रतलाम,14मई(खबरबाबा.काम)। कांग्रेस के एआईसीसी सदस्य एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष डीपी धाकड़ को हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। धाकड़ को उनके भाई के साथ धोखाधड़ी के प्रकरण में 30 मार्च को दस साल की सजा सुनाई गई थी , इसके बाद से वे जेल में थे। सोमवार को हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर की मंगलवार को जिला न्यायालय में जमानत की कार्रवाई पूरी की गई।
हाईकोर्ट ने डीपी के वकील अजय बागड़िया के तर्क जिसमें अपील जल्द सुनवाई की संभावना नहीं होने और निचली अदालत द्वारा दी गई सजा में कई तकनीकी पहलु होने की बात को स्वीकारते हुए न्यायधीश प्रकाश श्रीवास्तव ने जमानत याचिका मंजूर की है। मामले में सुनवाई जारी रहेगी।
डीपी धाकड़ के वकील अजय बागड़िया ने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट के सामने जमानत याचिका प्रस्तुत की थी। इसमें अपील की गई थी कि इस मामले में मुख्य आरोप सहायक अभियुक्त जयप्रकाश पर है। ट्रैक्टर को भी सह अभियुक्त जयप्रकाश से जब्त किया गया। जिन दस्तावेजों पर विश्वास किया गया है उनमें भी जयप्रकाश का नाम है। अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया है कि मामला सिविल प्रकरण का है। इस संबंध में बयानों का हवाला दिया गया कि फोरलेन कंपनी के किसी भी अधिकारी को अपीलकर्ता डीपी धाकड़ और फोरलेन के बीच किसी भी लेनदेन को साबित करने के लिए जांच नहीं की गई है। एफआईआर दर्ज करने में लगभग दो साल की देरी है जिसे समझाया नहीं गया है। इसलिए, अपीलकर्ता को कथित अपराध से जोड़ने के लिए कोई सामग्री नहीं है।
एडवोकेट बागडिया ने बताया कि धाकड़ के किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नही है, न उनके पास से ट्रेक्टर बरामद किया गया। मधुकर यार्दे ने 2008 के मामले में दो साल बाद जिस फोटोकॉपी के आधार पर एफआईआर की गई उसकी सत्यता की कभी जांच नही हुई, मुल दस्तावेज कभी सामने ही नही आया । इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जमानत की मांग की गई थी। इस पर न्यायालय ने सजा के निलंबन के लिए प्रार्थना अनुमति पर जमानत मंजूर कर ली है। अपील पर फाइनल सुनवाई तक उन्हे जमानत दी गई है।
क्या है मामला
मामले की शिकायत करने वाले डॉ.मधुकर यार्दे कि रतलाम महापौर डॉ सुनीता यार्दे के ससुर है। शिकायत के अनुसार डीपी धाकड़ 2010 में डॉ.मधुकर यार्दे के क्लिनीक में काम करते थे। उसी दौरान उसने डॉ,मधुकर यार्दे की मालिकीयत का एक ट्रैक्टर किराये से चलाने के लिए लिया था। किराये से लिए गए इस ट्रैक्टर को डीपी धाकड व उसके भाई जयप्रकाश धाकड ने लेबड नयागांव फोरलेन कंपनी को डॉ.मधुकर यार्दे के फर्जी हस्ताक्षर करके बेच दिया था। कांग्रेस नेता डीपी धाकड ने डॉ.यार्दे से किराये पर लिए ट्रैक्टर का किराया लंबे समय तक अदा नहीं किया। किराया अदा नहीं करने पर डॉ.मधुकर यार्दे ने अपने लडके अजय को डीपी धाकड से बात करने भेजा। जब अजय ने पता किया तो उसे मालूम चला कि डीपी धाकड और उसके भाई ने डॉ.मधुकर यार्दे के फर्जी हस्ताक्षरों से अपने पक्ष में एक फर्जी बेचान नामा तैयार किया और इस बेचाननामें के आधार पर उक्त ट्रेक्टर फोरलेन कपंनी में किराये से लगा दिया। आरोपियों ने फोरलेन कंपनी से ट्रैक्टर के किराये के रुप में दो लाख सैतीस हजार रु.भी प्राप्त कर लिए। बाद में डॉ.मधुकर यार्दे ने इस धोखाधडी की शिकायत पुलिस को की और पुलिस ने जांच के बाद दोनो आरोपियों के विरुध्द न्यायालय में चालान पेश किया। 30 मार्च 2019 को न्यायाधीश विवेक कुमार श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई के बाद दुर्गाप्रसाद धाकड व उसके भाई जयप्रकाश को धोखाधडी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के मामले में धारा 420 भादवि में 7-7 वर्ष कठोर कारावास व एक एक हजार रु.जुमार्ना,कूटरचित दस्तावेज के लिए धारा 467 भादवि में 10-10 वर्ष कठोर कारावास व दस-दस हजार रु.जुमार्ना,इसी प्रकार धारा 468 में सात-सात वर्ष कारावास व एक-एक हजार जुमार्ना और धारा 471 में दस-दस वर्ष कारावास व दस दस हजार रु.जुमार्ने की सजा सुनाई थी ।
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