रतलाम,22अक्टूबर(खबरबाबा.काम)। दीपावली पर अपनी बहुमूल्य सजावट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुके माणकचौक स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में इस बार भी कुबेर का खजाना सज गया है। धनतेरस से मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर को हीरे- जवाहरात और नोटों से सजाया गया है।
प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर यहां श्रद्धालुओं द्वारा मां लक्ष्मी के दरबार में सजाए जाने वाली करोड़ों रुपए की दौलत के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां रतलाम जिले ही नहीं राजस्थान ,महाराष्ट्र और गुजरात से श्रद्धालु अपने धन और दौलत महालक्ष्मी के दरबार में सजाने के लिए भेजते हैं। जिसमें नगद नोटों की गड्डीयों से लेकर हीरे और बेशकीमती जवाहरात शामिल होते हैं। भक्तों की मान्यता है कि मां लक्ष्मी के दरबार में 5 दिनों तक अपनी दौलत सजाने से उसमें महालक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
आम जनता के लिए महालक्ष्मी के दर्शन की व्यवस्था पूर्व के वर्षों की तरह की गई है। जिसके लिए धनतेरस की सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई है।
प्रसिद्ध माता लक्ष्मी का यह मंदिर रियासत काल से ही स्थापित है। दीपावली के अवसर पर धनतेरस के दिन के महाराजा रतन सिंह राठौर के द्वारा माता के दरबार में शाही खजाने से सोने- चांदी और आभूषण माता के श्रंगार के लिए चढ़ाए जाते थे। जिसके बाद से यह महालक्ष्मी मंदिर की परंपरा बन गई। जहां लोग अपनी धन और दौलत माता लक्ष्मी के मंदिर में श्रृंगार के लिए चढ़ाते हैं।
मान्यता है कि माता के दरबार में चढ़ाई हुई दौलत में बरकत मिलती है । श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में चढ़ाई गई धन और दौलत दीपावली के पश्चात उन्हें वापस कर दी जाती है। रतलाम के माणक चौक स्थित महालक्ष्मी माता मंदिर में मां महालक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और मां सरस्वती भी विराजित है यानी रिद्धि सिद्धि, संपन्नता और विद्या एक साथ । दीपोत्सव पर सजने वाले कुबेर के खजाने को देखने के लिए शहर सहित अन्य स्थानों सभी श्रद्धालु आते हैं।
