रतलाम, 22 सितंबर (खबरबाबा.कॉम)। राजीव नगर में वर्ष 2022 में हुई राजेश वासन की हत्या के मामले में न्यायालय ने आरोपी जगन्नाथ पिता भूरालाल मोगिया, उम्र 41 वर्ष, निवासी ग्राम धमाना, थाना बदनावर, जिला धार को दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर 5 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।
यह फैसला अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश रतलाम श्री निर्मल मंडोरिया ने 22 सितंबर 2026 को सुनाया। अभियोजन की ओर से मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक गोल्डन राय ने की।
घर में बंधी हालत में मिला था शव
उप-निदेशक अभियोजन श्रीमती आशा शाक्यवार ने बताया कि 13 नवंबर 2022 को फरियादी कृष्ण मोहन शर्मा ने औद्योगिक क्षेत्र थाना रतलाम में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। फरियादी ने बताया था कि उसका साला राजेश वासन राजीव नगर में अकेला रहता था। घटना से करीब दो दिन पहले से वह अपनी मां के घर पीएनटी कॉलोनी नहीं गया था और उसका मोबाइल भी बंद आ रहा था।
इस पर फरियादी राजेश के राजीव नगर स्थित घर पहुंचा। घर का मुख्य गेट खुला था, लेकिन आवाज लगाने पर कोई जवाब नहीं मिला। परिचित शिवनारायण को साथ लेकर जब वह ऊपर कमरे में पहुंचा तो सामान बिखरा हुआ था। तीसरी मंजिल के आखिरी कमरे में राजेश नग्न अवस्था में जमीन पर पड़ा मिला।
राजेश के दोनों पैर प्लास्टिक की पैकिंग रिबन से बंधे थे, जबकि दोनों हाथों और मुंह तथा आंखों पर टेप चिपका हुआ था। नाक से खून निकल रहा था और शरीर पर चोट एवं रगड़ के निशान थे। शरीर के नीचे काफी खून भी पड़ा था। इसके बाद फरियादी ने घटना की जानकारी अपने बेटे तुषार शर्मा और दामाद दीपेश चौपड़ा को दी तथा अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या की आशंका जताई।
सीसीटीवी और वैज्ञानिक साक्ष्यों से जांच आगे बढ़ी
रिपोर्ट के आधार पर औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने धारा 302 भादवि में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। अनुसंधान के दौरान फरियादी और अन्य साक्षियों के बयान दर्ज किए गए।
पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य जुटाए। घटनास्थल से जब्त खून लगे कपड़े, हथियार सहित अन्य सामग्री को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन की सीडीआर, कैफ और लोकेशन सहित अन्य तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए गए।संपूर्ण विवेचना के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।
मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर दोषसिद्धि
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से प्रस्तुत मौखिक साक्ष्य, दस्तावेजी साक्ष्य तथा वैज्ञानिक और चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी जगन्नाथ को हत्या के अपराध में दोषी माना।
न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सश्रम आजीवन कारावास और 5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।अभियोजन के अनुसार यह प्रकरण चिन्हित, जघन्य एवं सनसनीखेज श्रेणी में शामिल था। मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक गोल्डन राय ने की।