रतलाम,30सितम्बर(खबरबाबा. कॉम)। प्रशासनिक रिकॉर्ड में हुई एक कथित गड़बड़ी किस तरह किसी जरूरतमंद की जिंदगी की रफ्तार रोक सकती है, इसका मामला राजीव नगर (दिलीप नगर) निवासी दिव्यांग संजय पिता शांतिलाल के रूप में सामने आया है। मुख्यमंत्री नगरीय भू-अधिकार योजना के तहत वर्ष 2022 में मिले स्थायी पट्टे के सर्वे नंबर, खसरा क्रमांक और चतुर्सीमा को लेकर पिछले करीब पांच महीनों से वह कलेक्ट्रेट और राजस्व कार्यालयों के चक्कर काट रहा है। लेकिन अब तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
संजय का आरोप है कि पट्टे में दर्ज सर्वे नंबर, खसरा क्रमांक और चतुर्सीमा मौके की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती। रिकॉर्ड दुरुस्त कराने और जमीन का सीमांकन कराने के लिए आवेदन देने के बाद भी उसे समाधान नहीं मिला। उलटे, राजस्व अमले की ओर से यह कहा गया कि उसका मकान सड़क के दायरे में आ रहा है। संजय का कहना है कि उसका मकान सड़क से करीब 100 फीट दूर है।
रिकॉर्ड की गड़बड़ी का खामियाजा, आवास योजना का लाभ भी अटका
मामला सिर्फ पट्टे के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। सर्वे नंबर और सीमांकन स्पष्ट नहीं होने के कारण संजय का प्रधानमंत्री आवास योजना का आवेदन भी निरस्त हो चुका है। यानी जिस आवासीय अधिकार के दस्तावेज के आधार पर वह अपने परिवार के लिए पक्का मकान बनवाने की उम्मीद कर रहा था, वही दस्तावेज अब उसके लिए सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं।
सवाल यह है कि यदि पट्टे में दर्ज विवरण वास्तविक मौके से मेल नहीं खाता, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? और यदि मौके की स्थिति को लेकर विवाद है तो पांच महीने में सीमांकन और रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा सकी?
हादसे ने छीना चलने का अधिकार, अब दफ्तरों के चक्कर बनी मजबूरी
संजय की परेशानी केवल सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। 25 मार्च 2022 को प्रताप नगर क्षेत्र में एक लोडिंग पिकअप वाहन ने उसे टक्कर मार दी थी। हादसे में उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह पैरालिसिस हो गया।
वर्तमान में उसकी दो छोटी बेटियां हैं। शारीरिक स्थिति के कारण वह बेडसोर की समस्या से भी जूझ रहा है और शौचालय जाने तक में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना अपने आप में किसी परीक्षा से कम नहीं है।
आवास की जरूरत सबसे ज्यादा, लेकिन कागजी उलझन ने रोक दिया रास्ता
संजय मुख्यमंत्री आवास योजना के माध्यम से अपने परिवार के लिए मकान बनवाना चाहता है। उसका कहना है कि यदि पट्टे का सही सर्वे नंबर दर्ज कर दिया जाए और सीमांकन स्पष्ट कर दिया जाए तो वह आवास निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
लेकिन राजस्व रिकॉर्ड की कथित त्रुटि के कारण उसका आवास का रास्ता ही बंद हो गया है। वह अब प्रशासन से दो टूक मांग कर रहा है।या तो उसके स्थायी पट्टे का सही सर्वे नंबर और सीमांकन तत्काल दुरुस्त कराया जाए अथवा उसे किसी दूसरे उपयुक्त स्थान पर पट्टा दिया जाए, ताकि वह अपने परिवार के लिए आवास बना सके।
राजस्व अमले की कार्यशैली पर बड़ा सवाल
यह मामला केवल एक दिव्यांग व्यक्ति की व्यक्तिगत परेशानी नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड के रखरखाव और शिकायतों के निराकरण की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करता है। यदि पट्टा वर्ष 2022 में जारी हुआ था और वर्षों बाद उसके विवरण पर सवाल सामने आया, तो रिकॉर्ड तैयार करने और मौके की स्थिति का मिलान किस स्तर पर हुआ था?और जब संजय ने करीब पांच महीने पहले इस विसंगति की शिकायत की, तो अब तक मौके का स्पष्ट सीमांकन कर वास्तविक स्थिति सामने क्यों नहीं लाई गई?
एक दिव्यांग व्यक्ति को अपनी जमीन के रिकॉर्ड की एक त्रुटि सुधारने के लिए महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाना पड़े और इसी बीच उसका आवास योजना का लाभ भी रुक जाए, तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता और राजस्व व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
संजय मंगलवार को एक बार फिर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। उसकी मांग बड़ी नहीं है।वह सिर्फ अपने पट्टे के वास्तविक रिकॉर्ड को सही करवाना चाहता है, ताकि सरकारी योजना का लाभ लेकर अपने परिवार के लिए एक सुरक्षित छत बना सके।