रतलाम,15मई(खबरबाबा. कॉम)। शहर के 80 फीट रोड स्थित एक निजी प्लाट पर लग रहे सार्वजनिक मेले को लेकर क्षेत्रीय पार्षद निशा पवन सोमानी द्वारा सवाल उठाने के बाद नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। बिना अनुमति मेला संचालन, सुरक्षा व्यवस्थाओं में कमी और निगम नियमों के उल्लंघन के आरोपों के चलते नगर निगम ने मेला संचालक को नोटिस जारी किया है। राजस्व अधिकारी राजेंद्र सिंह पंवार द्वारा जारी नोटिस में 3 दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि 11 मई को जारी नोटिस की समय अवधि पूरी हो गई है, लेकिन अभी तक नगर निगम द्वारा कोई कार्रवाई नजर नहीं आई है।
नगर निगम के अनुसार मेले में इलेक्ट्रिकल झूले, दुकानें, बच्चों के गेम्स सहित कई गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में नागरिक पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद मेला संचालन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं पाए गए।
इन बिंदुओं पर मांगा स्पष्टीकरण
निगम द्वारा जारी नोटिस में मेला संचालक से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। इनमें —
* इलेक्ट्रिकल झूलों की इलेक्ट्रिकल ऑडिट रिपोर्ट
* अग्नि सुरक्षा उपकरणों की जानकारी एवं फायर ऑडिट रिपोर्ट
* मनोरंजन कर जमा करने की स्थिति
* कचरा निष्पादन व्यवस्था
* पार्किंग के कारण बाधित हो रहे यातायात पर स्पष्टीकरण जैसे मुद्दे शामिल हैं।
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित 3 दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि जानकारी के अनुसार नोटिस जारी होने के बाद भी अब तक मेला संचालक की ओर से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
गौरतलब है कि यह मेला पूर्व में भी शहर में आयोजित होता रहा है और हर बार यातायात अव्यवस्था तथा सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के बिना संचालित हो रहा यह मेला कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद निगम की यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
पार्षद के पत्र के बाद हरकत में आया निगम
वार्ड क्रमांक-9 की पार्षद निशा पवन सोमानी ने भी 80 फीट रोड स्थित निजी भूखंड पर लग रहे मेले को लेकर नगर निगम प्रशासन से अनुमति, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था संबंधी जानकारी मांगी थी। पार्षद ने इस संबंध में नगर निगम आयुक्त को पत्र सौंपकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए थे।
क्षेत्रीय पार्षद द्वारा जवाब तलब किए जाने के बाद ही निगम प्रशासन सक्रिय हुआ और आनन-फानन में नोटिस जारी किया गया। बताया जा रहा है कि 11 मई को जारी नोटिस की समय-सीमा भी पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
अब शहरवासियों की नजर इस बात पर टिकी है कि नगर निगम इस बार वास्तव में सख्त कदम उठाता है या मामला पहले की तरह केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा।