रतलाम,16जुलाई(खबरबाबा. कॉम)।शहर में गंदे नाले के पानी से सब्जियां धोकर बेचने का वीडियो वायरल होने के बाद जिस व्यक्ति को लोग एक सामान्य सब्जी विक्रेता समझ रहे थे, उसकी असल पहचान सामने आते ही मामला और गंभीर हो गया। जांच में खुलासा हुआ कि सब्जी बेचने वाला व्यक्ति वाणिज्यिक कर विभाग में अपर डिवीजन क्लर्क (यूडीसी) के पद पर पदस्थ सरकारी कर्मचारी है। उसकी पहचान सरदार झोडिया के रूप में हुई है। मामले के सामने आने के बाद विभाग ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
वीडियो वायरल होने के बाद खुला राज
सोमवार को डॉट की पुल क्षेत्र में एक सब्जी विक्रेता को नाले के गंदे और दूषित पानी से सब्जियां धोते हुए स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ पर नाराजगी जताई। मामले की पड़ताल की गई तो पता चला कि संबंधित व्यक्ति कोई सामान्य दुकानदार नहीं, बल्कि सरकारी विभाग का कर्मचारी है।
कार्यालयीन समय में सब्जी बेचने का आरोप
जानकारी के अनुसार, सरदार झोडिया मूल रूप से नीमच जिले के नयागांव का निवासी है और लंबे समय से रतलाम स्थित वाणिज्यिक कर विभाग में पदस्थ है। आरोप है कि वह कई बार कार्यालयीन समय में विभाग से अनुपस्थित रहकर डॉट की पुल क्षेत्र में सब्जी बेचने का काम करता था। हालांकि इसकी जानकारी विभाग को पहले नहीं थी। वीडियो वायरल होने के बाद उसकी गतिविधियां उजागर हुईं। बताया जा रहा है कि घटना के बाद से वह अपनी सब्जी की दुकान पर भी नजर नहीं आया है।
विभाग ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
मामले के सार्वजनिक होने के बाद वाणिज्यिक कर विभाग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हालांकि विभागीय रिकॉर्ड और उपस्थिति रजिस्टर में सरदार झोडिया के पदस्थ होने की पुष्टि हुई है।
पहले भी मिल चुकी है चार्जशीट
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, सरदार झोडिया का रिकॉर्ड पहले भी विवादों में रहा है। कार्य में लापरवाही और अनियमितताओं के कारण उसे पूर्व में भी चार्जशीट (आरोप पत्र)जारी किया जा चुका है। ऐसे में अब जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मामले और ड्यूटी के दौरान अनुपस्थित रहने के आरोपों के बाद उसके खिलाफ विभाग क्या कड़ी कार्रवाई करता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर सवाल
गंदे नाले के पानी से सब्जियां धोकर बेचना न केवल खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। वहीं, यदि सरकारी कर्मचारी कार्यालयीन समय में निजी व्यवसाय करता पाया जाता है, तो यह सेवा नियमों के उल्लंघन का भी मामला बनता है। ऐसे में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी अहम मानी जा रही है।