रतलाम,16सितम्बर(खबरबाबा. कॉम)।सपनों की कोई कीमत नहीं होती, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत की कीमत जरूर चुकानी पड़ती है। कुछ सपने सुविधाओं के बीच पूरे होते हैं, तो कुछ संघर्षों के बीच जन्म लेकर इतिहास लिखते हैं। खाचरौद की पूजा चौहान की कहानी भी ऐसे ही संघर्ष, संकल्प और सफलता की कहानी है।
पूजा के पिता राजू चौहान मोटरसाइकिल पर सामान लादकर गांव-गांव फेरी लगाते हैं। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। रोज की मेहनत के बीच उनके मन में एक सपना हमेशा रहा—बच्चे पढ़ें और जीवन में उनसे बेहतर मुकाम हासिल करें।
सुबह के 5 बजे, जब अधिकांश लोग अपने घरों में नींद में होते हैं, राजू चौहान अपनी मोटरसाइकिल पर सामान लादकर फेरी के लिए निकल पड़ते हैं। गांव-गांव घूमकर सामान बेचते हैं और फिर उसी कमाई से परिवार की जरूरतें और बच्चों की पढ़ाई पूरी करते हैं।
पिता की सुबह गांवों की गलियों से शुरू होती रही और बेटी की सुबह किताबों के साथ।
पूजा ने खाचरौद के मॉडल स्कूल से 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए उसने एक वर्ष Abhyas Career Institute, Ratlam में NEET की तैयारी की। परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन पूजा ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। नियमित अध्ययन, कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयास के साथ उसने NEET की तैयारी की।
मेहनत रंग लाई और पूजा ने MBBS में प्रवेश हासिल कर लिया। अब उसे Government Medical College (GMC), Ratlam में MBBS की सीट मिली है।यह उपलब्धि पूजा के लिए जितनी बड़ी है, उससे कहीं ज्यादा यह उसके पिता राजू चौहान के संघर्ष की जीत है।
जिस पिता ने मोटरसाइकिल पर सामान लादकर गांव-गांव फेरी लगाई, उसी पिता की बेटी अब मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर बनने की पढ़ाई करेगी। जिस मेहनत की कमाई से कभी किताबें खरीदी गईं, फीस भरी गई और पढ़ाई का खर्च उठाया गया, आज वही मेहनत बेटी को सफेद कोट के सपने के करीब ले आई है।
पूजा की सफलता उन तमाम विद्यार्थियों के लिए संदेश है जो सुविधाओं की कमी को अपनी कमजोरी समझते हैं। संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन सपनों की उड़ान सीमित नहीं होनी चाहिए। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और परिवार का विश्वास साथ हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता रोक नहीं सकतीं।
पूजा ने अपने पिता के संघर्ष को सिर्फ देखा नहीं, बल्कि उसे अपनी प्रेरणा बनाया। राजू चौहान ने गांव-गांव जाकर मेहनत की और पूजा ने किताबों के बीच बैठकर उस मेहनत का सम्मान किया।
आज GMC Ratlam में पूजा का MBBS में प्रवेश सिर्फ एक सीट मिलने की खबर नहीं है। यह एक पिता के त्याग, एक बेटी के संकल्प और एक परिवार के विश्वास की जीत है।एक तरफ पिता की मोटरसाइकिल गांव-गांव घूमती रही और दूसरी तरफ बेटी की किताबें उसे डॉक्टर बनने की मंजिल तक ले जाती रहीं। दोनों की मेहनत आज एक मुकाम पर आकर मिल गई है।
राजू चौहान की मेहनत ने पूजा के सपनों को पंख दिए और पूजा की मेहनत ने उस संघर्ष को सम्मान।अब खाचरौद की बेटी GMC Ratlam में डॉक्टर बनने की राह पर है।