रतलाम,19जून(खबरबाबा. कॉम)। साफ, बादल रहित आसमान आम लोगो की चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है। इस वर्ष का मानसून वर्तमान स्थिति के हिसाब से सामान्य से लंबा खिंचता दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के संकेतों और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा आकलन से स्पष्ट है कि मानसून की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो रही है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे प्रशांत महासागर में विकसित हो रही एल नीनो की परिस्थितियां, पश्चिमी विक्षोभों का प्रभाव तथा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में पर्याप्त मजबूत मौसमी तंत्रों का अभाव प्रमुख कारण बन रहे हैं।
क्या है एल नीनो और क्यों बढ़ी चिंता?
सामान्य परिस्थितियों में पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली व्यापारिक हवाएं भारतीय मानसून को ऊर्जा प्रदान करती हैं, लेकिन एल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। परिणामस्वरूप वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है और भारत में मानसूनी वर्षा सामान्य से कम या असमान हो सकती है।
मौसम वैज्ञानिक एल नीनो के बारे में बताते है कि प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाने के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। परिणामस्वरूप वैश्विक मौसम चक्र प्रभावित होता है और भारत में मानसूनी वर्षा सामान्य से कम या असमान हो सकती है। इसे अल नीनो कहा जाता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार एल नीनो की स्थिति जितनी मजबूत होती है, मानसून पर उसका प्रभाव उतना ही अधिक पड़ता है। हालांकि यह कोई अटल नियम नहीं है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दबाव क्षेत्र, अरब सागर की गतिविधियां और हिंद महासागर की परिस्थितियां भी मानसून को प्रभावित करती हैं।
मौसम विभाग भोपाल के विशेषज्ञ एच. एस पाण्डेय के हिसाब से अगले कुछ दिनों में मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदलने और वर्षा गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। विभाग ने गरज-चमक, तेज हवाओं तथा वर्षा की गतिविधियों का संकेत दिया है, जिससे मानसून की आगे की प्रगति को बल मिल सकता है।
हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर IMD ने जून से सितंबर के मानसून सीजन में देश में औसत से कम वर्षा का अनुमान व्यक्त किया है। विभाग के दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार वर्ष 2026 में मानसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो सामान्य से कम वर्षा की श्रेणी में आती है।
मौसम विभाग भोपाल के विशेषज्ञ HS Pandey का कहना है कि इस वर्ष एल नीनो धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। इसके और सशक्त होने की संभावना बनी हुई है। यही कारण है कि मानसून की प्रगति और वर्षा के वितरण पर विभाग लगातार निगरानी रख रहा है। उन्होंने कहा की मध्यप्रदेश के संदर्भ में स्थिति बड़ी महत्वपूर्ण है। क्योंकि प्रदेश का बड़ा हिस्सा खरीफ कृषि पर निर्भर है। मानसून जून के तीसरे और चौथे सप्ताह में प्रदेश के अधिकांश भागों में सक्रिय हो सकता है। यह सामान्य तिथि से लगभग एक सप्ताह देरी की बताई जा रही है।
मालवा-निमाड़ क्षेत्र, जिसमें रतलाम, मंदसौर, नीमच, उज्जैन और इंदौर शामिल हैं, के किसानों की नजर अब जून के अंतिम सप्ताह पर टिकी हुई है। यदि इस अवधि में बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में प्रभावी निम्न दबाव क्षेत्र विकसित होते हैं तो मानसून तेजी से सक्रिय हो सकता है। अन्यथा जुलाई के प्रारंभ तक वर्षा की कमी बोवनी को प्रभावित कर सकती है।
क्या है सबसे बड़ा संकेत?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार चिंता केवल मानसून के आगमन की नहीं, बल्कि उसके बाद की निरंतरता की है। यदि जुलाई में अच्छी वर्षा हो गई तो जून की देरी की भरपाई संभव है, लेकिन एल नीनो के प्रभाव के चलते जुलाई-अगस्त में भी लंबी “ब्रेक मानसून” अवधि बनी तो कृषि, जलाशयों के भराव और पेयजल उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
मध्यप्रदेश में मानसून आएगा, लेकिन उसकी चाल फिलहाल सुस्त है। मौसम विभाग भोपाल अगले कुछ दिनों में परिस्थितियों के अनुकूल होने की उम्मीद जता रहा है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर एल नीनो का बढ़ता प्रभाव पूरे मानसून सीजन पर नजर रखने की चेतावनी दे रहा है। फिलहाल मालवा के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय 20 जून से 30 जून के बीच का माना जा रहा है। यदि इस अवधि में प्रभावी वर्षा होती है तो खरीफ सीजन की शुरुआत सामान्य हो सकती है, अन्यथा किसानों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।