरिक्त रोवर मशीन खरीदने के निर्देश दिए।
अपर कलेक्टर को इसके लिए टेंडर सहित आवश्यक आगामी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि अतिरिक्त रोवर मशीन उपलब्ध होने से तकनीकी आधार पर होने वाले सीमांकन कार्यों में तेजी आएगी।
नामांतरण की अन्य समस्याओं पर भी मांगे सुझाव
बैठक में विवादित और अविवादित नामांतरण प्रकरणों के साथ-साथ नामांतरण प्रक्रिया में आने वाली अन्य व्यावहारिक समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर ने पटवारियों और आरआई से सीधे पूछा कि मैदानी स्तर पर उन्हें किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और उनका व्यावहारिक समाधान किस प्रकार किया जा सकता है।
नगर निगम क्षेत्र में राजस्व कार्यों की उपलब्ध संभावनाओं और कार्यक्षेत्र को अधिक प्रभावी बनाने को लेकर भी अधिकारियों से सुझाव लिए गए।कलेक्टर अजय कटेसरिया ने स्पष्ट किया कि राजस्व व्यवस्था में सुधार का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
बैठक की बड़ी बात
56-57 के भू-अभिलेखों को लेकर वर्षों से उलझे नामांतरण मामलों पर कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि शासन और पूर्व में जारी आदेशों के अनुसार लंबित प्रकरणों में कार्रवाई होती है, तो रतलाम जिले के बड़ी संख्या में किसानों और जमीन मालिकों को राहत मिल सकती है।