रतलाम, 19 अगस्त(खबरबाबा. कॉम)।करीब चार साल पुराने राजू उर्फ राजपाल हत्याकांड में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव ने आरोपी कालू पिता कांतिलाल और बंटी उर्फ कमलेश को हत्या, अपहरण एवं साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोषसिद्ध पाया।
अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान के अनुसार मामला थाना शिवगढ़ के से संबंधित है।अभियोजन के अनुसार 4 नवंबर 2022 को ग्राम कालाखेत निवासी राजू उर्फ राजपाल को कुछ लोग जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर अपने साथ ले गए थे। इसके बाद उसका कोई पता नहीं चलने पर परिजनों ने तलाश शुरू की और 21 नवंबर 2022 को गुमशुदगी दर्ज कराई गई।
जांच के दौरान जामण पाटली की तलाई क्षेत्र से मानव खोपड़ी और अन्य हड्डियां बरामद हुईं। वैज्ञानिक जांच के लिए भेजे गए मानव अवशेषों का डीएनए परीक्षण कराया गया। डीएनए रिपोर्ट में अवशेषों का मिलान मृतक के पिता मांगू उर्फ मांगीलाल के रक्त नमूनों से होने पर राजू उर्फ राजपाल की पहचान स्थापित हुई।
वीडियो और डिजिटल साक्ष्य बने अहम कड़ी
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत श्रृंखला प्रस्तुत की। गवाहों के बयान से यह तथ्य सामने आया कि 4 नवंबर 2022 को मृतक को अंतिम बार आरोपी कालू, बंटी और अन्य लोगों के साथ देखा गया था।
इसके अलावा एक विधि-विरुद्ध बालक से जप्त मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में मिले वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों में मृतक को ले जाने तथा उसके साथ मारपीट किए जाने के तथ्य सामने आए। आरोपियों के मेमोरेंडम के आधार पर घटना से संबंधित सामग्री भी बरामद की गई। आरोपी कालू के कब्जे से प्रतिबंधित आकार का धारदार कटारनुमा चाकू भी जप्त किया गया।
न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर माना कि आरोपियों ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर राजू उर्फ राजपाल का अपहरण किया, उसके साथ मारपीट कर हत्या की और अपराध के साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को गड्ढे में छिपा दिया।
यह सजा सुनाई
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास और 5 हजार रुपए अर्थदंड, धारा 365 के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 2 हजार रुपए अर्थदंड तथा धारा 201 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया।
इसके अलावा आरोपी कालू को आयुध अधिनियम की धारा 25(1-बी)(बी) के तहत 2 वर्ष का सश्रम कारावास और 2 हजार रुपए अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।मामले में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने पैरवी की।