नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की तरफ से तीन तलाक को खत्म किए जाने के बाद पीड़ित मुस्लिम महिलाओं की आंखे भर आई. कई पीड़ित महिलाओं ने कोर्ट के इस फैसले पर अपनी खुशी जताई और कहा कि हमारे साथ जो हुआ वो हुआ लेकिन इस फैसले से अब आने वाली पीढ़ी को बड़ी राहत मिली है.
इलाहाबाद की जीनत अली का दर्द
इलाहाबाद की जीनत अली ने कहा, ‘’मेरे पति ने मुझे सड़क पर खड़ा कर दिया. मैंने दर दर की ठोकरे खाई. कई दिनों तक खाना नहीं खाया.’’ उन्होंने बताया कि मेरा बेटा पांच साल का था जब मुझे मेरे पति ने घर से बाहर निकाल दिया था. जीनत ने कहा कि अब समय बदल गया है. आज उन लोगों के मुंह पर तमाचा लगा है जो तीन तलाक को सही ठहरा रहे थे.
हम ही जानते हैं हम पर क्या बीती है- आफरीन रहमान
कोर्ट में याचिका डालने वाली एक पीड़ित मुस्लिम महिला आफरीन रहमान ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर खुशी जताई है. उन्होंने कहा है कि हम ही जानते हैं कि तीन तलाक से हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ा है. इस फैसले से अब आने वाली पीढ़ी की जिंदगी बदल जाएगी.’’ इस दौरान आफऱीन की आंखे नम हो गईं.
फैसले के बाद मुस्लिम महिला बोर्ड की वकील ने एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में कहा, ”इस फैसले का हम स्वागत करते हैं. हमने बहुत लंबी लड़ाई लड़ी है. तलाक-ए-बिद्दत असंवैधानिक करार दिए जाने से मुस्लिम महिलाओं की जीत हुई है.”
आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने कहा, ”हम इस फैसले से बहुत खुश है. सुप्रीम कोर्ट को अब उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई करनी चाहिए जो फतवे जारी कर देते हैं और मनमानी तरीके से महिलाओं को परेशान करते हैं.”
सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है?
तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना एतिहासिक फैसला सुना दिया है. तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों में से तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया है. कोर्ट के इस आदेश से मुस्लिम महिलाओं को बड़ी राहत मिली है. अब दुनिया के कई इस्लामिक देशों की तरह भारत ने भी इसे खत्म कर दिया है. देश में कई ऐसी मुस्लिम महिलाएं हैं जिनकी जिंदगी तीन तलाक ने बर्बाद कर दी थी.
तीन तलाक पर फैसला क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामिक देशों में तीन तलाक खत्म किये जाने का हवाला दिया और पूछा कि स्वतंत्र भारत इससे निजात क्यों नहीं पा सकता.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर छह महीने में कानून नहीं बनाया जाता है तो तीन तलाक पर शीर्ष अदालत का आदेश जारी रहेगा.सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों से अपने मतभेदों को दरकिनार रखने और तीन तलाक के संबंध में कानून बनाने में केन्द्र की मदद करने को कहा.सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई कि केंद्र जो कानून बनाएगा उसमें मुस्लिम संगठनों और शरिया कानून संबंधी चिंताओं का खयाल रखा जाएगा.पांच में से तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक माना है. आज के बाद अगर कोई मुस्लिम पुरूष अपनी पत्नी को तीन तलाक देगा तो उसे अवैध माना जाएगा. सरकार को अब 6 महीनों के अंदर तीन तलाक को लेकर कानून बनाना पड़े।
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