पेरिस: डायट में फैट की मात्रा घटाने के निर्देशों का भी भले ही काफी प्रचार किया जा रहा हो लेकिन ये निर्देश निम्न और कम आय वाले देशों में लोगों के लिए सही नहीं हो सकते हैं क्योंकि उनकी डायट में पहले से ही स्टार्च की मात्रा काफी रही है. हाल ही में की गई एक रिसर्च के दौरान शोधकर्ताओं ने यह बात कही है.
यूरोप और उत्तरी अमेरिका के स्वास्थ्य अधिकारियों ने वसायुक्त आहार कम लेने और अधिक फल और सब्जियां खाने की सिफारिश की है. संयुक्त राष्ट्र और पूरी दुनिया ने यह सलाह मान ली है.
क्यों गरीब देशों में लोगों के लिए जरूरी है फैट युक्त आहार-
शोधकर्ताओं ने कहा कि लेकिन गरीब देशों में यदि लोग वसा लेना कम करते हैं तो वे आलू, चावल, रोटी जैसे काबोहाइड्रेट ज्यादा खाने लगेंगे, क्योंकि वहां फल और सब्जियां ज्यादा महंगी हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
कनाडा के ओटारिया के मैकमास्टर विश्वविद्यालय के शोधकर्ता और द लांसेट पत्रिका में प्रकाशित लेख के लेखक मशिद डेहगन ने कहा कि निम्न वसा वाले आहार पर जोर देने की वर्तमान व्यवस्था इस तथ्य की अनदेखी करती है कि निम्न और मध्य आय वाले देशों में ज्यादातर आहारों में कार्बोहाइड्रेट बहुत अधिक होता है जिसका खराब स्वास्थ्य परिणामों से संबंध जान पड़ता है.
नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.
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