रतलाम, 7 अगस्त (खबरबाबा.कॉम)। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत डोसीगांव स्थित ईडब्ल्यूएस मल्टी के 208 फ्लैट खाली कराने की नगर निगम की कार्रवाई अब राजनीतिक मुद्दा बन गई है। गुरुवार को महापौर प्रहलाद पटेल ने प्रेसवार्ता कर स्पष्ट किया कि फ्लैट खाली कराने की कार्रवाई नगर निगम परिषद का निर्णय नहीं, बल्कि राज्य शासन के निर्देशों के तहत की गई है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे गरीब परिवारों के साथ अन्याय बताते हुए निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
महापौर बोले- हमारा प्रयास आबंटन निरस्त नहीं हो
महापौर प्रहलाद पटेल ने बताया कि वर्ष 2019-20 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित 396 ईडब्ल्यूएस फ्लैटों में शिवशंकर कॉलोनी और प्रकाश नगर के परिवारों का पुनर्वास किया गया था। प्रत्येक हितग्राही से 20 हजार रुपये मार्जिन मनी जमा कराई गई थी। इनमें 166 हितग्राहियों ने बैंक ऋण लिया, 20 ने एकमुश्त राशि जमा कर दी, जबकि 208 हितग्राहियों ने छह वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो बैंक ऋण लिया और न ही निर्धारित राशि जमा की।उन्होंने कहा कि निगम अब भी प्रयास कर रहा है कि इन हितग्राहियों का आवंटन निरस्त न हो और समाधान निकल सके।
छह बार नोटिस, एनपीए बने ऋण और निगम को नुकसान
महापौर ने बताया कि वर्ष 2021 से अब तक संबंधित हितग्राहियों को छह बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिन 166 हितग्राहियों ने बैंक ऋण लिया था, उनमें से अधिकांश ने समय पर किश्तें नहीं भरीं, जिससे उनके खाते एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) हो गए। इसका असर अन्य हितग्राहियों के ऋण स्वीकृत होने पर भी पड़ा और पूरी योजना प्रभावित हुई। पत्रकारों से चर्चा के अवसर पर एमआईसी सदस्य भगत भदोरिया, अक्षय संघवी, पप्पू परोहित, सपना त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
कांग्रेस ने कहा- गरीबों के साथ हुआ अन्याय
इधर पूर्व विधायक पारस सकलेचा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा और मयंक जाट ने संयुक्त रूप से मीडिया से चर्चा कर नगर निगम की कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पुनर्वास के समय गरीब परिवारों से केवल 20 हजार रुपये जमा कराकर बैंक से ऋण दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन 208 परिवारों को ऋण उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका आरोप है कि नगर निगम ने नगर पालिक निगम अधिनियम की धाराओं 173, 174 और 175 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना फ्लैटों पर ताले लगाकर गरीब परिवारों के साथ अमानवीय व्यवहार किया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि हितग्राहियों का सिबिल स्कोर या अन्य तकनीकी कारण ऋण स्वीकृति में बाधा बने थे तो इसकी जिम्मेदारी हितग्राहियों पर नहीं डाली जा सकती। ऐसे मामलों में नगर निगम को वैकल्पिक व्यवस्था कर प्रभावित परिवारों को राहत देनी चाहिए थी।