रतलाम, 14 सितंबर (खबरबाबा.कॉम)। रतलाम शहर के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। संभवत: रतलाम में पहली बार जिला कलेक्टर द्वारा एसडीएम के अलावा अलग से सिटी मजिस्ट्रेट की व्यवस्था लागू की गई है। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों का नया बंटवारा करते हुए डिप्टी कलेक्टर संजय शर्मा को सिटी मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी सौंपी है।
अब तक शहर एसडीएम तरुण जैन के पास राजस्व, प्रशासन और कानून-व्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां थीं। नई व्यवस्था के बाद तरुण जैन का मुख्य फोकस राजस्व और विकास संबंधी कार्यों पर रहेगा। वहीं शहर की कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों से जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए अलग से सिटी मजिस्ट्रेट की व्यवस्था की गई है।
शहर की व्यवस्था संभालेंगे सिटी मजिस्ट्रेट संजय शर्मा
डिप्टी कलेक्टर संजय शर्मा सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में शहरी सीमा में कानून-व्यवस्था, धरना-प्रदर्शन, जुलूस, त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासनिक व्यवस्थाएं संभालेंगे। वीआईपी मूवमेंट और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर वे पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय कर व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।रविवार को संजय शर्मा ने सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में पुलिस अधिकारियों के साथ शहर का दौरा भी किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
तहसील में एसडीएम कार्यालय, कलेक्टोरेट में बैठेंगे सिटी मजिस्ट्रेट
नई प्रशासनिक व्यवस्था के तहत एसडीएम कार्यालय को भी तहसील परिसर में शिफ्ट किया गया है। वहीं सिटी मजिस्ट्रेट कलेक्टोरेट से जिम्मेदारियों का संचालन करेंगे।
आरडीए को लेकर विशेष प्रयास
कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम तरुण जैन अब मुख्य रूप से राजस्व मामलों और विकास कार्यों पर फोकस करेंगे। उनके पास रतलाम विकास प्राधिकरण के सीईओ का महत्वपूर्ण प्रभार भी है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार कलेक्टर अजय कटेसरिया द्वारा रतलाम विकास प्राधिकरण को फिर से सक्रिय और प्रभावी बनाने के लिए कुछ विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
हालांकि इन प्रयासों की सटीक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जरूर है कि आने वाले दिनों में रतलाम विकास प्राधिकरण के माध्यम से शहर के विकास को लेकर कोई बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।
क्या है एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट में अंतर?
एसडीएम अपने पूरे अनुविभाग का प्रशासनिक प्रमुख होता है और उसके कार्यक्षेत्र में कई तहसीलें एवं ग्रामीण क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। एसडीएम के पास राजस्व मामलों, भूमि विवादों और अपने अनुविभाग की कानून-व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी होती हैं।
वहीं सिटी मजिस्ट्रेट का कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से शहर की नगरीय सीमा तक सीमित रहता है। उनका फोकस शहर में कानून-व्यवस्था, धरना-प्रदर्शन, जुलूस, त्योहार, सार्वजनिक आयोजन और वीआईपी मूवमेंट के दौरान प्रशासनिक समन्वय एवं व्यवस्थाओं पर रहता है।
कुल मिलाकर कलेक्टर अजय कटेसरिया ने जिम्मेदारियों का अलग-अलग बंटवारा कर प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक फोकस्ड और प्रभावी बनाने की कोशिश की है। अब एक अधिकारी का मुख्य फोकस राजस्व और विकास कार्यों पर रहेगा, जबकि सिटी मजिस्ट्रेट शहर की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालेंगे। यह नई व्यवस्था रतलाम में कितनी प्रभावी साबित होती है, यह आने वाले समय में सामने आएगा।