रतलाम,20 फरवरी(खबरबाबा. कॉम)। फार्मर रजिस्ट्री कार्य की धीमी प्रगति को लेकर जिला प्रशासन और पटवारी संघ आमने-सामने आ गए हैं। प्रशासन ने कार्य में लापरवाही और उदासीनता के आरोप में दो पटवारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि 10 अन्य पटवारियों का एक दिन का वेतन रोकने की कार्रवाई की गई है। इसके विरोध में जिला पटवारी संघ ने मोर्चा खोलते हुए गुरुवार को गुलाब चक्कर पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। जिलेभर से पहुंचे पटवारी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर कार्रवाई वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
30 और 12.7 प्रतिशत प्रगति पर कार्रवाई
जावरा तहसील के हल्का क्रमांक 08 ग्राम पिपलीयासीर के पटवारी महेश सिंघाड़ को फार्मर रजिस्ट्री कार्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है। प्रशासन के अनुसार 12 अगस्त को हुई समीक्षा में संबंधित पटवारी के हल्के में फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति 30 प्रतिशत से कम पाई गई थी। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन जवाब नहीं दिया गया। नायब तहसीलदार ढोढर की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व में भी स्पष्टीकरण मांगा गया था।
इसी तरह सैलाना तहसील के हल्का नंबर 48 खेड़ीकला के पटवारी परमानन्द खेडड़ा को भी निलंबित किया गया है। प्रशासन के अनुसार खेड़ीखूर्द और हल्दूपाड़ा में फार्मर रजिस्ट्री का काम करीब 12.7 प्रतिशत ही हुआ था। इस संबंध में उन्हें भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसका जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। दोनों पटवारियों को मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
गुलाब चक्कर पर पटवारियों का धरना
प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में जिला पटवारी संघ ने गुलाब चक्कर पर धरना शुरू कर दिया है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पटवारी यहां एकत्रित हुए और नारेबाजी करते हुए दोनों निलंबन तथा 10 पटवारियों के एक दिन का वेतन रोकने की कार्रवाई का विरोध किया।
जिला पटवारी संघ अध्यक्ष गोपाल रावत ने कहा कि निलंबित दोनों पटवारी हाल ही में नई पदस्थापना पर आए हैं। नई जगह पर कार्यभार संभालने, क्षेत्र की स्थिति समझने और किसानों से संबंधित रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने में स्वाभाविक रूप से कुछ समय लगता है। सीधे निलंबित करना उचित नहीं है।
60 प्रतिशत काम के बाद भी वेतन रोका
संघ का कहना है कि कार्रवाई केवल दो पटवारियों तक सीमित नहीं है। 10 अन्य पटवारियों का एक दिन का वेतन भी रोक दिया गया है। संघ के अनुसार इन पटवारियों ने फार्मर रजिस्ट्री का करीब 60 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है। इसके बावजूद दंडात्मक कार्रवाई से पटवारियों में नाराजगी है।
ऑनलाइन व्यवस्था और OTP की तकनीकी दिक्कतें
पटवारी संघ का मुख्य तर्क यह है कि फार्मर रजिस्ट्री पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल आधारित प्रक्रिया है। इसमें किसानों के मोबाइल पर आने वाले OTP सहित कई तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। संघ का कहना है कि इन दिक्कतों से प्रशासन को लगातार अवगत कराया गया है। कई मामलों में तकनीकी कारणों से रजिस्ट्री पूरी नहीं हो पा रही है। इसके बावजूद तकनीकी बाधाओं को नजरअंदाज कर कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
क्या है फार्मर रजिस्ट्री?
फार्मर रजिस्ट्री सरकार की ऐसी डिजिटल व्यवस्था है, जिसमें किसान की पहचान, भूमि और खेती से संबंधित जानकारी को एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और कृषि सेवाओं का लाभ अधिक सुगमता से उपलब्ध कराना है। इसके लिए किसानों के भूमि रिकॉर्ड और अन्य विवरणों का सत्यापन कर डिजिटल किसान रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। प्रक्रिया ऑनलाइन होने के कारण मोबाइल नंबर, OTP, आधार प्रमाणीकरण और पोर्टल संबंधी तकनीकी समस्याएं कार्य की गति को प्रभावित कर सकती हैं।
अब टकराव इस बात पर है कि धीमी प्रगति के लिए जिम्मेदारी तय कर प्रशासनिक कार्रवाई की जाए या तकनीकी और मैदानी कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए पटवारियों को काम पूरा करने का पर्याप्त अवसर दिया जाए। पटवारी संघ ने कार्रवाई वापस नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी दी है।